वर्धा: एनवायरनमेंटल रेस्क्यू कमेटी और PETA इंडिया की शिकायत के बाद बकरे का सिर काटने के मामले में FIR दर्ज

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02 मई 2026

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अनुष्का यादव; [email protected] 

वर्धा – वर्धा जिले में एक बकरे का सिर काटकर बलि दिए जाने की जानकारी मिलने के बाद, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) ने स्थानीय कार्यकर्ता गौरव ठाकुर, संस्थापक, एनवायरनमेंटल रेस्क्यू कमेटी, के साथ मिलकर प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई। यह बलि सार्वजनिक रूप से दी गई थी और इसका वीडियो भी सामने आया। वीडियो में दिखता है कि एक व्यक्ति डरे सहमे बकरे के पिछले पैरों को पकड़े हुए है, जबकि दूसरा व्यक्ति उसका सिर काट देता है।

तलेगांव पुलिस स्टेशन ने दो आरोपियों बाबनसिंह संतोषसिंह बावरी और जोनुसिंह गोतांसिंह बावरी—के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 और 3(5) तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 3, 11(1)(a) और 11(1)(l) के तहत FIR दर्ज की है।

BNS, 2023 की धारा 325 के तहत किसी भी पशु को घायल करना या मारना संज्ञेय अपराध है, जिसके लिए पांच साल तक की सजा, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है। वहीं PCA अधिनियम, 1960 की धारा 11 “क्रूरता” को परिभाषित करती है और किसी भी पशु को अनावश्यक दर्द या पीड़ा पहुंचाना दंडनीय अपराध बनाती है।

“PETA इंडिया वर्धा पुलिस की सराहना करता है कि उन्होंने तुरंत FIR दर्ज कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पशुओं के साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी,” PETA इंडिया की एसोसिएट मैनेजर, क्रूरता प्रतिक्रिया, सलोनी सकारिया कहती हैं- “पशु बलि न केवल क्रूरता है बल्कि समाज के लिए भी खतरा है। यह हमें हिंसा के प्रति असंवेदनशील बनाती है और पुरानी मान्यताओं को मजबूत करती है जो प्रगति में बाधा हैं। जिस तरह मानव बलि को अब हत्या माना जाता है, उसी तरह आज जब भारत अंतरिक्ष मिशनों की ओर बढ़ रहा है, पशु बलि जैसी पुरानी प्रथा का अंत होना आवश्यक है। यह समाज के विकास के लिए जरूरी है।”

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जानवरों का वध केवल लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में ही किया जा सकता है और स्थानीय निकायों को इसका पालन सुनिश्चित करना होगा। पशु क्रूरता निवारण (स्लॉटर हाउस) नियम, 2001 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लाइसेंसिंग और पंजीकरण) विनियम, 2011 के अनुसार, भोजन के लिए जानवरों का वध केवल ऐसे लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में ही अनुमति है, जहां प्रजाति-विशेष के अनुरूप स्टनिंग उपकरण उपलब्ध हों।

PETA इंडिया जो इस सिद्धांत के तहत काम कर्ता है कि “पशु किसी भी प्रकार से हमारे शोषण के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद, यानी मानव-श्रेष्ठता की सोच, का विरोध करता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाईट PETAIndia.com पर जाएं या XFacebook, और Instagram पर हमें फॉलो करें।

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