बलिया: घोड़े को आगे के पैरों से लटकाकर बेरहमी से पीटा गया- PETA इंडिया की शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज
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29 April 2026
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बलिया- इंस्टाग्राम पर एक वीडियो वायरल होने के बाद, जिसमें एक घोड़े को भारी बोझ न उठा पाने पर उसे गाड़ी से उसके आगे के पैरों से लटकाकर डंडे से बेरहमी से पीटा जा रहा था, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) ने पुलिस अधीक्षक, बलिया और सेहतवार पुलिस स्टेशन के साथ तथा पशु अधिकार कार्यकर्ता ऋषिका रॉय के साथ मिलकर कानून की संबंधित कड़ी धाराओं के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की जाए।
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA), 1960 की धारा 11 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। BNS, 2023 की धारा 325 किसी भी पशु को मारने, ज़हर देने, अंग-भंग करने या उसे बेकार बना देने को संज्ञेय अपराध मानती है और इसके लिए पांच वर्ष तक की सजा, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान करती है।
दुर्व्यवहार का वीडियो और एफआईआर की कॉपी मांगे जाने पर उपलब्ध करवाई जाएगी।
यह जानकारी मिली है कि आरोपी ने बाद में घोड़े को बेच दिया और अब वह देवरिया चला गया है। PETA इंडिया ने बलिया पुलिस से घोड़े का पता लगाने, पीड़ित घोड़े को जब्त करने और जांच के लिए आरोपी को बलिया बुलाने का आग्रह किया है।
PETA इंडिया की क्रूरता प्रतिक्रिया समन्वयक ईशानी राठी कहती हैं -“इस घोड़े ने अकल्पनीय दर्द और पीड़ा झेली है। जो लोग पशुओं के साथ अत्याचार करते हैं, वे अक्सर आगे चलकर मनुष्यों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। सभी की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि लोग इस तरह की पशु क्रूरता की घटनाओं की सूचना दें। हम श्री ओमवीर सिंह, आईपीएस, पुलिस अधीक्षक, बलिया; श्री दिनेश कुमार शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, बलिया; और श्री अनिल कुमार सिंह, उप निरीक्षक एवं प्रभारी, सेहतवार पुलिस स्टेशन की सराहना करते हैं कि उन्होंने एफआईआर दर्ज कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पशुओं पर क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
PETA इंडिया सिफारिश करता है कि पशु अत्याचार करने वालों का मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन कराया जाए और उन्हें परामर्श दिया जाए, क्योंकि पशुओं के साथ दुर्व्यवहार गहरे मनोवैज्ञानिक विकार का संकेत है। शोध से पता चलता है कि जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, वे अक्सर बार-बार अपराध करने वाले होते हैं और आगे चलकर अन्य पशुओं, यहां तक कि मनुष्यों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है, “जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता में संलग्न होते हैं, उनके अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है, जिनमें हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीले पदार्थों का दुरुपयोग शामिल है।”
PETA इंडिया जो इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु किसी भी प्रकार से हमारा दुर्व्यवहार सहने के लिए नहीं हैं”, लंबे समय से PCA अधिनियम, 1960 को मजबूत करने के लिए अभियान चला रहा है, जिसमें दंड के प्रावधान पुराने है और आज के समय में उतने प्रभावी नहीं है जैसे कि पहली बार दोषी पाए गए अपराधियों के लिए अधिकतम केवल 50 रुपये का जुर्माना (हालांकि BNS, 2023 अधिक कड़े दंड का प्रावधान करता है)। PCA अधिनियम में संशोधन के संबंध में केंद्र सरकार को भेजे गए एक प्रस्ताव में, PETA इंडिया ने पशुओं के प्रति क्रूरता के लिए दंड को और अधिक बढ़ाने की सिफारिश की है।
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