भारत में पहली बार पशु प्रयोगशाला के खिलाफ FIR दर्ज – PETA इंडिया की शिकायत के बाद तेलंगाना की पालामूर बायोसाइंसेज़ पर ऐतिहासिक कार्यवाही

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18 June 2025

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Dr Anjana Aggarwal; [email protected]  

Sanskriti Bansore; [email protected]  

दिल्ली – कुत्तों को गंभीर रूप से घायल करने और नन्हे सूअरों को इतनी क्रूरता से ज़हर दिए जाने कि उनके शरीर से खून बहने लगा जैसी घटनाएं सामने आने के बाद, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया  ने तेलंगाना स्थित पालामूर बायोसाइंसेज प्राइवेट लिमिटेड  के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। यह कार्रवाई उस अंदरूनी जानकारी पर आधारित है, जिसमें इस पशु प्रयोगशाला में हो रहे गंभीर अत्याचारों और कथित आपराधिक कृत्यों का पर्दाफाश हुआ। भारत में यह पहली बार है कि किसी पशु परीक्षण प्रयोगशाला के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। यह कदम पशुओं पर हो रहे छिपे अत्याचारों को कानून के कटघरे में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

यह FIR महबूबनगर स्थित बूथपुर पुलिस थाना द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 173(1) के तहत दर्ज की गई है। यह कार्रवाई भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धाराओं 34, 269, 289, 337 और 429 के स्पष्ट उल्लंघन को देखते हुए की गई, जो कंपनी की निगरानी में रखे गए पशुओं को मारने, उन्हें अपंग करने, और इस हद तक नुकसान पहुँचाने से संबंधित है कि वे जीवनभर के लिए असहाय और अनुपयोगी हो गए। FIR में यह भी उल्लेख है कि इन पशुओं की हत्या भारतीय जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड द्वारा 25.11.2013 को अधिसूचित मानकों और प्रोटोकॉल के विरुद्ध की गई। इसके अतिरिक्त, पशुजन्य रोगों की रोकथाम हेतु पर्याप्त प्रक्रियाएं न अपनाने के कारण मानव जीवन के लिए संभावित खतरा उत्पन्न करने जैसी लापरवाही भी स्पष्ट उल्लंघनों में शामिल है।

इसके अलावा, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (WPA) की धाराएँ 9, 39 और 51 भी इस मामले में लागू की गई हैं, क्योंकि रिसस बंदर को वन्यजीव संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 के लागू होने से पहले (यानी 1 अप्रैल 2023 से पूर्व) तक अनुसूची II, भाग I में संरक्षित प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। कंपनी द्वारा वर्ष 2021–2022 में भारतीय प्रजाति के बंदरों को जंगलों से पकड़ने की जो घटनाएं सामने आई हैं, वे “शिकार” की श्रेणी में आती हैं, जिसमें “पकड़ना” भी शामिल है। यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत एक दंडनीय अपराध है।

इस खुलासे के बाद, केंद्र सरकार की संस्था ‘प्रयोगों में पशुओं के नियंत्रण और पर्यवेक्षण हेतु समिति (CCSEA)’ ने प्रयोगशाला की जाँच के लिए एक आपातकालीन समिति का गठन किया। हालांकि, इस समिति की निरीक्षण रिपोर्ट अभी तक जारी नहीं हुई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइज़ेशन्स (FIAPO), जो पूरे भारत में 200 से अधिक पशु संरक्षण संगठनों का एक महासंघ है, ने भी CCSEA के अध्यक्ष को एक शिकायत भेजकर पालमुर बायोसाइंसेज़ की स्थायी बंदी और उसके लाइसेंस रद्द किए जाने का अनुरोध किया है।

FIR की एक प्रति यहां उपलब्ध है, और PETA इंडिया की प्रत्यक्षदर्शी जांच से प्राप्त फ़ोटो व वीडियो फुटेज यहां देखे जा सकते हैं।

PETA इंडिया की साइंटिस्ट एंड रिसर्च पॉलिसी एडवाइज़र डॉ. अंजना अग्रवाल ने कहा, “PETA इंडिया द्वारा इस प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट प्रयोगशाला का किया गया यह खुलासा अपने आप में देश का पहला ऐसा मामला है, जिसने उन प्रयोगशालाओं के अंदर हो रही बर्बरता का पर्दाफाश किया है जहां कुत्तों, रिसस मकाक बंदरों और अन्य पशुओं को दर्दनाक प्रयोगों से गुज़रना पड़ता है, वे वर्षों तक कष्ट झेलते हैं, और जहाँ वैज्ञानिक विश्वसनीयता दम तोड़ देती है। अब बूथपुर पुलिस थाना, महबूबनगर द्वारा दर्ज की गई यह FIR भी देश में किसी पशु प्रयोगशाला के विरुद्ध दर्ज की गई पहली ऐतिहासिक कार्यवाही है। हम बूथपुर पुलिस और विशेष रूप से स्टेशन हाउस ऑफिसर श्री चंद्रशेखर का आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि प्रयोगशालाओं के बंद दरवाज़ों के पीछे छिपी पशुओं के प्रति क्रूरता को भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम सरकारी नियामकों से अपील करते हैं कि पालामूर   बायोसाइंसेज़ में बंदी बनाकर रखे गए पशुओं की पीड़ा को तत्काल समाप्त करें। इस प्रयोगशाला को स्थायी रूप से बंद करने के अतिरिक्त कोई भी कदम, पशु अत्याचार को खुली छूट देने जैसा होगा।“

PETA इंडिया से संपर्क करने वाले अंदरूनी जानकार के अनुसार, तेलंगाना की इस प्रयोगशाला में कुत्तों की बीगल जैसी प्रजातियों के साथ-साथ अन्य पशुओं को ज़हर देना एक सामान्य प्रक्रिया बन चुका है। यहां पशुओं को या तो अत्यधिक भीड़भाड़ वाले पिंजरों में ठूँसकर रखा गया या फिर उन्हें सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया — जिससे वे शारीरिक और मानसिक पीड़ा से ग्रस्त हो गए। इन अमानवीय परिस्थितियों में कई पशु गंभीर चोटों और संक्रमणों का शिकार हुए, और जब उन्हें ‘अनुपयोगी’ समझा गया, तो उन्हें तड़पाकर मौत के घाट उतार दिया गया।

जानकार ने इस प्रयोगशाला में चल रही दरिंदगी के बारे में यह खुलासे किए हैं-

  • पालामूर बायोसाइंसेज़ में बीगल प्रजाति के कुत्तों को अत्यधिक भीड़भाड़ वाले हालात में रखा गया, जहाँ लगभग 1,500 कुत्तों को एक ऐसी जगह में बंद कर दिया गया था जिसे अधिकतम 800 कुत्तों के लिए बनाया गया था। दो कुत्तों के लिए बने पिंजरों में तीन से चार कुत्तों को जबरन ठूंस दिया गया, जिससे चारों ओर घुटन, तनाव, मानसिक अशान्ति और भोजन के लिए संघर्ष जैसे हालात बनें । इन झगड़ों में कई पशु गंभीर रूप से घायल हो गए, विशेषकर उनके कान बुरी तरह फट गए। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि इतने ज़ख्मों के बावजूद, कंपनी ने घावों की सफाई और दर्द से राहत जैसी बुनियादी देखभाल तक नहीं दी।

 

  • देखभाल के नाम पर की गई क्रूरता दिल दहला देने वाली थी। कर्मचारियों को पशुओं को लात मारते, पिंजरों के दरवाज़े उनके पैरों पर फसा देने और उन्हें बेरहमी से झटके देते हुए देखा गया। एक मुखबिर ने बताया कि ऐसे बर्ताव के कारण कई कुत्तों की हड्डियाँ तक टूट गईं।

 

  • यह सामने आया है कि पालामूर द्वारा किए गए कुछ प्रयोगों में बीगल प्रजाति के कुत्तों को परीक्षण रसायनों को त्वचा के नीचे (सबक्यूटेनियस रूप से) इंजेक्ट किया गया। इन इंजेक्शनों के कारण – चाहे वे स्वयं हानिकारक यौगिक रहे हों या उनके मिश्रण में अशुद्धियाँ रही हों – कई बार इंजेक्शन वाली जगहों पर संक्रमण हो गया। ये संक्रमण फैल सकते थे, जिससे त्वचा सड़ने लगती थी और नीचे के ऊतक क्षतिग्रस्त हो जाते थे, जिससे पशु दर्दनाक, खुले घावों से जूझते थे। इस बारे में एक जानकार ने कहा, “फोड़े की स्थिति पर निर्भर करता है कि पशु को कितनी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, अगर फोड़ा कंधे पर हो, तो वह उसकी चलने-फिरने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। वे तीव्र दर्द में रहते हैं, भूख खो बैठते हैं और उनका वज़न गिरने लगता है।” वहीं एक अन्य जानकार ने कहा कि ऐसे हालात में पशु “नरक जैसी पीड़ा” झेलते हैं।

 

  • कुछ परीक्षणों के कारण कुत्ते इतने बीमार हो गए कि उनके मुंह और आंतों में खून रिसने वाले अल्सर बन गए। उपलब्ध तस्वीरों और वीडियो में देखा गया कि कई पशु चारों तरफ खून के बीच असहाय पड़े थे।

 

  • यह कंपनी पशुओं को मारने के लिए थायोपेन्टोन नामक दवा का इस्तेमाल करती है, लेकिन उन्हें पहले बेहोश नहीं किया जाता। यह प्रक्रिया उन्हें जिंदा अवस्था में दर्द और पीड़ा के साथ मरने के लिए छोड़ देती है – एक ऐसी मौत जो पूरी तरह असंवेदनशील और अमानवीय है।

 

  • पालामूर ने डेनमार्क से गोटिंजेन प्रजाति के मिनीपिग्स मंगवाए, लेकिन उनके प्रजनन के लिए ज़रूरी लाइसेंस नहीं लिया। जब एक मादा पशु गर्भवती हो गई और उसने आठ से दस बच्चों को जन्म दिया, तो प्रमुख पशुचिकित्सक ने उन नवजातों को मारने का आदेश दिया। इन मासूम पशुओं को दिल में सुई घोंपकर तड़पाते हुए मार दिया गया।

 

  • पालामूर की नीतियों में जहाँ सूअरों को खेलने और मानसिक गतिविधियों का अवसर देने की बात कही गई थी, वहीं असलियत में उन्हें केवल ग्राहक दौरे के समय ही पिंजरों से बाहर निकाला जाता था। बाकी समय ये पशु तंग पिंजरों में बंद रहते और सिर्फ प्रयोगों के लिए ही बाहर लाए जाते।

 

  • कंपनी ने राजस्थान के एक सप्लायर्स से रीसस मकाक (भारतीय प्रजाति के बंदर) मंगवाए। इनमें से कुछ बंदरों में मंकीपॉक्स जैसे ज़ूनोटिक (मानवों में फैलने योग्य) संक्रमण पाए गए, लेकिन कंपनी ने यह गंभीर जोखिम छिपा लिया। इन संक्रमित पशुओं को चुपचाप मार दिया गया, जबकि बाकी बंदरों को प्रयोगों में इस्तेमाल किया गया, जिससे कर्मचारियों और समुदाय को जानलेवा संक्रमण का खतरा बना रहा।

PETA इंडिया ने पशु परीक्षण के नियंत्रण और पर्यवेक्षण के लिए गठित समिति (CCSEA), केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO), राष्ट्रीय जीएलपी अनुपालन निगरानी प्राधिकरण (NGCMA) सहित अन्य संबंधित नियामक संस्थाओं को औपचारिक शिकायतें प्रस्तुत की हैं। संगठन ने इन प्राधिकरणों से मांग की है कि संबंधित कंपनी का पशुओं पर परीक्षण के लिए दिया गया पंजीकरण तुरंत रद्द किया जाए, लागू नियमों के तहत कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और प्रयोगों से बचाए गए पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखकर उनका पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।

PETA इंडिया इस सिद्धांत में विश्वास रखता है कि “पशु मनुष्यों द्वारा परीक्षण करने के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद का विरोध करता है। प्रजातिवाद एक ऐसी धारणा है जिसके तहत इंसान स्वयं को इस संसार में सर्वोपरि मानकर, अपनी जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों का इस्तेमाल एवं शोषण करता है। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट PETAIndia.com पर जाएँ और  हमें  XFacebookFacebook हिन्दी, तथा Instagram पर फॉलो करें।

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