रेवाड़ी में मादा कुत्ते के साथ दुष्कर्म- PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद एफआईआर दर्ज

Posted on by Surjeet Singh

हरियाणा के रेवाड़ी जिले के रामगढ़ गांव में एक सामुदायिक मादा कुत्ते के साथ दुष्कर्म किए जाने की सूचना मिलने पर PETA इंडिया ने सदर पुलिस थाना के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया कि मामले में तुरंत प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की जाए। वीडियो साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(a) और 11(1)(l) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आरोपी रविंदर कुमार उर्फ़ रैमी वीडियो में एक मादा कुत्ते का यौन शोषण करते हुए दिखाई देता है। उसने स्वीकार किया कि वह लंबे समय से उस कुत्ते को दिन में दो बार भोजन खिलाता था और इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसे अपने परिसर में ले गया। 15 जून की रात लगभग 11:45 बजे एक पड़ोसी ने आरोपी के घर की खिड़की से इस दुष्कर्म का वीडियो रिकॉर्ड किया।

वर्ष 2021 में फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइजेशन्स (FIAPO) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, उससे पहले के दस वर्षों में लगभग पांच लाख पशु, जिनमें गाय और कुत्ते भी शामिल थे, अपराधों का शिकार हुए तथा अनेक मामलों में उनके साथ यौन हिंसा की गई। वॉयस ऑफ स्ट्रे डॉग्स की एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि पशुओं के साथ यौन शोषण के अधिकांश मामलों की रिपोर्ट दर्ज नहीं होती, लेकिन ऐसे अपराध संभवतः मनुष्यों के विरुद्ध होने वाले दुष्कर्म के मामलों के समान स्तर पर होते हैं।

पशुओं के प्रति क्रूरता गंभीर मानसिक विकृति का संकेत हो सकती है। मनोविज्ञान और अपराध विज्ञान के क्षेत्र में किए गए शोध बताते हैं कि जो लोग पशुओं के साथ क्रूरता करते हैं, वे अक्सर आगे चलकर मनुष्यों के विरुद्ध भी हिंसक अपराध करते हैं। अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने भी पाया है कि पशुओं के प्रति क्रूरता का इतिहास कई सिलसिलेवार बलात्कारियों और हत्यारों के मामलों में एक सामान्य विशेषता के रूप में सामने आता है।

PETA इंडिया का कहना है कि अनेक हिंसक अपराधियों का पशुओं के प्रति क्रूरता का इतिहास दर्ज है। जर्नल ऑफ इमोशनल एब्यूज़ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, अपने पालतू पशुओं के साथ सुरक्षित आश्रय गृहों में पहुंची 71 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि उनके साथी ने उनके पशुओं को धमकाया, घायल किया या मार डाला था। फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में कहा गया है कि पशुओं के प्रति क्रूरता करने वाले लोगों द्वारा हत्या, दुष्कर्म, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और मादक पदार्थों के दुरुपयोग जैसे अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है। अध्ययन के अनुसार, पशुओं के प्रति क्रूरता के प्रमुख कारणों में क्रोध, मनोरंजन, नियंत्रण की भावना, भय, घृणा, प्रतिशोध, नकल और यौन संतुष्टि शामिल हैं। भारत में केरल की कानून की छात्रा जिशा के साथ दुष्कर्म और हत्या के दोषी आमीरुल इस्लाम का भी कुत्तों और बकरियों के साथ दुष्कर्म एवं उनकी हत्या करने का इतिहास सामने आया था।

PETA इंडिया ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह से अनुरोध किया है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) में संशोधन कर पशुओं के साथ यौन शोषण को स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध बनाया जाए। भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 377 के तहत पशुओं के साथ यौन हिंसा दंडनीय अपराध थी, लेकिन वर्तमान भारतीय न्याय संहिता (BNS) में पशुओं को समान कानूनी संरक्षण प्रदान करने वाला कोई प्रावधान नहीं है। आईपीसी की धारा 377 के अंतर्गत पशु के साथ दुष्कर्म एक गैर-जमानती अपराध था, जिसके लिए आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कारावास तथा जुर्माने का प्रावधान था।

पशुओं को मजबूत कानूनी संरक्षण प्रदान करना पूरे समाज की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पशुओं के प्रति क्रूरता और मनुष्यों के विरुद्ध हिंसा के बीच संबंध अच्छी तरह स्थापित है।

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