धाराशिव की लोकमंगल मौली इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड बनी PETA इंडिया के ‘100% बैल-मुक्त’ प्रमाणन प्राप्त करने वाली दूसरी चीनी मिल

Posted on by Shreya Manocha

सोलापुर स्थित लोकमंगल समूह की लोकमंगल मौली इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड, धाराशिव पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA इंडिया) के ‘100% बैल-मुक्त’ (100% Bull-Free) प्रमाणन से सम्मानित होने वाली दूसरी चीनी मिल बन गई है। यह प्रमाणन उन चीनी मिलों को दिया जाता है, जिन्होंने अपने संचालन से बैलों से काम लेने या उन्हें इस्तेमाल करने को पूरी तरह बंद कर दिया है। इस प्रमाणन को प्राप्त करने वाली पहली चीनी मिल जय हिंद शुगर प्राइवेट लिमिटेड थी, जिसने जून माह की शुरुआत में यह उपलब्धि हासिल की थी।

यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि भारत और दुनिया भर के चीनी खरीदार अब ऐसे चीनी आपूर्ति तंत्र को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसमें पशुओं का उपयोग न हो और जो पूरी तरह मशीनीकृत हो। यह बदलाव पशु कल्याण और मानव कल्याण, दोनों के प्रति बढ़ती जागरूकता का परिणाम है। यह प्रमाणन एनिमल राहत की शुगरकेन इंडस्ट्री मैकेनाइजेशन परियोजना का भी समर्थन करता है, जिसके तहत चीनी मिलों को बैलगाड़ियों के स्थान पर ट्रैक्टर जैसे आधुनिक विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे बैलों को भारी-भरकम गन्ने से लदी गाड़ियों को खींचने के कठिन श्रम से मुक्ति मिल रही है।

Credit: PETA India

“हमें PETA इंडिया का ‘100% बैल-मुक्त’ प्रमाणन प्राप्त करके गर्व महसूस हो रहा है। गन्ने के परिवहन का मशीनीकरण करने की हमारी प्रतिबद्धता आधुनिकता और दक्षता के प्रति हमारे दृष्टिकोण को दर्शाती है। हमारा विश्वास है कि तकनीक और विकास का लाभ श्रमिकों और पशुओं, दोनों को मिलना चाहिए।” – महेश देशमुख, अध्यक्ष, लोकमंगल मौली इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड  

बैल सामाजिक स्वभाव वाले पशु हैं, जो अन्य बैलों और गायों के साथ गहरे संबंध बनाते हैं तथा उनसे अलग होने पर तनाव महसूस करते हैं। इसके बावजूद, चीनी उद्योग में उन्हें अत्यंत कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। वे भीषण गर्मी में बहुत कम आराम, भोजन और पानी के साथ भारी-भरकम गन्ने से लदी गाड़ियों को खींचते हैं। अक्सर उनसे कानून द्वारा निर्धारित सीमा से लगभग दोगुना भार खिंचवाया जाता है। उन्हें नियंत्रित करने के लिए नाक में डाली गई रस्सियों और नुकीले हथियारों, जैसे लोहे की कीलों वाले डंडे, बेलनाकार नुकीले उपकरण और कांटेदार तार का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे उन्हें बार-बार गंभीर चोटें लगती हैं।

बैलगाड़ियों के उपयोग को समाप्त करना केवल मानवीय कदम ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक और आर्थिक रूप से भी लाभदायक है। बैलगाड़ियों के स्थान पर ट्रैक्टर और ट्रकों के उपयोग से बैलों को कठिन श्रम से मुक्ति मिलती है, पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता समाप्त होती है तथा परिवहन अधिक सुरक्षित और दक्ष बनता है। इससे गन्ना परिवहन से जुड़े परिवारों की आय और कार्य परिस्थितियों में भी सुधार होता है। इनमें से कई परिवार हर वर्ष गन्ने की कटाई के मौसम में अपने बैलों के साथ आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों से पलायन करते हैं और अनेक कठिनाइयों का सामना करते हैं। एक ट्रैक्टर एक बार में 8 से 18 टन तक गन्ना ढो सकता है और कई बैलों का कार्य अकेले कर सकता है। इससे बैलों के मालिकों को आजीविका के अन्य अवसर तलाशने के लिए भी अधिक समय मिलता है।

पेप्सिको से अपील करें कि वह चीनी के परिवहन के लिए बैलों के बजाय ट्रैक्टरों का उपयोग करे।

यूनिलीवर से अपील करें कि वह चीनी के परिवहन के लिए बैलों के बजाय ट्रैक्टरों का उपयोग करे।