बेंगलुरु और चिक्कमगलुरु पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों ने पशु क्रूरता रोकने के लिए कार्यशालाएँ आयोजित करने हेतु PETA इंडिया को आमंत्रित किया

Posted on by Surjeet Singh

बेंगलुरु के पुलिस प्रशिक्षण स्कूल (PTS), थानिसंद्रा और चिक्कमगलुरु के कदूर PTS में आयोजित कार्यशालाओं में 150 से अधिक पुलिस अधिकारियों ने पशुओं के साथ क्रूरता रोकने के तरीकों पर PETA इंडिया से प्रशिक्षण लिया। ये कार्यशालाएँ 14 अगस्त को PTS थानिसंद्रा और 19 अगस्त को कदूर PTS में आयोजित की गईं।

PETA इंडिया के कानूनी सलाहकार एवं क्रूरता प्रतिक्रिया निदेशक मीत अशर और PETA इंडिया की वरिष्ठ क्रूरता प्रतिक्रिया समन्वयक सिंचना, बेंगलुरु पुलिस प्रशिक्षण स्कूल के अधिकारियों के साथ।

यह महत्वपूर्ण पहल कर्नाटक के प्रशिक्षण विभाग के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIGP) श्री डी. देवराजा, IPS; PTS थानिसंद्रा के पुलिस अधीक्षक एवं प्रधानाचार्य श्री एच.एस. जयकृष्ण; और कदूर PTS के पुलिस अधीक्षक एवं प्रधानाचार्य श्री एन. श्रीनिवास के नेतृत्व में संभव हुई।

चिक्कमगलुरु के कदूर PTS में 100 से अधिक और बेंगलुरु के PTS थानिसंद्रा में 50 से अधिक पुलिस अधिकारियों ने तीन घंटे की कार्यशालाओं में भाग लिया। इनमें पुलिस उपनिरीक्षक (PSI), सहायक उपनिरीक्षक (ASI) और हेड कॉन्स्टेबल (HC) शामिल थे। कार्यशालाओं में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960; वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (2022 में संशोधित); भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और पशु संरक्षण से जुड़े अन्य कानूनों के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी गई। पुलिसकर्मियों को पशु क्रूरता के मामलों में उनकी भूमिका और ऐसे मामलों में अपनाई जाने वाली कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में भी बताया गया।

PETA इंडिया के कानूनी सलाहकार एवं क्रूरता प्रतिक्रिया निदेशक मीत अशर ने चिक्कमगलुरु पुलिस प्रशिक्षण स्कूल में पशु क्रूरता रोकने पर कार्यशाला आयोजित की।

हाल ही में पहली बार राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने देश में पशुओं के साथ क्रूरता के मामलों का रिकॉर्ड तैयार किया। इसके अनुसार, वर्ष 2024 में 9,039 मामले दर्ज किए गए और 10,312 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

2021 में फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशन्स की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि उससे पहले के 10 वर्षों में करीब 5 लाख पशु अपराधों के शिकार हुए थे।

कई हिंसक अपराधियों का पशुओं के साथ क्रूरता करने का इतिहास रहा है। एक अध्ययन के अनुसार, पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले लोगों के अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है, जिनमें हत्या, बलात्कार, लूट, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीली दवाओं का दुरुपयोग शामिल हैं।

यह पहल PETA इंडिया के उन लगातार प्रयासों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य कानून लागू करने वाले अधिकारियों को पशु क्रूरता के प्रति संवेदनशील बनाना और पूरे भारत में पशु अधिकार कार्यकर्ताओं को सशक्त करना है, ताकि पशुओं के खिलाफ अपराधों को गंभीरता से लिया जाए। इससे पहले PETA इंडिया ने ग्वालियर में सीमा सुरक्षा बल, छत्तीसगढ़ पुलिस, गोवा पुलिस और गोवा पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाओं, सिक्किम पुलिस, पुणे सिटी पुलिस, नागपुर सिटी पुलिस, मीरा-भायंदर और वसई-विरार पुलिस, बेलगावी जिला पुलिस, हुबली-धारवाड़ जिला पुलिस, बेंगलुरु सिटी पुलिस तथा जम्मू, कठुआ और सांबा जिला पुलिस के साथ भी ऐसी जागरूकता कार्यशालाएँ आयोजित की हैं।

PETA इंडिया लंबे समय से पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 को मजबूत करने की मांग करता रहा है। इस कानून में सज़ा के प्रावधान काफी पुराने और अपर्याप्त हैं। उदाहरण के लिए, पहली बार दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर अधिकतम 50 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है, जबकि BNS, 2023 और WPA, 1972 में अधिक कड़ी सज़ाओं का प्रावधान है। PETA इंडिया ने केंद्र सरकार को भेजे गए एक प्रस्ताव में पशु क्रूरता के लिए सज़ा में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की सिफारिश की है।

पशु क्रूरता के खिलाफ सख्त सज़ा की मांग करें।

पशुओं के साथ क्रूरता की हमेशा रिपोर्ट करें।