“प्रयोगशाला में उपयोग होने वाले पशुओं का विश्व दिवस” पर PETA इंडिया के प्रदर्शन में पिंजरों में कैद ‘बीगल’ पालामूर बायोसाइंसेज़ में कैद पशुओं के लिए अपील करेंगे

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22 April 2026

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अनुष्का यादव 9167907382; [email protected]

हैदराबाद – ‘प्रयोगशाला में इस्तेमाल होने वाले पशुओं के विश्व दिवस’ (24 अप्रैल) से पहले और पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) द्वारा किए गए एक विस्फोटक व्हिसलब्लोअर-आधारित खुलासे के बाद, जिसमें तेलंगाना स्थित पालमुर बायोसाइंसेज़ में कुत्तों, बंदरों और अन्य पशुओं के साथ गंभीर दुर्व्यवहार उजागर हुआ, PETA इंडिया और वीगन्स ऑफ तेलंगाना के समर्थक हैदराबाद में बीगल मास्क और जेल कैदियों के कपड़े पहनकर पिंजरों में बंद होंगे। यह प्रदर्शन समिति फॉर द कंट्रोल एंड सुपरविजन ऑफ एक्सपेरिमेंट्स ऑन एनिमल्स (CCSEA) से आग्रह करने के लिए किया जा रहा है कि वह वहां प्रजनन और प्रयोगों के लिए कैद 1200 से अधिक पशुओं के बचाव को संभव बनाए, जिसकी शुरुआत 73 बीगल्स की रिहाई से हो, जिन्हें पुनर्वास के लिए चिन्हित किया है, लेकिन फिर भी उन्हें गोद लेने में सहायता करने के इच्छुक पशु संरक्षण समूहों को बचाए जाने की अनुमति देने से इनकार कर रहा है।

17 जून 2025 को एजेंसी को प्रस्तुत CCSEA-नियुक्त निरीक्षकों की एक विस्तृत रिपोर्ट में सिफारिश कि गई थी कि इस प्रयोगशाला से 1200 से अधिक कुत्तों, बंदरों, भेड़ों और अन्य पशुओं को आगे होने वाले दर्द, पीड़ा या कष्ट से बचाने के लिए उन्हें इस प्रोयगशाला से हटा लिया जाना चाहिए। दिसंबर 2025 में, यूनाइटेड स्टेट्स फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने पालामूर बायोसाइंसेज़ को एक सार्वजनिक चेतावनी पत्र जारी किया, जिसमें गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिस (GLP) नियमों के “गंभीर उल्लंघनों” और निगरानी में “प्रणालीगत विफलताओं” का हवाला दिया गया, जिससे उस सुविधा में उत्पन्न सुरक्षा डेटा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर सवाल उठे। FDA ने अनुचित इच्छामृत्यु SOPs जैसे गंभीर पशु कल्याण संबंधी मुद्दों का भी उल्लेख किया, जो PETA इंडिया द्वारा उठाई गई व्हिसलब्लोअर-आधारित शिकायतों की पुष्टि करते हैं।

कब       : गुरुवार, 23 अप्रैल, दोपहर 12 बजे ठीक

कहाँ      : कासु ब्रह्मानंद रेड्डी नेशनल पार्क मुख्य द्वार के सामने, जुबली हिल्स, हैदराबाद 500034

PETA इंडिया के कैंपेन और क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स प्रमुख उत्कर्ष गर्ग कहते हैं- “पालामूर बायोसाइंसेज़ में, जंगली बंदरों को उनके जंगल के घरों से अपहरण कर उन पर प्रयोग किए जाते हैं, सूअरों को ज़हर दिया जाता है और यहां तक कि वे बीगल्स जिन्हें अब प्रजनन या प्रयोगों के लिए उपयोग नहीं किया जाता, उन्हें भी रिहा करने और प्यार करने वाले घरों में गोद लेने की अनुमति नहीं दी जाती। PETA इंडिया CCSEA से आग्रह कर रहा है कि वह पालामूर बायोसाइंसेज़ में सभी प्रजनन और पशु प्रयोगों को समाप्त करे और महीनों पहले अपने ही नियुक्त निरीक्षकों द्वारा की गई सिफारिश के अनुसार वहां जीवित बचे पशुओं को बचाए।“

17 जून को एजेंसी को प्रस्तुत CCSEA-नियुक्त निरीक्षकों की रिपोर्ट में दर्ज किया गया कि उस प्रयोगशाला ने उपयुक्त भंडार या चिकित्सीय अभिलेख नहीं रखे; पशुओं को CCSEA दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए बार-बार दर्दनाक प्रयोगों में उपयोग किया गया; कुत्ते, गायें और अन्य पशु खराब स्थिति में थे; पशुओं पर पर्याप्त दर्द-नियंत्रण प्रक्रियाओं के बिना प्रयोग किए गए; पशुओं को पहले बेहोश किए बिना मार दिया गया; और क्रूरता तथा कुप्रबंधन के अन्य उदाहरण पाए गए। रिपोर्ट निष्कर्ष निकालती है, “PBPL (पालामूर बायोसाइंसेज़) में देखी गई परिचालन कमियाँ अलग-थलग घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि गहरे जड़ें जमा चुकी संरचनात्मक, प्रक्रियात्मक और नैतिक विफलताओं का संकेत देती हैं। निरीक्षण के दौरान दर्ज गैर-अनुपालन का पैमाना और गंभीरता इस सुविधा के स्थापित पशु कल्याण मानकों और नियामक जवाबदेही के पालन को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न करती हैं।”

PETA इंडिया इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि ‘पशु हमारे प्रयोग के लिए नहीं हैं’, प्रजातिवाद का विरोध करता है, जो मनुष्यों का स्वयं सर्वोच्च मानने वाला दृष्टिकोण है। अधिक जानकारी के लिए, कृपया PETAIndia.com पर जाएँ और हमें X, Facebook, एवं Instagramपर फॉलो करें।

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