‘मल्हार सर्टिफिकेशन’ विवाद के बीच PETA इंडिया के बिलबोर्ड पर बकरी का संदेश – ‘मैं एक जीव हूँ, माँस नहीं”!’
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20 March 2025
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पुणे: माँस हेतु ‘मल्हार सर्टिफिकेशन’ को लेकर हिन्दू कसाईन्यों के बीच छिड़ी बहस के बीच पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया ने पुणे में एक नया जागरूकता अभियान शुरू कर एक प्रभावशाली बिलबोर्ड लगाया गया है, जिसमें एक बकरी की तस्वीर के साथ लिखा है – “मैं एक जीव हूँ, माँस नहीं!” हमारे प्रति नजरिया बदलें, वीगन बनें।” यह अभियान लोगों से यह सोचने का आग्रह करता है कि चाहे हत्या किसी भी धर्म या तरीके से हो, पशु भी दर्द और डर महसूस करते हैं, और मरना नहीं चाहते। इसलिए सबको माँस का त्याग करके क्रूरता-मुक्त वीगन जीवनशैली अपननी चाहिए।
यह बिलबोर्ड फर्ग्यूसन कॉलेज, FC रोड, पैंटालून्स के पास, शिवाजीनगर, पुणे में लगवाया गया है।
PETA इंडिया की मैनेजर ऑफ वीगन एंड कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट्स, डॉ. किरण आहूजा कहती हैं, “कोई भी पशु अपनी जान गंवाना नहीं चाहता, चाहे तरीका झटका हो, हलाल हो या कुछ और। सभी जीव दर्द और डर महसूस करते हैं, उनकी अपनी अलग पहचान होती है और वे अपने जीवन को उतना ही महत्व देते हैं जितना हम। अहिंसा हिंदू धर्म का एक मूल मंत्र है, और इसका सबसे अच्छा पालन तभी हो सकता है जब हम वीगन भोजन अपनाएं जो पशुओं की जान बचाता है”
आज के मांस, अंडा और डेयरी उद्योगों में करोड़ों पशुओं को गंदे पशुपालन केंद्रों पर क्रूर परिस्थितियों में पाला जाता है। बकरियों और मुर्गियों का गला पूरी तरह होश में रहते हुए काट दिया जाता है, गायों और भैंसों को उनके बछड़ों से अलग कर दिया जाता है, सूअरों को दिल में छुरा घोंपकर मारा जाता है, और मछलियों को जिंदा ही तड़पा-तड़पा कर उनका पेट चीरा जाता है। नर चूजे आगे चलकर अंडे नहीं दे सकते इसलिए पॉल्ट्री फार्म पर उन्हें बेकार मानकर दर्दनाक मौत दी जाती है, उन्हें अक्सर जला दिया जाता है, पानी में डुबोकर मारा जाता है, कुचल दिया जाता है, जिंदा ही मछलियों को खिला दिया जाता है या अन्य क्रूर तरीकों से मार दिया जाता है। इसी तरह, डेयरी फार्मस पर जो नर बछड़े जन्म लेते हैं वह आगे चलकर दूध नहीं देंगे इसलिए उन्हें जन्म के तुरंत बाद उनकी मांओं से अलग कर दिया जाता है और उन्हें भूखा रखा जाता है, सड़कों पर छोड़ दिया जाता है या फिर मांस और चमड़े के लिए मरने हेतु बूचड़खानों में भेज दिया जाता है। बूचड़खानों तक ले जाने के लिए उन्हें ऐसे ठूस-ठूस कर गाड़ियों में भरा जाता है कि परिवहन के दौरान कई पशु दम घुटने से मर जाते हैं, और जो बचते हैं, उन्हें कसाई बूचड़खानों में एक-दूसरे के सामने ही बेरहमी से काट देते हैं।
PETA इंडिया इंगित करता है कि बकरियां न केवल बुद्धिमान होती हैं, बल्कि बेहद चंचल और जिज्ञासु भी होती हैं। वे अपने समूह के साथ गहरे रिश्ते बनाती हैं, चीजों को समझने और सुलझाने में माहिर होती हैं, यहां तक कि दरवाजे तक खोल सकती हैं। उनकी याददाश्त भी कमाल की होती है, जिससे वे लोगों और जगहों को लंबे समय तक याद रख सकती हैं।
PETA इंडिया जो इस धारणा में विश्वास रखता है कि “ पशु हमारा भोजन बनने के लिए नहीं है”, प्रजातिवाद का विरोध करता है क्योंकि यह एक ऐसी विचारधारा है जिसमें मनुष्य इस संसार में स्वयं को सर्वोपरि मानकर अपनी अलग अलग जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों का शोषण करना अपना अधिकार समझता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाईट PETAIndia.com पर जाएँ और X, Facebook, व Instagram पर हमें फॉलो करें।
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