यूरोपीय संघ रसायनों के परीक्षण के लिए पशुओं के उपयोग को समाप्त करने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ा
यूरोपीय आयोग ने ‘रासायनिक सुरक्षा मूल्यांकन के लिए पशुओं पर परीक्षण को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की रूपरेखा (Roadmap towards phasing out animal testing for chemical safety assessments)’ प्रकाशित करके एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह ऐसे समय में हुआ है जब भारत में भी इस दिशा में गति तेज़ हो रही है। हाल ही में PETA इंडिया के वैज्ञानिकों ने एक शोध-पत्र प्रकाशित किया, जिसमें कीटनाशकों के परीक्षण संबंधी आवश्यकताओं में पशुओं का उपयोग न करने वाली वैज्ञानिक और व्यावहारिक परीक्षण विधियों को शामिल करने के प्रभावी उपाय बताए गए हैं। ये दोनों पहल इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि रसायनों की सुरक्षा का मूल्यांकन अब विश्वसनीय और आधुनिक गैर-पशु परीक्षण विधियों की ओर बढ़ रहा है।
यूरोपीय संघ की यह उपलब्धि PETA यू.के. द्वारा “यूरोपीय नागरिक पहल (European Citizens’ Initiative – ECI) ‘सेव क्रुएल्टी-फ्री कॉस्मेटिक्स – कमिट टू अ यूरोप विदआउट एनिमल टेस्टिंग'” को आगे बढ़ाने में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका के बाद सामने आई है। इस पहल ने गैर-लाभकारी संगठनों, नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों और डव (Dove) तथा द बॉडी शॉप (The Body Shop) सहित कई वैश्विक ब्रांडों को एक मंच पर लाया।
अब उस सामूहिक प्रयास के परिणाम सामने आने लगे हैं।
PETA यू.के. के वैज्ञानिक शुरुआत से ही इस रूपरेखा को तैयार करने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल रहे। उन्होंने विशेषज्ञ कार्य समूहों में भाग लिया तथा उन कार्यशालाओं के आयोजन और प्रस्तुतिकरण में सहयोग किया, जिनके आधार पर यह रूपरेखा तैयार की गई। यह दस्तावेज़ उसी बात की पुष्टि करता है, जिसे PETA के वैज्ञानिक और अन्य विशेषज्ञ लंबे समय से कहते आ रहे हैं—कि गैर-पशु परीक्षण विधियां रसायनों के संपर्क का मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव तेज़ी से, विश्वसनीय ढंग से और सटीकता के साथ बता सकती हैं।
यह रूपरेखा पहली बार एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करती है। यूरोपीय आयोग ने पूरे यूरोपीय संघ में रसायनों की सुरक्षा जांच के लिए पशुओं पर होने वाले परीक्षणों को आधुनिक, विश्वसनीय और प्रासंगिक गैर-पशु वैज्ञानिक विधियों से प्रतिस्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके परिणामस्वरूप मछलियों को घातक विषाक्तता परीक्षणों में ज़हर नहीं दिया जाएगा, गर्भवती खरगोशों को नलियों के माध्यम से जबरन रसायन नहीं खिलाए जाएंगे और चूहों को रसायन सूंघने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
यूरोपीय आयोग ने विभिन्न पशु परीक्षणों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की है तथा कुछ विशिष्ट परीक्षणों को आने वाले वर्षों में बदलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही, यूरोपीय संघ नवाचार को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने और ऐसी पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी योजना बना रहा है, जिससे प्रगति स्पष्ट रूप से दिखाई दे और आयोग तथा नियामक एजेंसियां अपनी जवाबदेही निभाएं।
हालांकि, इस रूपरेखा में रसायनों के परीक्षण के लिए पशुओं के सभी उपयोग शामिल नहीं हैं। उदाहरण के लिए, मानव और पशु चिकित्सा में प्रयुक्त कुछ दवाओं, जिनमें टीके और जीन थेरेपी शामिल हैं, के परीक्षण अभी भी इसके दायरे से बाहर हैं। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट नहीं है कि आगे की प्रक्रिया के लिए वित्तीय सहायता कौन उपलब्ध कराएगा। पर्याप्त धनराशि न मिलने पर इस दिशा में प्रगति धीमी पड़ सकती है। साथ ही, आवश्यक कानूनी संशोधनों के अभाव में पुराने पशु परीक्षण जारी रह सकते हैं। इस रूपरेखा के तहत भी जहां नियामक यह मानते हैं कि गैर-पशु परीक्षण विधियां अभी “स्वीकार्य” नहीं हैं, वहां पशुओं पर परीक्षण जारी रखने की अनुमति बनी रहेगी।
इसलिए, इस रूपरेखा का प्रकाशित होना केवल शुरुआत है। अब आवश्यक है कि यूरोपीय रसायन एजेंसी (European Chemicals Agency) सहित सभी संबंधित यूरोपीय सरकारी संस्थाएं इस दिशा में शीघ्र और निर्णायक कदम उठाएं।
यूरोपीय संघ की यह रूपरेखा एक मजबूत संदेश देती है कि आधुनिक और गैर-पशु वैज्ञानिक विधियों की ओर बदलाव पूरी तरह संभव है। भारत में भी इस दिशा में वैज्ञानिक ढांचा विकसित हो रहा है। ऐसे में नियामक संस्थाओं के पास अब स्पष्ट अवसर और जिम्मेदारी है कि वे निर्णायक कदम उठाएं और इस परिवर्तन की गति को तेज़ करें।
आप क्या कर सकते हैं?
सभी जीवों के हित में आधुनिक, वैज्ञानिक और गैर-पशु परीक्षण विधियों को बढ़ावा देने के लिए PETA इंडिया के अभियान से जुड़ें।