पृथ्वी दिवस से पहले ‘डायनासोर’ भोपाल निवासियों से कहेंगे: ‘वीगन बनो या विलुप्त हो जाओ!’
For Immediate Release:
21 April 2026
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अपेक्षा तामने 9820787382; [email protected]
संस्कृति बंसोरे 9167937382; [email protected]
भोपाल: पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) से पहले, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) और एनिमल्स विद ह्यूमैनिटी (AWH) के समर्थक डायनासोर के भेष में और हाथों में संदेश लिखे बोर्ड पकड़ें जिन पर लिखा होगा, “यह 2026 है: सोच को विकसित करें! वीगन बनो!” और “मांस खाना पुरातन सोच है: वीगन बनें” भोपाल के लोगों से अपील करेंगे कि वे वीगन भोजन अपनाकर जलवायु संकट से निपटने में मदद करें।
कब : मंगलवार, 21 अप्रैल, दोपहर 12 बजे ठीक
कहाँ : बोट क्लब, श्यामला हिल्स, भोपाल 462001
PETA इंडिया की कैंपेन समन्वयक अपेक्षा तामने कहती हैं- “भोजन के लिए पशुओं को पालना पर्यावरण की हानि का एक प्रमुख कारण है, क्योंकि इसमें बहुत अधिक भूमि, ऊर्जा और पानी की आवश्यकता होती है और साथ ही बड़ी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है। PETA इंडिया लोगों से अपील करता है कि वे वीगन भोजन चुनकर जलवायु संकट के सबसे बुरे प्रभावों को कम करने में मदद करें।”
मांस, अंडे और डेयरी उत्पादन प्रदूषण, समुद्री मृत क्षेत्रों, भूमि उपयोग के कारण आवास का विनाश और प्रजातियों के विलुप्त होने के प्रमुख कारण हैं। यह दुनिया के एक-तिहाई ताजे पानी के संसाधनों का उपयोग करता है और कुछ अनुमानों के अनुसार, यह दुनिया की सभी परिवहन प्रणालियों के संयुक्त उत्सर्जन से भी अधिक ग्रीनहाउस गैसों का उत्पादन करता है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि हर व्यक्ति जो वीगन बनता है, वह अपने भोजन से जुड़े कार्बन फुटप्रिंट को 73% तक कम कर सकता है, जिससे यह पृथ्वी पर अपने नकारात्मक प्रभाव को कम करने का शायद सबसे बड़ा तरीका बन जाता है।
वीगन भोजन पशुओं की भी मदद करता है। जैसा कि PETA इंडिया ने अपने वीडियो खुलासे “ग्लास वॉल्स” में दिखाया है, अंडों के लिए उपयोग की जाने वाली मुर्गियों को इतने छोटे पिंजरों में बंद किया जाता है कि वे अपने पंख भी नहीं फैला पातीं। गायों और भैंसों को वाहनों में इतनी अधिक संख्या में ठूंसा जाता है कि उन्हें बूचड़खाने ले जाने से पहले ही उनकी हड्डियाँ टूट जाती हैं, और सूअरों को दिल में चाकू घोंपा जाता है जबकि वे चीखते रहते हैं। मछलियों को पानी से बाहर निकाल कर मछली पकड़ने वाली नौकाओं के डेक पर मछलियाँ दम घुटने के लिए छोड़ दिया जाता है या उन्हें जीवित ही काट दिया जाता है। अंडा उद्योग में नवजात नर चूजों को पीसकर, जलाकर, या जिंदा दफना कर मार दिया जाता है क्योंकि वे आगे चलकर अंडे नहीं दे पाएंगे जबकि डेयरी उद्योग में नर बछड़ों का त्याग कर दिया जाता, भूखा मरने के लिए छोड़ दिया जाता है या मार दिया जाता है क्योंकि वे आगे चलकर दूध नहीं दे पाएंगे।
हर वीगन व्यक्ति प्रति वर्ष लगभग 200 तक पशुओं की जान बचाता है। इसके अलावा, वीगन भोजन करने वाले लोग हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर के खतरे को कम करते हैं। भोजन के लिए पशुओं को पालना जल प्रदूषण और पानी व भूमि के अत्यधिक उपयोग का भी एक प्रमुख कारण है, और संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि जलवायु संकट के सबसे बुरे प्रभावों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर वीगन भोजन की ओर बदलाव आवश्यक है। जो लोग बदलाव के लिए तैयार हैं, उनके लिए PETA इंडिया एक मुफ्त वीगन स्टार्टर किट प्रदान करता है।
PETA इंडिया जो इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु हमारा भोजन बनने के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद का विरोध करता है, जो मानव की स्वयं को श्रेष्ठता मानने वाली सोच है। अधिक जानकारी के लिए, कृपया PETAIndia.com पर जाएँ और हमें X, Facebook एवं Instagram पर फॉलो करें
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