केंद्रीय दिल्ली जिला पुलिस ने पशु क्रूरता के मुद्दे पर कार्यशाला आयोजित करने के लिए PETA इंडिया को आमंत्रित किया

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29 August 2026

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दिल्ली – कल, केंद्रीय जिले के 15 पुलिस थानों के 50 से अधिक पुलिस अधिकारियों ने पशुओं पर होने वाली क्रूरता से निपटने के विषय पर People for the Ethical Treatment of Animals India (PETA इंडिया) द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में हिस्सा लिया। यह कार्यशाला 2 सितंबर को मध्य दिल्ली के दरियागंज स्थित केंद्रीय जिला पुलिस उपायुक्त (DCP) के कार्यालय परिसर में आयोजित की गई।

विभिन्न कार्यशालाओं की तस्वीरें और वीडियो मांगे जाने पर दिए जाएंगे। 

यह महत्वपूर्ण पहल केंद्रीय जिले के पुलिस उपायुक्त श्री रोहित राजबीर सिंह, IPS के नेतृत्व में संभव हुई।

तीन घंटे चली इस कार्यशाला में 50 से अधिक पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें सहायक पुलिस आयुक्त (ACP), पुलिस उप-निरीक्षक (PSI), सहायक उप-निरीक्षक (ASI), हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल शामिल थे। सत्रों में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (PCA Act); वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (2022 में संशोधित); भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और पशु संरक्षण से जुड़े अन्य कानूनों के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी गई। कार्यशाला में पशुओं पर क्रूरता के मामलों से निपटने में पुलिस की भूमिका और ऐसे मामलों में अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रियाओं पर भी चर्चा की गई।

PETA इंडिया के कानूनी सलाहकार और क्रूरता प्रतिक्रिया निदेशक मीत अशर ने कहा-  “पशुओं पर क्रूरता के मामलों पर कार्रवाई करने और ऐसी क्रूरता को रोकने में पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका है। PETA इंडिया को दिल्ली पुलिस का सहयोग करने और पशु संरक्षण से जुड़े कानूनों व प्रक्रियाओं को लागू करने में सहायता करने पर खुशी है, ताकि पशुओं की जान बचाई जा सके और उन्हें नुकसान से बचाया जा सके। पशुओं और पूरे समाज की ओर से हम केंद्रीय दिल्ली जिले के DCP श्री रोहित राजबीर सिंह, IPS के आभारी हैं कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों को पशु संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए PETA इंडिया को आमंत्रित किया।”

 हाल ही में, पहली बार राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने देश में पशुओं के प्रति क्रूरता के मामलों का रिकॉर्ड तैयार किया और आंकड़े जारी किए। इसके अनुसार, 2024 में पशु क्रूरता के 9,039 मामले दर्ज किए गए और 10,312 लोगों को गिरफ्तार किया गया। 2021 में, Federation of Indian Animal Protection Organisations द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया था कि उससे पहले के एक दशक के दौरान लगभग 5 लाख पशु अपराधों के शिकार हुए थे।

PETA इंडिया का कहना है कि कई हिंसक अपराधियों का पशुओं पर क्रूरता का इतिहास रहा है। Forensic Research and Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि, “जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, उनके अन्य अपराधों में शामिल होने की संभावना तीन गुना अधिक होती है। इनमें हत्या, बलात्कार, लूट, मारपीट, उत्पीड़न, धमकी और नशीली दवाओं या अन्य मादक पदार्थों का दुरुपयोग शामिल हैं।”

यह पहल पूरे भारत में कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अधिकारियों को पशु संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाने और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाने के PETA इंडिया के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, ताकि पशुओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को वह गंभीरता दी जा सके जिसके वे हकदार हैं। इससे पहले सीमा सुरक्षा बल (BSF), ग्वालियर; छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस; गोवा राज्य पुलिस और गोवा पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाओं; सिक्किम राज्य पुलिस; पुणे सिटी पुलिस; नागपुर सिटी पुलिस; मीरा-भायंदर और वसई-विरार पुलिस; बेलगावी जिला पुलिस; हुबली-धारवाड़ जिला पुलिस; बेंगलुरु सिटी पुलिस; जम्मू, कठुआ और सांबा जिला पुलिस; तथा बेंगलुरु और चिक्कमगलुरु पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों के साथ भी इसी तरह की जागरूकता कार्यशालाएँ आयोजित की जा चुकी हैं।

PETA इंडिया जो इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु किसी भी तरह से हमारे शोषण के लिए नहीं हैं।” PETA लंबे समय से पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (PCA Act) को मजबूत करने की मांग करता रहा है। इस कानून में क्रूरता के लिए पुराने और अपर्याप्त दंड का प्रावधान है। उदाहरण के लिए, पहली बार दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर अधिकतम केवल 50 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत अधिक कड़े दंड का प्रावधान है। PCA Act में संशोधन के संबंध में केंद्र सरकार को भेजे गए अपने प्रस्ताव में PETA इंडिया ने पशुओं पर क्रूरता के लिए दंड में उल्लेखनीय वृद्धि करने की सिफारिश की है।

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