पिट बुल द्वारा एक 6 वर्ष के बच्चे पर हमले के बाद, PETA इंडिया ने राजधानी में अवैध लड़ाई के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विदेशी नस्ल के कुत्तों पर प्रतिबंध लगाने की अपील को फिर से दोहराया
दिल्ली के प्रेम नगर क्षेत्र में एक विदेशी नस्ल के कुत्ते (पिट बुल) जिसे आमतौर पर आक्रामकता के लिए ब्रीड किया एवं पाला जाता है, ने हमला कर एक 6-साल के बच्चे को गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस हमले से बच्चे का दायां कान बुरी तरह जखमी हो गया। यह घटना सामने आने के बाद, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) ने दिल्ली के मुख्य सचिव श्री राजीव वर्मा, IAS, और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रॉबिन बलेजा, IDES को पत्र लिखकर अपनी पुरानी अपील को फिर से दोहराया है। इसमें दिल्ली से ऐसी नीति लागू करने का आग्रह किया गया है जो पिट बुल टेरियर, रॉटवेलर, पाकिस्तानी बुली कुत्ते, डोगो अर्जेंटिनो (अर्जेंटीनी मास्टिफ), प्रेसा कैनारियो, फिला ब्राज़िलेरियो (ब्राज़ीलियन मास्टिफ), बुल टेरियर, केन कोर्सो (इटैलियन मास्टिफ) और XL बुलीज़ जैसे विदेशी कुत्तों की नस्लों के प्रजनन, बिक्री और पालन को प्रतिबंधित किया जाए क्योंकि इन्हें जानबूझकर लड़ाई और आक्रामकता के लिए पाला गया है। PETA इंडिया चेतावनी देता है कि ऐसे कुत्तों को अक्सर अनजान खरीदारों को बेच दिया जाता है, जो स्वयं इन पशुओं द्वारा हमला किए जाने या उन्हें नियंत्रित न कर पाने के खतरे में रहते हैं।
PETA इंडिया सरकार से यह भी आग्रह करता है कि वह राजधानी में पालतू पशुओं की बिक्री करने वाली ऐसी दुकाने एवं ब्रीडर्स पर कठोर कार्यवाई करे जो दिल्ली राज्य पशु कल्याण बोर्ड में पंजीकृत नहीं हैं। प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (पेट शॉप) नियम, 2018 और प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (डॉग ब्रीडिंग एंड मार्केटिंग) नियम, 2017 के तहत यह आवश्यक है कि पशुओं की बिक्री एवं ब्रीड करने वालों का राज्य पशु कल्याण बोर्ड के तहत पंजीकृत हों। PETA ने सरकार से यह भी अनुरोध किया है कि आश्रयों व सड़कों पर जीवन यापन करने वाले सामुदायिक कुत्तों को गोद लेने को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित करे।
कुत्तों द्वारा हमला करने के यह घटनाएँ कोई पहली बार नहीं हो रही हैं इससे पहले भी पूरे वर्ष के दौरान दिल्ली में कुत्तों के हमले के कई मामले सामने या चुके हैं। अक्टूबर 2024 में, एक पालतू पिट बुल ने 22-साल के युवक का लगभग पूरा कान काट लिया, जिसे जोड़ने के लिए 11-घंटे की माइक्रोसर्जरी करनी पड़ी। सितंबर 2024 में, बुराड़ी में एक पिट बुल ने एक बछड़े के चेहरे पर काट लिया। मार्च 2024 में, शाहदरा के जगतपुरी में घर के बाहर खेल रही 7-साल की एक बच्ची पर एक पालतू पिट बुल ने हमला कर उसे काटा और घसीटा तब आसपास लोगों ने उसे बचाया। जनवरी 2024 में, बुराड़ी में 18-महीने के बच्चे पर पिट बुल ने हमला किया, बच्चे के पैर में फ्रैक्चर हो गया और उसे 18 टांके लगे। नवंबर 2023 में, स्वरूप नगर में एक पिट बुल के मालिक ने अपने कुत्ते को हमला करने के लिए उकसाया तो कुत्ते ने एक महिला को काट लिया था।
केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ ने हाल ही में रॉटवेलर और आक्रामकता व लड़ाई के लिए पाली जाने वाली कुछ पिट बुल-जैसी खूंखार नस्लों के पालन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है। गोवा राज्य भी ऐसे ही प्रतिबंधों को अंतिम रूप दे रहा है। झारखंड सरकार ने हाल ही में पिट बुल, रॉटवेलर और कुछ अन्य विदेशी हमलावर नस्लों के पालन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है। इससे पहले, कई नगर निगमों ने शहर की सीमाओं के भीतर पिट बुल और रॉटवेलर के पालन से संबंधित नियम लागू किए थे।
क्योंकि ऐसे कुत्तों को आमतौर पर अवैध लड़ाई के लिए पाला जाता है या उन्हें खूंखार और आक्रमणकारी बनाने के लिए भारी जंजीरों से बांधकर रखा जाता है, वे जीवनभर पीड़ा सहते हैं, जिससे वे भयभीत और रक्षात्मक हो जाते हैं। इन कुत्तों के आपस में लड़वाने वाली भयावह लड़ाइयाँ दो घंटे तक चल सकती हैं। आम चोटों में गंभीर नीले निशान, गहरे घाव और हड्डियाँ टूटना शामिल है। यह खूनी खेल इन खूंखार कुत्तों को इतना थका देता है कि वे आगे लड़ भी नहीं पाते या अपना बचाव भी नहीं कर पाते। कुछ कुत्ते रिंग में ही मर जाते हैं, जबकि कुछ लड़ाई के कुछ घंटों या दिनों बाद थकान और चोटों के कारण दम तोड़ देते हैं। उनकी मौतें खून बहने, सदमा, निर्जलीकरण, थकावट या संक्रमण के कारण हो सकती हैं। कई लड़ाई में इस्तेमाल किए जाने वाले कुत्ते दर्दनाक शारीरिक विकृतियों जैसे कान-कटिंग (ईयर-क्रॉपिंग) से गुजरते हैं, यह एक अवैध प्रक्रिया है जिसमें लड़ाई के दौरान किसी अन्य कुत्ते द्वारा कान पकड़ने से बचने के लिए कुत्ते के कान का हिस्सा काट दिया जाता है।
भारत में, कुत्तों को लड़ाने के लिए उकसाना प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट, 1960 के तहत अवैध है। फिर भी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान सहित भारत के कई हिस्सों में संगठित कुत्तों की लड़ाइयाँ सामान्य हैं।
भारत में अनुमानित 5.25 करोड़ कुत्ते सड़कों पर रहते हैं, और लगभग 80 लाख कुत्ते पहले से ही भीड़भाड़ वाले आश्रयों में अच्छे घरों की प्रतीक्षा करते हुए कष्ट झेल रहे हैं। PETA इंडिया का कहना है कि इन समस्याओं का समाधान करने के मानवीय और व्यावहारिक तरीके जो विज्ञान और वास्तविकता पर आधारित हैं, केवल एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियम, 2023 को देशभर में प्रभावी रूप से लागू करना है।
संकल्प लें कि आप कभी पशु को खरीदेगे नहीं बल्कि जरुरतमन्द को गोद लेंगे