PETA इंडिया की अपील के बाद दिल्ली वन विभाग ने त्योहारों और आयोजनों में पालतू हाथियों के बजाय मशीनी हाथियों के इस्तेमाल की सलाह दी
हाथियों की सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, दिल्ली की राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग ने एक परामर्श जारी किया है। इसमें धार्मिक संस्थानों, मंदिर समितियों, कार्यक्रम आयोजकों और श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे धार्मिक समारोहों और त्योहारों के दौरान जीवित बंदी हाथियों के बजाय मशीनी (रोबोटिक) हाथियों का उपयोग करें। यह परामर्श PETA इंडिया की अपील के बाद जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए कभी-कभी अलग-अलग क्षेत्रों से जीवित बंदी हाथियों को लाया जाता है। हालांकि, दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में भीड़ के बीच जीवित हाथियों के इस्तेमाल से जुड़ी सार्वजनिक सुरक्षा, पशु कल्याण और व्यवस्थागत चुनौतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह परामर्श बंदी हाथियों के इस्तेमाल से दूर जाने की देशव्यापी बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है, जिसका कारण उनके कल्याण और मानव सुरक्षा को लेकर चिंताएँ हैं। आमेर किले में पर्यटकों को सवारी कराने के लिए हाथियों के इस्तेमाल में सात वर्षों के दौरान लगभग 70% की कमी आई है। जून 2026 में तेलंगाना वन विभाग ने अपने एक मशीनी हाथी अपनाया है और धार्मिक जुलूसों तथा फिल्म शूटिंग के लिए इसके इस्तेमाल की सिफारिश की। सितंबर 2024 में कर्नाटक के मुजराई (धार्मिक बंदोबस्ती) विभाग ने सरकारी मंदिरों में मशीनी हाथियों के इस्तेमाल का स्वागत किया। 2007 में, PETA India द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की कि मुंबई में हाथियों को रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके पीछे हाथियों के साथ क्रूरता, तनावग्रस्त हाथियों से मानव जीवन और संपत्ति को संभावित खतरे, तथा तपेदिक (टीबी) और एंथ्रेक्स के मनुष्यों में संभावित संक्रमण जैसी चिंताएँ बताई गई थीं।
हाथी बुद्धिमान, सक्रिय और अत्यंत सामाजिक वन्यजीव हैं। जुलूसों, सवारी और अन्य आयोजनों में इस्तेमाल करने के लिए उन्हें प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया में अक्सर उन्हें इंसानों की आज्ञा मानने के लिए मारपीट, जंजीरों से बांधना और दर्द पहुंचाने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है। मंदिरों और अन्य स्थानों पर बंदी बनाए गए कई हाथी घंटों तक कंक्रीट पर जंजीरों से बंधे रहने के कारण बेहद दर्दनाक पैरों की समस्याओं और पैरों में घाव से पीड़ित होते हैं। इनमें से अधिकांश को पर्याप्त भोजन, पानी, पशु चिकित्सा देखभाल और प्राकृतिक जीवन जीने जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलतीं। ऐसी परिस्थितियों में कई हाथी अत्यधिक हताश और तनावग्रस्त हो जाते हैं और आक्रामक होकर महावतों या अन्य लोगों पर हमला कर देते हैं। हेरिटेज एनिमल टास्क फोर्स द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, 15 वर्षों की अवधि में केरल में बंदी हाथियों ने 526 लोगों की जान ली।
PETA इंडिया ने हाथियों और मनुष्यों के कल्याण को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष भी अपनी चिंताएं रखी हैं। कर्नाटक के दुबारे एलीफेंट कैंप में स्नान कराने के दौरान हाल ही में एक पर्यटक और एक हाथी की मौत, उत्तर प्रदेश के दुधवा टाइगर रिजर्व में एक बंदी हाथी द्वारा महावत पर किए गए घातक हमले तथा अन्य घटनाओं के बाद PETA इंडिया ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखा। संगठन ने देशभर में बंदी हाथियों के साथ हाथी की सवारी, स्नान कराने, सेल्फी लेने और अन्य निकट-संपर्क वाली पर्यटक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसी दिशा में बदलाव देखने को मिल रहा है। इंडोनेशिया सरकार ने देशभर में हाथियों की सवारी पर प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं, 2023 में ब्रिटेन ने Animals (Low-Welfare Activities Abroad) Act पारित किया, जिसके तहत ऐसी विदेशी पशु-आकर्षण गतिविधियों—जैसे हाथी की सवारी—को बेचने या उनका विज्ञापन करने से ब्रिटेन की कंपनियों को रोकने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार किया गया है, जिनमें पशुओं के साथ क्रूरता शामिल होती है।
PETA इंडिया ने सभी राज्यों से मंदिरों और हाथियों के अन्य सभी उपयोगों, जिनमें फिल्म और फोटो शूट, शादियां तथा पर्यटकों की सवारी शामिल हैं, के लिए रोबोटिक हाथियों के इस्तेमाल की अपील की है। असली जैसा दिखने वाले मशीनी हाथी एक मानवीय और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराते हैं, जिससे सांस्कृतिक परंपराओं को भी बनाए रखा जा सकता है। ये मॉडल अपनी आंखें, कान, पूंछ और सूंड हिला सकते हैं और पहियों वाले आधार पर लगे होते हैं। ऐसे सिद्ध मॉडल भारत के कई मंदिरों में पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। केरल पर्यटन ने थाम्बूमुझी बटरफ्लाई पार्क में एक यांत्रिक हाथी सफारी भी शुरू की है।
इस पहल को अप्रैल 2026 में PETA इंडिया के Golden Elephant Protection Award से सम्मानित किया गया। यांत्रिक हाथियों का इस्तेमाल एक शादी, राजनीतिक रैली और एक विज्ञापन की फिल्म शूटिंग में भी किया जा चुका है।
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