‘कबूतर भी हमारे साथी हैं’: BNHS और JSW फाउंडेशन की डॉक्यूमेंट्री के रिलीज के बाद PETA इंडिया ने पक्षियों का बचाव किया
For Immediate Release:
19 March 2025
संपर्क:
Hiraj Laljani 9619167382; [email protected]
Sanskriti Bansore 9167967382; [email protected]
मुंबई – ‘बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी’ एवं JSW फाउंडेशन की भ्रामक डॉक्यूमेंट्री के रिलीज़ होने के बाद, जिसमें कबूतरों को मानव स्वास्थ्य के लिए ख़तरा बताते हुए गलत तरीके से बदनाम किया गया है, पीपल फ़ॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ़ एनिमल्स (PETA) इंडिया ने दादर के कबूतरखाना में एक बिलबोर्ड लगवाकर जनता से अपील करी है कि हमारे घर पर रहने वाले साथी कुत्तों की तरह कबूतर भी हमारे दोस्त होते हैं और वह भी इनकी तरह संवेदनशीलता एवं प्यार के हकदार हैं। केवल प्रजातिवादी सोच रखने वाला कोई व्यक्ति ही इनके साथ बुरा या अलग व्यवहार कर सकता है, जिसकेअनुसार, मनुष्य अन्य पशुओं से श्रेष्ठ हैं।
PETA इंडिया ने बताया कि कॉमन रॉक प्रजाति के कबूतर भारत के मूल निवासी हैं, जबकि कबूतर की कई अन्य प्रजातियों को यूरोपीयन लोगों द्वारा खाने और ‘मस्ती’ के लिए शिकार करने के लिए लाया गया था। अध्ययनों और साहित्य की समीक्षा से पता चलता है कि इनसे मनुष्यों में बीमारियाँ फैलने का जोखिम बेहद कम होता है यहाँ तक कि उन लोगों में भी जो अक्सर इन कबूतरों के निकट रहते हैं। आमतौर पर कबूतर बर्ड फ्लू के प्रति प्रतिरोधी भी होते हैं – जो अभी पूरे भारत में फैल रहा है और पहले भी दुनिया के अन्य हिस्सों में मनुष्यों को संक्रमित कर चुका है और उनकी मौत का कारण बन चुका है। कबूतरों द्वारा इस गंभीर बीमारी के फैलाने का खतरा बहुत कम है। इसके विपरीत, गंदे फार्म हाउस में पाले जाने वाले मुर्गी और गाय जैसे अन्य पशुओं में बर्ड फ्लू जैसे खतरनाक जूनोटिक रोगों को फैलाने की संभावना अधिक होती है।
PETA इंडिया की डायरेक्टर ऑफ वेटरनरी सर्विसेज डॉ. मिनी अरविंदन कहती हैं, “मुंबई शहर में उड़ने वाले कबूतर भी मुंबईकर हैं और वे भी हमारे पड़ोसियों की तरह दया और सम्मान के हकदार हैं। कबूतरों से इंसानों में कोई बीमारी नहीं फैलती, लेकिन इंसान हर रोज़ एक-दूसरे को बीमारियाँ फैलाते हैं। जिनको यह लगता है कि उनको पक्षियों से कोई बीमारी लग जाएगी, PETA इंडिया उन सभी लोगों से यह दयालु अनुरोध करता है कि कृपया वीगन जीवनशैली अपनाएं और उन गंदे पोल्ट्री फार्मों को बंद करने में मदद करें जो वास्तव में लोगों को बीमार बनाते हैं।”
कबूतर बहुत बुद्धिमान होते हैं – वे अलग-अलग कलाकारों की कलाकृतियों में अंतर कर सकते हैं, 50 से ज़्यादा शब्दों को पढ़ना सीख सकते हैं, प्राइमेट्स की तरह ही नंबर गिनकर सकते हैं और यादाश्त के बहुत से मामलों में तो वो इंसानों से आगे निकल सकते हैं। ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में इंसानों द्वारा डिज़ाइन की गई सड़कों के ऊपर कबूतरों की उड़ान के पैटर्न पर 10 साल तक किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि पक्षी अपने आंतरिक चुंबकीय कम्पास की तुलना में इंसानों द्वारा बनाए गए परिवहन मार्गों के ऊपर ज़्यादा भरोसा करते हैं। एक वैज्ञानिक ने टिप्पणी करी कि, “हमने कुछ ऐसे कबूतरों का पीछा किया जो ऑक्सफ़ोर्ड बाईपास पर उड़ते थे और कुछ खास जंक्शनों पर मुड़ भी जाते थे। यह बिल्कुल इंसानों जैसा है।”
PETA इंडिया का बिलबोर्ड मुंबई स्थित दादर के कबूतर खाना में कबूतरखाना बस स्टॉप पर लगाया गया है।
PETA इंडिया इस सिद्धांत में विश्वास रखता है कि “पशु किसी भी तरह से हमारा दुर्व्यवहार करने के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद का विरोध करता है। प्रजातिवाद एक ऐसी धारणा है जिसके तहत इंसान स्वयं को इस संसार में सर्वोपरि मानकर, अपनी जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों का इस्तेमाल एवं शोषण करता है। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट PETAIndia.com पर जाएँ और हमें X, Facebook, Facebook हिन्दी, तथा Instagram पर फॉलो करें।
#