अभिनेत्री श्रिया सरन और PETA इंडिया ने ISKCON कानपुर को सजीव दिखने वाला मशीनी हाथी भेंट किया
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30 April 2026
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कानपुर – अभिनेत्री श्रिया सरन और पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) ने ISKCON कानपुर को गजराज नाम का एक सजीव दिखने वाला मशीनी हाथी दान किया है, जिससे यह उत्तर भारत का पहला मंदिर और उत्तर प्रदेश का पहला धार्मिक संस्थान बन गया है, जिसने एक मशीनी हाथी को अपनाया है।
आज, गजराज का उद्घाटन KTL प्रा. लि. के प्रबंध निदेशक श्री महेंद्र कुमार अग्रवाल द्वारा किया गया। इस अवसर पर इस्कॉन वृंदावन के श्री प्रभोधनंद सरस्वती स्वामी महाराज, इस्कॉन कानपुर मंदिर के अध्यक्ष श्री प्रेम हरिनाम प्रभु, उपाध्यक्ष श्री राधा रंजन प्रभु, मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री मनोज गुप्ता, मंदिर समिति के उपाध्यक्ष श्री मुकेश पल्लीवाल, तथा अन्य मंदिर अधिकारी और भक्त उपस्थित रहे।
यह पहल PETA इंडिया द्वारा मंदिर के इस करुणामय निर्णय की सराहना में कराई गई, जिसमें मंदिर ने कभी भी जीवित हाथियों को न रखने और न ही किराए पर लेने का संकल्प लिया। यह नया मशीनी हाथी, गजराज, पूरे देश में PETA इंडिया द्वारा दान किया करवाया गया 26वाँ मशीनी हाथी है। मशीनी हाथी का स्वागत उद्घाटन समारोह और सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ किया गया।
उद्घाटन समारोह की तस्वीरें और वीडियो मांगे जाने पर उपलब्ध करआए जाएंगे।
अभिनेत्री श्रिया सरन ने कहा, “मुझे PETA इंडिया के साथ मिलकर ISKCON कानपुर को गजराज भेंट करते हुए बहुत खुशी हो रही है। यह मशीनी हाथी मंदिर को पुरानी परंपराओं को जारी रखने में मदद करेगा, साथ ही हाथियों को, जो भगवान गणेश के पृथ्वी पर प्रतिनिधि हैं, उनके प्राकृतिक आवास में फलने-फूलने का अवसर देगा। यह पहल मेरे लिए विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यह उत्तर प्रदेश राज्य का पहला मशीनी हाथी होगा।”
ISKCON कानपुर के अध्यक्ष श्री प्रेम हरिनाम प्रभु ने कहा, “भगवद गीता (12.13) में श्री कृष्ण कहते हैं कि सच्चा भक्त सभी जीवित प्राणियों का दयालु मित्र होता है (मैत्रः करुण एव च)। सच्ची भक्ति करुणा के बिना संभव नहीं है। यह पहल हमें हमारे मंदिर की शोभायात्राओं की आध्यात्मिक भव्यता को बनाए रखने की अनुमति देती है, साथ ही यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी जीवित प्राणी को तनाव या कैद का सामना न करना पड़े। यह आधुनिक नवाचार और हमारी परंपराओं का सुंदर मेल है।”
ISKCON के संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपाद ने सिखाया कि पशुओं में भी आत्मा होती है और वे भगवान की रचनाएँ हैं, जो करुणा के योग्य हैं। उन्होंने बताया कि भोजन करना, सोना और अपनी रक्षा करना जैसी मूलभूत आवश्यकताओं में पशुओं और मनुष्यों में समानता है। वे भोजन के लिए पशुओं की हत्या को हिंसा मानते थे और उनका तर्क था कि वास्तव में आध्यात्मिक सभ्यता वही होगी जो पशुओं की रक्षा करे और उन्हें प्राकृतिक जीवन जीने दे, जबकि गायों की रक्षा वैदिक संस्कृति के लिए विशेष रूप से आवश्यक है।
हाथी बुद्धिमान, सक्रिय और सामाजिक जंगली पशु हैं। कैद में, उन्हें मारपीट, हथियारों के उपयोग और बलपूर्वक शोभायात्राओं में इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। मंदिरों और अन्य स्थानों पर कैद में रखे गए अधिकांश हाथी कई घंटों तक कंक्रीट पर जंजीरों से बंधे रहने के कारण बेहद दर्दनाक पैरों की समस्याओं और घावों से पीड़ित होते हैं। अधिकांश को पर्याप्त भोजन, पानी, पशु-चिकित्सकीय देखभाल और प्राकृतिक जीवन जैसी किसी भी चीज़ से वंचित रखा जाता है। इन नरक जैसी परिस्थितियों में, कई हाथी अत्यधिक निराश हो जाते हैं और आक्रामक हो उठते हैं, कभी-कभी महावतों या अन्य मनुष्यों या पशुओं को मार भी देते हैं।
मशीनी हाथी 3 मीटर ऊँचे होते हैं और उनका वजन 500 किलोग्राम होता है। वे रबर, फाइबर, धातु, जाली, फोम और स्टील से बनाए जाते हैं और पाँच मोटरों से चलते हैं। एक मशीनी हाथी दिखने, महसूस होने और उपयोग में बिल्कुल असली हाथी जैसा होता है। यह अपना सिर हिला सकता है, कान और आँखें चला सकता है, पूँछ हिला सकता है, सूंड उठा सकता है और यहाँ तक कि पानी भी छिड़क सकता है। इस पर चढ़ा जा सकता है, और इसकी पीठ पर एक सीट भी लगाई जा सकती है। इसे केवल बिजली से जोड़कर आसानी से चलाया जा सकता है। इसे आधार में पहियों का एक बेस बना होता है जिससे इसे सड़कों पर चलाया जा सकता है और अनुष्ठानों और शोभायात्राओं के लिए आसानी से इधर-उधर ले जाया और धकेला जा सकता है।
PETA इंडिया जो इस सिद्धांत के तहत का कर्ता है कि “पशु हमारे मनोरंजन के लिए नहीं हैं”, स्पीशीसिज़्म यानि प्रजातिवाद का विरोध करता है, जो मानव-श्रेष्ठता पर आधारित एक सोच है। अधिक जानकारी के लिए, कृपया PETAIndia.com पर जाएँ या समूह को X, Facebook, या Instagram पर फॉलो करें।
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