हथिनी माधुरी के साथ विश्वासघात”: PETA इंडिया ने हथिनी को फिर पुराने शेड में कैद करने की मठ की योजना का किया खुलासा

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19 June 2026

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Sanskriti Bansore; [email protected]

Vikram Chandravanshi; [email protected]

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मुंबई- आज आयोजित एक प्रेस वार्ता में, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया ने कोल्हापुर के नंदिनी मठ, आधिकारिक रूप से श्री स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ (करवीर), नंदानी- द्वारा बनाई गई एक योजना का खुलासा किया। यह योजना बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत हथिनी माधुरी (जिसे महादेवी के नाम से भी जाना जाता है) के शारीरिक और मानसिक पुनर्वास हेतु की गई व्यवस्था को निरस्त करने और पलटने का प्रयास है। यह तब सामने आया है, जब मठ ने पहले जनता के सामने माधुरी की भविष्य की देखभाल को लेकर भ्रामक दावे किए थे।

PETA इंडिया ने खुलासा किया है कि कोल्हापुर के नंदिनी मठ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त हाई पावर्ड कमेटी (HPC) के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत किया है, जिसमें माधुरी को उसके वर्तमान विशाल वन क्षेत्र वाले नए घर राधे कृष्णा टेंपल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट (RKTEWT), जिसे सामान्यतः वनतारा कहा जाता है, से हटाने की मांग की गई है। साथ ही, उसे उन अन्य हाथियों से भी अलग करने का प्रयास किया जा रहा है, जिनकी संगति उसके मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस आवेदन में माधुरी को फिर से उसी पुराने उदास और तंग शेड में कैद करने की मांग की गई है, जहां वह पिछले 33 वर्षों तक अकेले जंजीरों में बंधी रही और उसके अकेलेपन तथा निराशा ने उसे हिंसक बना दिया था। नंदिनी मठ द्वारा माधुरी की सामाजिक, पर्यावरणीय और शारीरिक आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहने के कारण उसे जब्त कर वहां से तत्काल हटाने का आदेश दिया गया था। इन्हीं परिस्थितियों के परिणामस्वरूप माधुरी ने वर्ष 2017 में मठ के मुख्य पुजारी की जान ले ली थी और 2022 में एक जुलूस के दौरान एक व्यक्ति पर हमला किया था।

विशेष रूप से, HPC के 3 जून 2025 के आदेश तथा बॉम्बे हाई कोर्ट के 16 जुलाई 2025 के आदेशों के माध्यम से माधुरी को स्थायी रूप से RKTEWT में पुनर्वासित करने का निर्देश दिया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इन आदेशों को बरकरार रखा। हर स्तर पर मठ परिसर में माधुरी द्वारा झेली गई शारीरिक और मानसिक पीड़ा को ध्यान में रखा गया, जिसके कारण उसे दीर्घकालिक पैरों की बीमारी, गठिया और लंबे समय तक एकांत कैद तथा दर्द के कारण उत्पन्न मानसिक आघात के व्यवहारिक लक्षणों जैसी गंभीर समस्याएं हुईं।

नंदिनी मठ में रहने के दौरान हथिनी महादेवी की तस्वीरें और वीडियो मांगे जाने पर उपलब्ध कराएं जाएंगे। 

PETA इंडिया की वाईस प्रेसीडेंट ऑफ पॉलिसी, खुशबू गुप्ता कहती हैं- “माधुरी को उन चिकित्सकीय सुविधाओं और अन्य हाथियों की संगति से दूर करना, जिनकी उसे बेहद आवश्यकता है, और उसे फिर से एकांत कैद में धकेलना किसी भी तरह से जीवदया नहीं है। ऐसा करने से उसके स्वास्थ्य में अब तक हुई सारी प्रगति पर पानी फिर जाएगा। उसे उसी स्थान पर वापस भेजने की कोशिश, जहां उसने दशकों तक कष्ट सहा, उसके साथ-साथ उन न्यायिक आदेशों के साथ भी गंभीर विश्वासघात है, जो एक जीवित, सोचने-समझने, महसूस करने वाले और सामाजिक प्राणी के रूप में उसकी शारीरिक एवं मानसिक आवश्यकताओं को पूरा किए जाने के अधिकार को मान्यता देते हैं।”

पुनर्वास के बाद माधुरी को विशेष पशु-चिकित्सकीय देखभाल मिलने लगी और दशकों में पहली बार उसे अन्य हाथियों के साथ रहने का अवसर मिला। मादा हाथियों के लिए यह बेहद आवश्यक है, क्योंकि प्राकृतिक परिस्थितियों में वे कई पीढ़ियों वाले पारिवारिक झुंडों में रहती हैं। वनतारा की रिपोर्टों के अनुसार, माधुरी अब जामनगर में बचाई गई एक अन्य हथिनी के साथ गहरा संबंध बना चुकी है। वह उसकी संगति तलाशती है और दोनों साथ में गतिविधियों में भाग लेती हैं, संयुक्त हाइड्रोथेरेपी सत्रों में शामिल होती हैं तथा चिंघाड़ कर और अन्य आवाजे निकालकर आपस में संवाद करती हैं।

वर्ष 2025 में महाराष्ट्र सरकार और वनतारा (जिसकी मूल कंपनी रिलायंस को माधुरी की देखभाल करने के कारण संगठित विरोध का सामना करना पड़ा था) ने मीडिया में आश्वासन दिया था कि महाराष्ट्र में अत्याधुनिक सैटेलाइट वनतारा सुविधा स्थापित की जाएगी। हालांकि, अब यह स्पष्ट हो गया है कि ऐसी कोई सुविधा न तो माधुरी और न ही किसी अन्य हाथी के लिए प्रस्तावित है। माधुरी के कल्याण की चिंता करने वाली जनता को संतुष्ट करने के लिए कोल्हापुर में एक ऐसे केंद्र का वादा किया गया था, जिसमें 24 घंटे चिकित्सा सुविधाएं, “जोड़ों और मांसपेशियों को राहत देने के लिए विशेष हाइड्रोथेरेपी तालाब, तैरने और प्राकृतिक गतिविधियों के लिए बड़ा जलाशय, तथा शारीरिक पुनर्वास के लिए लेजर थेरेपी और उपचार कक्ष” जैसी सुविधाएं होंगी। लेकिन मठ द्वारा HPC में दायर नए आवेदन ने इन दावों को झूठा साबित कर दिया है। अब योजना यह है कि माधुरी को उसी शेड में कैद रखा जाए, जहां वह दशकों तक अकेले बंद रही थी, हालांकि अब उसके पास एक नई सार्वजनिक सड़क भी प्रस्तावित है।

माधुरी गंभीर और लाइलाज स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है, जिनमें पैरों और हड्डियों की पुरानी बीमारियां शामिल हैं। ये समस्याएं मठ में वर्षों तक कंक्रीट पर रहने के कारण विकसित हुई हैं और इनके लिए अभी भी विशेष पशु-चिकित्सकीय उपचार तथा निरंतर निगरानी की आवश्यकता है। इसके बावजूद, मठ उसे जामनगर से लगभग 30 घंटे की सड़क यात्रा कराकर वापस कोल्हापुर ले जाने का प्रस्ताव रख रहा है, जिससे वह अस्पताल और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं से दूर हो जाएगी।

PETA इंडिया ने कहा कि HPC ने अभी तक माधुरी की वापसी को मंजूरी नहीं दी है और उसके पुनर्वास संबंधी बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश अभी भी प्रभावी है। इसके बावजूद, मठ और वनतारा (संभवतः दबाव में) द्वारा सार्वजनिक घोषणाएं की गई हैं कि माधुरी को वापस कोल्हापुर लाया जाएगा। इससे न्यायालय के आदेशों के पालन और माधुरी के कल्याण को प्राथमिकता दिए जाने को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। PETA इंडिया ने इस प्रस्ताव के खिलाफ HPC के समक्ष आपत्तियां दायर की हैं और पूर्व न्यायिक आदेशों के अनुरूप माधुरी को स्थायी रूप से वनतारा में ही रहने देने की मांग की है।

PETA इंडिया जो इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु हमारे मनोरंजन के लिए इस्तेमाल किए जाने या किसी भी अन्य प्रकार के दुर्व्यवहार के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद (speciesism) का विरोध करता है, जो मनुष्य की स्वयं को अन्य सभी प्रजातियों से श्रेष्ठ माने वाली सोच हैं। PETA इंडिया के बारे में अधिक जानकारी के लिए PETAIndia.com पर जाएं या XFacebook अथवा Instagram पर हमें फॉलो करें।

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