कुत्ते ‘बेघर’ नहीं, वह भी स्थानीय निवासी हैं- हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, PETA इंडिया का नया बिलबोर्ड अभियान नागरिकों को याद दिलाता है कि यह शहर उनका भी है
हाल ही में, समुदायिक कुत्तों को रेलवे स्टेशनों, विश्वविद्यालयों और अन्य स्थानों से हटाने वाले सुप्रीम कोर्ट के अत्यधिक विवादित आदेश के बाद, PETA इंडिया ने शहर में एक बिलबोर्ड लगाया है, जिसमें इन कुत्तों की सुरक्षा करने और उनके प्रति दयालु व्यवहार करने की जोरदार अपील की गई है क्योंकि आखिरकार, ये भी इसी शहर में जन्मे और और यही इनका पालन पोषण हुआ है तो अन्य मुंबई वासियों की तरह ये भी मुंबईकर ही हैं।
समुदायिक कुत्ते स्वभाव से बुद्धिमान और संवेदनशील होते हैं, और वे भी शहर में उसी तरह जीवित रहने की कोशिश कर रहे हैं, जैसे हम। वे हमारे इंसानी पड़ोसियों की तरह ही दया और प्रेम के हकदार हैं। PETA इंडिया जनता से अपील करता है कि वे हमारे समाज के इन कुत्ते सदस्यों पर नज़र रखें और उनके साथ होने वाली किसी भी क्रूरता की सूचना PETA इंडिया, पुलिस या किसी अन्य पशु संरक्षण संगठन को दें। PETA इंडिया यह भी अनुरोध करता है कि सामुदायिक कुत्तों की देखबहाल करने वाले लोग, इन कुत्तों के गले में रंग-बिरंगे पट्टे (बैंडाना) बांधें, ताकि उन्हें पकड़कर ले जाने से बचाया जा सके।
PETA इंडिया के अनुसार भारत में अनुमानित 5.25 करोड़ कुत्ते सड़कों पर जीवन यापन करते हैं, 80 लाख पहले ही अत्यधिक संख्या वाले आश्रयों में अच्छे घरों का इंतजार करते हुए पीड़ित हैं, और लगभग 50 लाख बेघर पशु हैं जो मुख्य रूप से डेयरी उद्योग के शिकार हैं, जो नर बछड़े होने के कारण या दूध देने लायक ना बची गाय भैंसे हैं और इन इन्हें बेकार मानकर डेयरी उद्योग द्वारा इनका त्याग किया जा चुका है। PETA इंडिया का सुझाव है कि इन समस्याओं का एकमात्र मानवीय और व्यावहारिक समाधान, जो विज्ञान और वास्तविकता पर आधारित हो, वह है देशव्यापी स्तर पर एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 का क्रियान्वयन और वीगन (डेयरी-मुक्त) जीवनशैली अपनाना। PETA इंडिया यह भी आग्रह करता है कि अवैध पंजीकरण वाले पेट शॉप और ब्रीडर्स बंद किए जाएं, क्यूंकी यह अपने फायदे के लिए किसी को भी पशु बेच देते हैं, लोग उत्साह में आकर खरीद तो लेते हैं लेकिन जल्द मन भर जाने के बाद या देखभाल की जिम्मेदारी न निभा पाने के कारण जल्द ही उनका त्याग कर देते हैं जिससे सड़कों पर इनकी जनसंख्या बढ़ती है। किसी से ब्रीड करवाने या खरीदने की बजाय शहर के भीड़-भाड़ वाले पशु आश्रयों से गोद लेने को बढ़ावा दिया जाए।









