PETA इंडिया की शिकायत के बाद, बलरामपुर में कुत्तों का इस्तेमाल कर वन्यजीवों का शिकार करने एवं उन्हें मौत के घाट उतारने वाले व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर एवं वन अपराध रिपोर्ट दर्ज
बलरामपुर जिले में संरक्षित वन्यजीवों और समुदाय के पशुओं के अवैध शिकार और हत्या से जुड़े एक परेशान करने वाले मामले के वीडियो प्राप्त होने के बाद, PETA इंडिया ने वन और पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
आरोपी मोहम्मद हुसैन, जो कथित रूप से बलरामपुर जिले के पचपेड़वा ब्लॉक के कटैया भरी गांव का निवासी है, अपने कुत्तों का इस्तेमाल कर जंगली पशुओं को पकड़ने, उनका शिकार करने और मारने के लिए करता पाया गया। शिकार करने वाले पशुओं में जंगल कैट्स भी शामिल थीं जो वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम (WPA), 1972 की अनुसूची I के तहत संरक्षित प्रजाति हैं, साथ ही समुदायिक बिल्लियां और एक सांड भी शामिल थे। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में कुत्तों को जानबूझकर उकसाते और पशुओं पर हमला करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए दिखाया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ये कृत्य योजनाबद्ध और जानबूझकर किए गए थे।
शिकायत मिलने पर, PETA इंडिया ने पुलिस अधीक्षक और प्रभागीय वन अधिकारी, बलरामपुर के साथ संपर्क किया और फिर लगातार उनके साथ फॉलोअप के परिणामस्वरूप, आरोपी के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत एक वन अपराध रिपोर्ट (FOR) और भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 तथा पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960 की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई है। इस मामले में अभी भी जाँच जारी है।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9 संरक्षित जंगली पशुओं के शिकार पर प्रतिबंध लगाती है। धारा 2(16) के तहत “शिकार” में किसी भी जंगली पशु को मारना या मारने का प्रयास करना, साथ ही ऐसे कृत्यों को अंजाम देने के लिए पशुओं को चारा बनाना या उनका उपयोग करना शामिल है। जंगल कैट्स को अनुसूची I में सूचीबद्ध किए जाने के कारण इस अधिनियम के तहत उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्राप्त है। अधिनियम की धारा 51 के अनुसार, अनुसूची I की प्रजातियों से संबंधित अपराधों के लिए कम से कम तीन वर्ष की सजा, जो सात वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है, तथा कम से कम ₹25,000 का जुर्माना निर्धारित है।
इसके अतिरिक्त, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 पशुओं को लड़ाने के लिए उकसाना या उन्हें अनावश्यक पीड़ा और कष्ट पहुँचाना अपराध घोषित करती है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 325 किसी भी पशु को विकलांग बनाने या मारने को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखती है और इसके लिए पांच वर्ष तक की सजा या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान करती है।
संरक्षित वन्यजीवों का शिकार करने और उन्हें मारने के लिए कुत्तों को हथियार की तरह इस्तेमाल करना न केवल क्रूर है बल्कि एक गंभीर अपराध भी है। वीडियो में दिखाई गई जानबूझकर की गई उकसाहट क्रूरता और कानून की पूरी तरह अनदेखी को दर्शाती है। हम बलरामपुर वन प्रभाग और बलरामपुर जिला पुलिस की सराहना करते हैं कि उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए FOR और FIR दोनों दर्ज कीं। ऐसे जघन्य कृत्यों को रोकने और वन्यजीवों की रक्षा के लिए कानून का सख्ती से पालन आवश्यक है।
PETA इंडिया सिफारिश करता है कि पशु उत्पीड़न करने वालों का मनोचिकित्सीय मूल्यांकन कराया जाए और उन्हें परामर्श दिया जाए, क्योंकि पशुओं के साथ दुर्व्यवहार गहरी मानसिक समस्या का संकेत हो सकता है। शोध से पता चलता है कि जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, वे अक्सर बार-बार अपराध करने वाले होते हैं और बाद में अन्य पशुओं, यहां तक कि मनुष्यों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है, “जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता में संलग्न थे, उनके द्वारा अन्य अपराध जिनमें हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीले पदार्थों का दुरुपयोग शामिल हैं, करने की संभावना तीन गुना अधिक थी।”
