अभिनेत्री ऋचा चड्ढा, PETA इंडिया और CUPA मिलकर श्री छायादेवी श्री शनैश्वर स्वामी क्षेत्र को असली हाथी के आकार का मशीनी हाथी भेंट किया

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24 June 2026

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बेंगलुरु – अभिनेत्री ऋचा चड्ढा, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA इंडिया) और कम्पैशन अनलिमिटेड प्लस एक्शन (CUPA) ने बेंगलुरु स्थित श्री छायादेवी श्री शनैश्वर स्वामी क्षेत्र को ‘नीला प्रभा’ नामक असली हाथी के आकार का एक मशीनी (यांत्रिक) हाथी भेंट किया है। आज ‘नीला प्रभा’ का अनावरण उद्योगपति एवं परोपकारी श्री ध्यानंदा आर ने फैबकेयर एंड फैसाडे के अध्यक्ष रेनुकेश्वर एमआर, अभिनेत्री मंजू भाषिणी, मंदिर के अधिकारियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में किया।

यह पहल PETA इंडिया और CUPA द्वारा मंदिर के उस करुणामय निर्णय के सम्मान में की गई है, जिसके तहत मंदिर ने कभी भी जीवित हाथियों को रखने या किराए पर नहीं लेने का निर्णय लिया। यह नया मशीनी हाथी, नीला प्रभा, पूरे देश में PETA इंडिया द्वारा उपलब्ध कराया गया 28वाँ रोबोटिक हाथी और कर्नाटक में दान किया गया 9वाँ हाथी है। मशीनी हाथी का स्वागत उद्घाटन समारोह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और भक्तिमय भजनों के साथ किया गया।

 उद्घाटन समारोह के फोटो और वीडियो मांगे जाने पर उपलब्ध कराए जाएंगे।

 अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने कहा- “मुझे PETA इंडिया के साथ मिलकर बेंगलुरु के श्री छायादेवी श्री शनैश्वर स्वामी क्षेत्र को नीला प्रभा भेंट करते हुए प्रसन्नता हो रही है। यह मशीनी हाथी मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं को संरक्षित रखने में मदद करेगा, साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि वास्तविक हाथियों को बंदीकरण से मुक्ति मिले और वे अपने प्राकृतिक वातावरण में फल-फूल सकें। विशेष रूप से मेरे लिए यह गर्व की बात है कि मैं इस पहल से बेंगलुरु जैसे सांस्कृतिक और विरासत से समृद्ध शहर में जुड़ रही हूँ।”

मुख्य अतिथि ध्यानंदा आर ने कहा, “श्री छायादेवी श्री शनैश्वर स्वामी क्षेत्र में नीला प्रभा का आगमन इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि आस्था और करुणा साथ-साथ चल सकती हैं। नवीन और मानवीय विकल्पों को अपनाकर मंदिर देशभर के समुदायों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। मैं PETA इंडिया और मंदिर प्रशासन की सराहना करता हूँ कि उन्होंने ऐसा विचारशील कदम उठाया है, जो परंपरा और पशु कल्याण दोनों का सम्मान करता है।”

मंदिर के प्रशासक आदित्यनन ने कहा- “मंदिर लंबे समय से आध्यात्मिक मार्गदर्शन और सामाजिक प्रगति के केंद्र रहे हैं। नीला प्रभा का आगमन यह दर्शाता है कि सांस्कृतिक परंपराएँ भी करुणा और जिम्मेदारी को प्रतिबिंबित करने वाले रूप में विकसित हो सकती हैं। मुझे इस अवसर का हिस्सा बनकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है और आशा है कि यह पहल अधिक संस्थानों को ऐसे करुणामय उपाय अपनाने के लिए प्रेरित करेगी, जो हाथियों को आजीवन कैद से बचाते हैं।”

हाथी बुद्धिमान, सक्रिय और सामाजिक वन्य पशु हैं। कैद भरे जीवन में उन्हें जुलूसों और धार्मिक आयोजनों में उपयोग के लिए मारपीट, हथियारों और बल प्रयोग के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाता है। मंदिरों और अन्य स्थानों पर बंदी बनाए गए अधिकांश हाथी घंटों तक कंक्रीट पर जंजीरों से बंधे रहने के कारण अत्यंत पीड़ादायक पैरों की समस्याओं और घावों से ग्रस्त होते हैं। उन्हें पर्याप्त भोजन, पानी, पशु-चिकित्सकीय देखभाल और प्राकृतिक जीवन जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रखा जाता है। ऐसी अमानवीय परिस्थितियों में अनेक हाथी अत्यधिक निराश और तनावग्रस्त हो जाते हैं तथा कभी-कभी महावतों, अन्य मनुष्यों या अन्य पशुओं पर हमला कर देते हैं।

मशीनी हाथियों की ऊँचाई लगभग 3 मीटर होती है और उनका वजन लगभग 500 किलोग्राम होता है। इन्हें रबर, फाइबर, धातु, जाली, फोम और स्टील से बनाया जाता है तथा ये पाँच मोटरों से संचालित होते हैं। मशीनी हाथी देखने, महसूस करने और उपयोग करने में वास्तविक हाथी जैसा होता है। यह अपना सिर हिला सकता है, कान और आँखें चला सकता है, पूँछ हिला सकता है, सूँड उठा सकता है और यहाँ तक कि पानी का छिड़काव भी कर सकता है। इसकी पीठ पर चढ़ा जा सकता है तथा इसकी पीठ पर बैठने के लिए आसन भी लगाया जा सकता है। इसे केवल बिजली से जोड़कर आसानी से संचालित किया जा सकता है। इसके आधार यानि निचले हिस्से पर पहिये लगे रहते है जिनकी मदद से इसे सड़कों पर आसानी ले जाया जा सकता है जिससे धार्मिक अनुष्ठानों और शोभायात्राओं के दौरान इसे आसानी से इधर-उधर ले जाया जा सकता है।

श्री छायादेवी श्री शनैश्वर स्वामी क्षेत्र बेंगलुरु के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में से एक है, जो भगवान शनि को समर्पित है और कर्नाटक सहित अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। यह मंदिर कठिनाइयों से मुक्ति तथा समृद्धि, न्याय और कल्याण के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करने वाले भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण पूजा स्थल माना जाता है।

PETA इंडिया, जो इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु हमारे मनोरंजन के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद का विरोध करता है। प्रजातिवाद एक मानव के स्वयं को श्रेष्ठ मानने वाली सोच है। अधिक जानकारी के लिए PETAIndia.com पर जाएँ या X, Facebook अथवा Instagram पर PETA इंडिया को फॉलो करें।

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