विश्व टोफू दिवस से पहले अमृतसर में PETA इंडिया का शुभंकर ‘तेजस टोफू’ देगा मुफ्त टोफू टिक्का
For Immediate Release:
23 July 2026
Contact:
Apeksha Tamane; [email protected]
Sanskriti Bansore; [email protected]
अमृतसर – विश्व टोफू दिवस (26 जुलाई) से पहले, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) का “तेजस टोफू” शुभंकर, जिस पर “पनीर की जगह टोफू अपनाइए! कृपया वीगन बनिए” और “मुफ्त टोफू टिक्का” लिखा होगा, वीआर अंबरसर मॉल के बाहर वह और PETA इंडिया के अन्य समर्थक मिलकर स्वादिष्ट और प्रोटीन से भरपूर टोफू टिक्का वितरित करेंगे। यह कार्यक्रम भारत में बढ़ती वीगन आबादी के समर्थन में आयोजित किया जा रहा है, जो पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों के उत्पादन के लिए बछड़ों को उनकी माताओं से अलग करने वाली पश्चिमी शैली की फैक्ट्री जैसी डेयरी फार्म व्यवस्था का समर्थन नहीं करता।
कब : शुक्रवार, 24 जुलाई 2026, दोपहर 12 बजे (समय का विशेष ध्यान रखें)
कहाँ : वीआर अंबरसर मॉल के बाहर, प्लॉट नंबर C, सर्कुलर रोड, निरंकारी कॉलोनी, अमृतसर, पंजाब – 143001
PETA इंडिया की कैम्पेन कॉर्डिनेटर अपेक्षा तामणे कहती हैं- “भारत का डेयरी उद्योग अब पश्चिमी शैली की फैक्ट्री जैसी डेयरी फार्म व्यवस्था जैसा रूप धरण कर रहा है, जहां गायों और भैंसों को उनके बछड़ों से अलग कर दिया जाता है और उन्हें अपने ही मल-मूत्र के बीच खूँटों से बांधकर रखा जाता है। नर बछड़ों से दूध नहीं मिलता, इसलिए उन्हें अक्सर भूखा छोड़ दिया जाता है, बेसहारा छोड़ दिया जाता है या वध के लिए भेज दिया जाता है। वहीं, मादा बछड़ों को कृत्रिम दूध पिलाया जाता है, जबकि उनके पोषण के लिए बना दूध इंसान ले लेते हैं। PETA इंडिया उन सभी लोगों से अपील करता है जो गायों, भैंसों और उनके बछड़ों की परवाह करते हैं कि वे पनीर की जगह टोफू अपनाएं। इससे उन्हें स्वादिष्ट और प्रोटीन से भरपूर भोजन मिलेगा, जो पशुओं के प्रति दयालु, पर्यावरण के लिए बेहतर और हमारे स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है।”
गाय और भैंस अपने बछड़ों से गहरा लगाव रखने वाली स्नेही माताएं होती हैं। लेकिन आधुनिक पश्चिमी शैली के डेयरी उद्योग में कर्मचारियों द्वारा उन्हें जबरन गर्भवती किया जाता है। इसके लिए वे अपने हाथ पशु के मलाशय में डालते हैं और धातु की रॉड के माध्यम से सांड का वीर्य उनकी योनि में पहुंचाते हैं। इस उद्योग में गायों और भैंसों का इस्तेमाल केवल दूध देने वाली मशीन की तरह किया जाता है। जब उनका शरीर कमजोर हो जाता है, तो उन्हें अक्सर सड़कों पर छोड़ दिया जाता है या वध के लिए भेज दिया जाता है। भारत में डेयरी उद्योग ही गोवंश को बीफ और चमड़ा उद्योग तक पहुंचाने का सबसे बड़ा स्रोत है।
टोफू आमतौर पर पनीर की तुलना में सस्ता होता है। इसमें पनीर की अपेक्षा कम कैलोरी और कम वसा होती है, इसमें कोलेस्ट्रॉल नहीं होता और यह प्रोटीन, आयरन तथा कैल्शियम (विशेष रूप से कैल्शियम से तैयार किया गया टोफू) का अच्छा स्रोत है। यह पूरी तरह वीगन है और लैक्टोज इंटोलरेंस (दूध पचाने में दिक्कत) से पीड़ित लोगों के लिए भी सुरक्षित है। भारत के अधिकांश लोग लैक्टोज इंटोलरेंट हैं।
भारत अपने खान-पान की परंपराओं के लिए दुनिया भर में सम्मानित है। स्टैटिस्टा कंज्यूमर इनसाइट्स के एक सर्वेक्षण के अनुसार, मांस-मुक्त भोजन अपनाने के मामले में भारत दुनिया में सबसे आगे है। देश के 9% लोग अब स्वयं को वीगन (पूरी तरह पौधों पर आधारित आहार अपनाने वाला) बताते हैं। माना जाता है कि सबसे पहले वीगन जीवनशैली अपनाने वाले लोग भारत के ही एक क्षेत्र से थे। बताया जाता है कि हिमालय के एक समुदाय ने लगभग 5,000 वर्ष पहले ही वीगन जीवनशैली अपना ली थी।
हर वीगन व्यक्ति हर वर्ष लगभग 200 पशुओं की जान बचाने में मदद करता है। इसके अलावा, वीगन भोजन अपनाने से हृदय रोग, मधुमेह और कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा भी कम होता है। भोजन के लिए पशुपालन जल प्रदूषण और भूमि के अत्यधिक उपयोग का एक प्रमुख कारण है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु संकट के सबसे गंभीर प्रभावों से निपटने के लिए दुनिया को पौधों पर आधारित वीगन भोजन की ओर बढ़ना होगा। जो लोग वीगन जीवनशैली अपनाना चाहते हैं, उनके लिए PETA इंडिया मुफ्त वीगन स्टार्टर किट उपलब्ध कराता है।
PETA इंडिया जो इस सिद्धांत के थाहा काम करता है कि “पशु हमाराय भोजन बनने के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद (स्पीशीज़िज़्म) का विरोध करता है। प्रजातिवाद वह सोच है, जिसमें मनुष्य स्वयं को अन्य सभी पशुओं से श्रेष्ठ मानता है। अधिक जानकारी के लिए PETAIndia.com पर जाएं या X, Facebook और Instagram पर PETA इंडिया को फॉलो करें।
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