शिवसेना विधायक द्वारा भीड़ के साथ मिलकर बेहोश किए गए तेंदुए को पीटने पर विवाद, पशु समूहों ने कार्रवाई की मांग की
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23 April 2026
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मुंबई- पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया), कम्पैशन अनलिमिटेड प्लस एक्शन (CUPA), वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (WRRC), और फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन्स (FIAPO) ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष (मुख्य नेता) श्री एकनाथ गंगूबाई संभाजी शिंदे को पत्र लिखकर शिवसेना विधायक श्री चंद्रकांत निम्बा पाटिल के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है, क्योंकि रिपोर्टों और व्यापक रूप से प्रसारित वीडियो फुटेज में उन्हें और अन्य लोगों को जलगांव के मुक्ताईनगर में वन विभाग के एक आधिकारिक अभियान के दौरान दो साल की मादा तेंदुए को पीटते हुए दिखाया गया है। जलगांव के उप वन संरक्षक (क्षेत्रीय) श्री राम धोत्रे आईएफएस को अलग से दिए गए पत्र में, इस गठबंधन ने वन अधिकारियों से अनुरोध किया है कि वे तुरंत एक प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट (पीओआर) दर्ज करें और फुटेज तथा जांच के माध्यम से पहचाने गए सभी आरोपियों के खिलाफ शीघ्र आपराधिक कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय करें।
मीडिया रिपोर्ट और प्रसारित वीडियो के अनुसार, तेंदुआ एक सरकारी गेस्टहाउस के पास देखा गया था और उसे हटाने की कार्रवाई के दौरान ट्रैंक्विलाइज़र (बेहोशी का इंजेक्शन) दिया गया। जैसे ही दवा का असर हुआ, दर्शकों, जिनमें विधायक पाटिल भी शामिल थे, ने कथित तौर पर मामला अपने हाथ में ले लिया और अधिकारियों द्वारा अंततः उसे सुरक्षित करने से पहले अव्यवस्थित स्थिति में लाठियों से तेंदुए का पीछा करना और उसे मारना शुरू कर दिया।
PETA इंडिया ने कहा- “एक दर सहमा जंगली पशु जो घायल या बेहोश है, वह कोई पंचिग बैग (जोर आजमाने की वस्तु) नहीं है, और बचाव अभियान कोई तमाशा नहीं है। यदि कोई, खासकर एक निर्वाचित प्रतिनिधि भीड़ के साथ मिलकर एक संरक्षित प्रजाति पर हमला करता है और अधिकारियों को उनका काम करने से रोकता है, तो अधिकारियों को इस मामले पर सख्ती और तेजी से प्रतिक्रिया देनी चाहिए।”
पशु अधिकार संगठनों ने अनुरोध किया है कि अधिकारी ‘वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972’ के तहत कार्रवाई करें, जो संरक्षित जंगली पशुओं के शिकार पर रोक लगाता है और “शिकार” की परिभाषा में पकड़ने से जुड़े कार्य और प्रयास भी शामिल करता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अनुसूची 1 के पशुओं से जुड़े अपराधों पर इस अधिनियम के तहत अधिक कड़ी सजा का प्रावधान है।
पशु अधिकार संगठनों के गठबंधन ने यह भी आग्रह किया है कि जहां तथ्य समर्थन करते हों, वहां अन्य कानूनों के लागू प्रावधान भी लगाए जाएं, जिनमें क्रूरता और सार्वजनिक सेवकों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
समूहों ने महाराष्ट्र वन विभाग से यह भी मांग की है कि वह समयबद्ध जांच करे कि अभियान के दौरान भीड़ को तेंदुए के इतने पास आने की अनुमति कैसे दी गई और भविष्य में ऐसे बचाव अभियानों को भीड़ के हस्तक्षेप से प्रभावित होने से रोकने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए।
इस मांग पर निम्नलिखित पशु संगठनों ने हस्ताक्षर किए हैं :
- पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया)
- कम्पैशन अनलिमिटेड प्लस एक्शन (CUPA)
- वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर
- फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन्स
PETA इंडिया इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु किसी भी तरह से हमारे दुरुपयोग के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद का विरोध करता है, जो मनुष्य के स्वयं को श्रेष्ठ मानने वाली सोच है। अधिक जानकारी के लिए, कृपया PETAIndia.com पर जाएँ तथा हमें X, Facebook, एवं Instagram पर समूह को फॉलो करें।
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