PETA इंडिया की शिकायत के बाद, गुवाहाटी में चूजों को लात मारकर रेलवे ट्रैक पर फेंकने और मरने के लिए छोड़ने के मामले में एफआईआर दर्ज

Posted on by Surjeet Singh

एक ऐसा वीडियो सामने आया था जिसमे कई चूजे ट्रेन के फर्श पर पड़े दिखाई दे रहे हैं और एक व्यक्ति उन्हें लात मारकर रेलवे ट्रैक पर फेंककर मरने के लिए छोड़ देता है, इसके बाद PETA इंडिया ने स्थानीय पशु कार्यकर्ता अदिति बख्शी के साथ मिलकर तुरंत पुलिस कार्रवाई की मांग की। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए गुवाहाटी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धाराओं 11(1)(a), 11(1)(d), 11(1)(e), 11(1)(k) और 38(3) के तहत प्राथमिकी रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की। ऐसा माना जा रहा है कि ये चूजे अंडा या मांस उद्योग से आए थे।

इस परेशान करने वाले वीडियो में बड़ी संख्या में चूजे ट्रेन के फर्श पर बिखरे हुए दिखाई देते हैं। इनमें से कुछ जीवित हैं, जबकि कुछ में बहुत कम हरकत दिखाई देती है। कई चूजे गंभीर रूप से घायल हैं और कुछ की हड्डियाँ भी टूटी हुई लगती हैं। लगता है कि इन चूजों को सुरक्षित तरीके से ले जाने की किसी उचित व्यवस्था के बिना ही बहुत कठिन और तनावपूर्ण तरीके से ले जाया जा रहा था। वीडियो में आगे एक व्यक्ति चूजों को पैरों से लात मारकर रेलवे ट्रैक पर फेंकता दिखाई देता है और उन्हें वहीं मरने के लिए छोड़ देता है। इस तरह इन जीवों को बेवजह दर्द और गंभीर पीड़ा दी गई।

चूजे दर्द, तनाव और डर महसूस करते हैं। इन नन्हें और नाजुक पक्षियों को लात मारना, घायल करना और रेलवे ट्रैक पर फेंक देना बेहद क्रूर है। PETA इंडिया, पांडु, गुवाहाटी के सीनियर सुप्रिटेंडेंट ऑफ रेलवे पुलिस (एसआरपी), श्री प्राणजीत बोरा की सराहना करता है, जिन्होंने इस मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देकर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पशुओं के साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यह घटना अंडा और मांस उद्योग में चूजों के साथ होने वाली आम और अमानवीय क्रूरता को भी उजागर करती है। इन उद्योगों में जन्म के तुरंत बाद बेकार माने जाने वाले नवजात चूजों को मार दिया जाता है या फेंक दिया जाता है। इनमें वे नर चूजे भी शामिल होते हैं जिन्हें अंडा उद्योग इसलिए बेकार मानता है, क्योंकि वे आगे चलकर अंडे नहीं दे पाएंगे। इन बेकार माने जाने वाले चूजों को बड़ी बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया जाता है। अक्सर उन्हें कुचलकर, दम घोंटकर, पानी में डुबोकर या मृत पक्षियों और अंडों के छिलकों के साथ ग्राइंडर में डालकर पीस दिया जाता है।

कई मामलों में नवजात चूजों को मछली पालन उद्योग को मछलियों के चारे के रूप में भी बेच दिया जाता है, जहाँ उन्हें पीसकर या जिंदा ही पानी के तालाबों में फेंक दिया जाता है, और मछलियाँ उन्हें सीधे जीवित खा जाती हैं। कुछ चूजों के शरीर पर रंग लगाकर उन्हें बच्चों के खिलौने के रूप में भी बेचा जाता है, लेकिन विषैले पदार्थों या गलत तरीके से संभाले जाने के कारण कुछ ही समय बाद उनकी अक्सर मौत हो जाती है।