PETA इंडिया ने केरल के श्री चूडिक्कल भद्रकाली मंदिर को असली हाथी के आकार का मेकेनिकल हाथी ‘कालिदासन’ दान किया।
PETA इंडिया ने केरल के श्री चूडिक्कल भद्रकाली मंदिर को असली हाथी की आकार का एक मेकेनिकल हाथी ‘कालिदासन’ दान किया।
यूडीएस होटल्स के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर, श्री चेंकल एस. राजशेखरन नायर ने ‘कालिदासन’ का अनावरण किया। इस यांत्रिक हाथी का उपयोग मंदिर में सुरक्षित और क्रूरता-मुक्त तरीके से समारोह आयोजित करने के लिए किया जाएगा, जिससे असली हाथी अपने परिवारों के साथ जंगल में रह सकें।
यह पहल PETA पीईइंडिया द्वारा मंदिर के उस करुणामय निर्णय की सराहना में की गई, जिसमें उसने कभी भी जीवित हाथियों को रखने या किराए पर लेने से इनकार किया। यह नया मेकेनिकल हाथी ‘कालिदासन’ केरल में दान किया जाने वाला 12वाँ मेकेनिकल हाथी है। इसके साथ ही, PETA इंडिया ने अब तक पूरे देश में कुल 22 मेकेनिकल हाथी दान किए हैं।
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“हमारे लिए ‘कालिदासन’ का स्वागत करना एक सौभाग्य है। हम हमेशा अपनी परंपराओं का सम्मान करना चाहते थे, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहते थे कि इस प्रक्रिया में किसी भी जीव को पीड़ा न हो। ‘कालिदासन’ के साथ, हम उसी श्रद्धा के साथ अपने अनुष्ठानों को जारी रख सकते हैं, जबकि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि हाथी और मनुष्य दोनों सुरक्षित रहें।”
— यूडीएस होटल्स के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर, श्री चेंकल एस. राजशेखरन नायर
हाथी अत्यंत बुद्धिमान, सक्रिय और सामाजिक जंगली पशु हैं। कैद में, उन्हें जुलूसों में इस्तेमाल करने के लिए मार-पीट, हथियारों के उपयोग और बल के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है। मंदिरों और अन्य स्थानों पर कैद रखे गए अधिकांश हाथी लंबे समय तक कंक्रीट पर जंजीरों से बंधे रहने के कारण गंभीर पैरों और टांगों की चोटों से पीड़ित होते हैं। अधिकांश को पर्याप्त भोजन, पानी, पशु-चिकित्सा देखभाल और प्राकृतिक जीवन का कोई भी स्वरूप नहीं मिलता। इन अमानवीय परिस्थितियों में, कई हाथी अत्यधिक तनावग्रस्त हो जाते हैं और हिंसक प्रतिक्रिया देते हैं, जिससे कभी-कभी महावतों या अन्य मनुष्यों व जानवरों की जान भी चली जाती है।
मेकेनिकल हाथी लगभग 3 मीटर ऊँचे होते हैं और उनका वजन 500 किलोग्राम होता है। इन्हें रबर, फाइबर, धातु, जाली, फोम और स्टील से बनाया जाता है और ये पाँच मोटरों पर चलते हैं। यांत्रिक हाथी दिखने और उपयोग में वास्तविक हाथी जैसे होते हैं, वे सिर हिला सकते हैं, कान और आँखें हिला सकते हैं, पूंछ हिला सकते हैं, सूंड उठा सकते हैं और पानी भी छिड़क सकते हैं। इन पर चढ़ा जा सकता है और इनके ऊपर सीट भी लगाई जा सकती है। इन्हें बिजली से आसानी से संचालित किया जा सकता है। यह एक बेस के ऊपर बनाए जाते हैं जिनमे पहिये लगे रहते है और पहियों के द्वारा इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी ले जाया जा सकता है। इन्हें अनुष्ठानों और जुलूसों में आसानी से घुमाया जा सकता है।

