कोलकाता में बग्घी खींचते घोड़े के गिरने पर FIR दर्ज; PETA इंडिया ने घोड़े की जगह इलेक्ट्रिक गाड़ियां चलाने की अपील की
सोशल मीडिया पर एक बेहद परेशान करने वाला वीडियो सामने आने के बाद भवानीपुर थाने में एक FIR दर्ज की गई। वीडियो में दो घोड़ों में से एक, जो एक बग्घी से जुड़ा हुआ था, सड़क पर गिरा हुआ दिखाई दे रहा है। घोड़ा साफ तौर पर बहुत दुबला-पतला था और संभवतः लू लगने और पानी की कमी से जूझ रहा था। वीडियो में बग्घी चालक घोड़े को फिर से बग्घी खींचने के लिए चिल्लाते हुए नजर आ रहा है। वहीं दूसरा घोड़ा, जो अभी भी उसी बग्घी से जुड़ा हुआ था, असहाय खड़ा दिखाई देता है। यह वीडियो मूल रूप से 21 अप्रैल 2025 को एक फेसबुक उपयोगकर्ता द्वारा अपलोड किया गया था, जिसने कोलकाता की भीषण गर्मी के बीच घोड़ों की भलाई को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।
घोड़े की स्थिति अत्यधिक दुबली, गंभीर रूप से निर्जलित और स्पष्ट रूप से परेशान थी। एक अश्व चिकित्सा विशेषज्ञ ने इसकी पुष्टि की, जिन्होंने घोड़े की शारीरिक स्थिति का स्कोर 5 में से केवल 1.5 आंका और अत्यधिक तनाव व पीड़ा के लक्षणों को नोट किया। PETA इंडिया ने अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप कर घायल घोड़े को ढूंढ़ने, बचाने और पुनर्वासित करने तथा दोषियों के खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
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यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125 के तहत पशु के प्रति लापरवाही बरतने, जिससे मानव जीवन को संभावित खतरा उत्पन्न हो सकता था, तथा BNS की धारा 325 को धारा 62 के साथ पढ़ते हुए पशु को विकलांग करने और स्थायी क्षति पहुंचाने के प्रयास के तहत दर्ज की गई है। इसके साथ ही, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (PCA Act) की कई धाराओं का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें धारा 3 (पशुओं की देखभाल के कर्तव्य में विफलता), धारा 11(1)(a) (अत्यधिक कार्य कराना और अनावश्यक पीड़ा देना), धारा 11(1)(f) (अकारण पशु को बांधना) और धारा 11(1)(h) (पर्याप्त भोजन, पानी और आश्रय न देना) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, BNS की धारा 3(5) भी लागू की गई है, जो साझा उद्देश्य के तहत अपराध करने से संबंधित है।
PETA इंडिया ने कोलकाता पुलिस द्वारा FIR दर्ज किए जाने की सराहना की है, जो कि पीड़ित घोड़े के लिए न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, संगठन ने घोड़े के तत्काल किसी अभयारण्य में स्थानांतरण की मांग की है, जहां उसे त्वरित चिकित्सा सहायता मिल सके और आगे किसी प्रकार के आघात से बचाया जा सके।
2024 में, PETA इंडिया और CAPE फाउंडेशन द्वारा एकत्रित जानकारी के अनुसार, कोलकाता में कम से कम आठ घोड़ों की मृत्यु हो चुकी थी। विभिन्न जांचों में यह पाया गया कि दर्जनों घोड़े एनीमिक (रक्ताल्पता से ग्रस्त), कुपोषित, लगातार भूखे और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे कि टूटी हड्डियों से पीड़ित थे। कठोर सड़कों पर काम करने से उनके पैरों में अपूरणीय क्षति होती है, फिर भी उन्हें भारी बग्घियों को खींचने के लिए मजबूर किया जाता है। काम के समय के अलावा भी उनकी स्थिति दयनीय बनी रहती है, क्योंकि उन्हें बिना किसी आश्रय के अपने ही मल-मूत्र में खड़ा रहना पड़ता है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मैदान और अन्य स्थानों पर खराब स्वास्थ्य के कारण घोड़ों के गिरने की घटनाओं को गंभीरता से लिया था। अदालत ने यह भी गौर किया कि शहर में बिना लाइसेंस वाली बग्घी गाड़ियों का बड़े पैमाने पर प्रचलन है और बीमार तथा अयोग्य घोड़ों को मालिकों द्वारा त्यागने की घटनाएं आम हैं। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह घोड़ा मालिकों के पुनर्वास और उन्हें वैकल्पिक आजीविका प्रदान करने के लिए एक प्रस्ताव तैयार करे, ताकि “मुंबई की तरह घोड़ा-बग्घी सवारी को समाप्त करने” की संभावना पर विचार किया जा सके और इसकी व्यवहार्यता का परीक्षण किया जा सके।
कोलकाता में घोड़ा-बग्घी सवारी को समाप्त करने में मदद करें!
