PETA इंडिया द्वारा उठाई गई चिंताओं के बाद बेलगावी प्रशासन ने चिंचली जात्रा के लिए पशु-मुक्त परिवहन का आदेश दिया
PETA इंडिया द्वारा उठाई गई चिंताओं के बाद बेलगावी के उपायुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री मोहम्मद रोशन, आईएएस ने पशुओं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कर्नाटक पुलिस अधिनियम, 1963 की धारा 31 के तहत जारी इस आदेश में चिंचली मायाक्का देवी मेले (जात्रा) में श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए पशुओं द्वारा खींची जाने वाली गाड़ियों के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब मेले में आने-जाने के लिए केवल पशु-मुक्त परिवहन का ही उपयोग किया जाएगा। इस आदेश में पशुओं के कल्याण को सुनिश्चित करने और धीमी गति से चलने वाली पशु-गाड़ियों के कारण होने वाले यातायात जोखिम को कम करने के लिए भी कई अन्य प्रावधान किए गए हैं।
बेलगावी जिले में आयोजित होने वाली चिंचली मायाक्का देवी जात्रा में हर वर्ष महाराष्ट्र और कर्नाटक के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कार्य करने वाले पशुओं के कल्याण के लिए समर्पित संस्था एनिमल राहत कई वर्षों से श्रद्धालुओं को बैलगाड़ियों और अन्य पशु-गाड़ियों के बजाय बसों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु निःशुल्क बसों की व्यवस्था करती रही है। इसके अलावा, अक्टूबर 2019 में मायाक्का देवी मंदिर ट्रस्ट ने भी एक ज्ञापन जारी कर कहा था कि लंबी यात्रा के दौरान पशुओं को अत्यधिक कष्ट होता है और आज जब अन्य परिवहन साधन आसानी से उपलब्ध हैं, तो उन्हीं का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके बावजूद हर वर्ष अनेक श्रद्धालु घोड़ों, टट्टुओं और बैलों द्वारा खींची जाने वाली गाड़ियों से यात्रा करते रहे हैं। बेलगावी प्रशासन के इस नए आदेश के बाद एनिमल राहत ने यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है कि चिंचली जात्रा तक बस से यात्रा करने के इच्छुक सभी श्रद्धालुओं को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
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आदेश के अनुसार, मेले में आने-जाने के लिए बैल, घोड़े, टट्टू, खच्चर, गधे अथवा किसी भी अन्य पशु द्वारा खींची जाने वाली गाड़ियों से यात्रियों का परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके साथ ही मेले के लिए या मेले से इन पशुओं को ले जाना, उनसे दौड़, गति-परीक्षण (स्पीड ट्रायल), प्रतियोगिताएं या इसी प्रकार की अन्य गतिविधियां कराना भी प्रतिबंधित किया गया है। अलग-अलग प्रजातियों के पशुओं को एक ही गाड़ी या वाहन में एक साथ जोतने पर भी रोक लगाई गई है। यह आदेश प्रत्येक वर्ष मेले की अवधि के दौरान प्रभावी रहेगा तथा इसके उल्लंघन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 तथा कर्नाटक पुलिस अधिनियम, 1963 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
आदेश के तहत PETA इंडिया को पुलिस, परिवहन, राजस्व एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों तथा स्थानीय प्रशासन के लिए मेले से पहले जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया है। इन कार्यशालाओं में संबंधित अधिकारियों की भागीदारी अनिवार्य होगी।
इतनी लंबी दूरी तक पैदल चलकर परिवहन कार्य कराना तथा पशुओं को अवैध दौड़, स्पीड ट्रायल और अन्य शोषणकारी गतिविधियों में शामिल करना उन्हें अत्यधिक दर्द, थकान, चोट और अनावश्यक पीड़ा पहुंचाता है। इस आदेश में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1), पैदल पशु परिवहन नियम, 2001, बोझा एवं भारवाही पशु नियम, 1968, कर्नाटक पशु कल्याण बोर्ड द्वारा 28 अगस्त 2018 को नुकीले लगाम (स्पाइक्ड बिट्स) पर लगाए गए प्रतिबंध तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 168 का भी उल्लेख किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इसका उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023, पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960, उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों तथा कर्नाटक पुलिस अधिनियम, 1963 की संबंधित धाराओं सहित अन्य लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
PETA इंडिया ने सांगली, सोलापुर, कोल्हापुर और सतारा के जिला कलेक्टरों को भी पत्र लिखकर अपने-अपने जिलों में इसी प्रकार के आदेश जारी करने का अनुरोध किया है। साथ ही, बेलगावी के उपायुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट के आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग देने का भी आग्रह किया गया है।
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