PETA इंडिया की शिकायत के बाद तिरुपति वन विभाग ने भविष्यवक्ता द्वारा कैद में रखे गए तीन तोतों को बचाया, दोषियों पर जुर्माना लगाया गया।

Posted on by Surjeet Singh

PETA इंडिया की शिकायत के बाद तिरुपति वन विभाग ने अप्पलायगुंटा मंदिर के पास भविष्यवक्ताओं द्वारा अवैध रूप से पिंजरे में रखे गए तीन तोतों को बचाया। वन अधिकारियों ने दोषियों पर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत कार्रवाई करते हुए जुर्माना भी लगाया।

22 अगस्त को PETA इंडिया के एक कर्मचारी ने मंदिर जाने वाली सड़क पर तीन भविष्यवक्ताओं को देखा, जिनमें से प्रत्येक ने एक तोते को छोटे पिंजरे में कैद कर रखा था और उसका इस्तेमाल भविष्य बताने के लिए कर रहा था। PETA इंडिया की शिकायत मिलने के बाद वन अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे, तीनों लोगों को पकड़ा और तोतों को बचा लिया। अधिकारियों ने उन्हें संरक्षित वन्यजीवों को पकड़ने और कैद करने के कानूनी परिणामों के बारे में भी चेतावनी दी।

हम तिरुपति वन विभाग और आंध्र प्रदेश वन विभाग के अधिकारियों, विशेष रूप से तिरुपति के मंडल वन अधिकारी श्री वी. साईबाबा, IFS और वन अनुभाग अधिकारी श्री शंकरप्पा के त्वरित कार्रवाई के लिए आभारी हैं।

दोषियों पर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 54 के तहत 4,500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। बचाए गए तोते फिलहाल तिरुपति वन विभाग की देखरेख में हैं, जहाँ उनकी निगरानी और स्वास्थ्य जांच की जा रही है। इसके बाद उन्हें जंगल में छोड़ने पर विचार किया जाएगा।

अवैध पक्षी व्यापार में अनगिनत पक्षियों को उनके परिवारों से अलग कर दिया जाता है और उन्हें पालतू जानवरों के रूप में बेचने या झूठे भविष्यवक्ताओं द्वारा इस्तेमाल करने के लिए पिंजरों में कैद कर दिया जाता है। कई बार छोटे पक्षियों को उनके घोंसलों से उठा लिया जाता है, जबकि दूसरे पक्षी जाल या फंदों में फंसकर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या मर जाते हैं। पकड़े गए पक्षियों को छोटे डिब्बों में भरकर ले जाया जाता है और अनुमान है कि करीब 60% पक्षी टूटे पंखों-पैरों, प्यास या डर के कारण रास्ते में ही मर जाते हैं। जो बच जाते हैं, उन्हें भी कैद में कुपोषण, अकेलेपन, तनाव और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। घरों और भविष्यवक्ताओं के पास रखे गए पक्षियों को अक्सर सही भोजन नहीं मिलता और वे कुपोषित हो जाते हैं।

पक्षियों को पिंजरों में कैद करने पर रोक लगाने में मदद करें।