PETA इंडिया की शिकायत के बाद छत्रपति संभाजीनगर में भैंसों की लड़ाई के आयोजन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

Posted on by Surjeet Singh

एक चिंतित नागरिक से छत्रपति संभाजीनगर के देवलाई गांव में आयोजित भैंसों की अवैध लड़ाई के एक कार्यक्रम की सूचना मिलने के बाद, PETA इंडिया ने छत्रपति संभाजीनगर पुलिस के साथ मिलकर इस गैरकानूनी आयोजन के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करवाने में मदद की।

PETA इंडिया ने इस अवैध आयोजन के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए विस्तृत शिकायत दर्ज कराई और छत्रपति संभाजीनगर के पुलिस अधीक्षक के संपर्क किया ताकि स्वतः संज्ञान (Suo Moto) के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जा सके। इसके परिणामस्वरूप, आयोजकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 62 के साथ पढ़ी जाने वाली धाराओं 325, 125, 291 और 3(5); पशु क्रूरता निवारण (PCA) अधिनियम, 1960 की धाराओं 11(1)(a), 11(1)(m), 11(1)(n) और 11(1)(I); तथा महाराष्ट्र जुआ प्रतिषेध अधिनियम, 1887 की धारा 12(a) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960, पशुओं को एक-दूसरे से लड़ने के लिए उकसाने पर रोक लगाता है। वर्ष 2014 में एक ऐतिहासिक फैसले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं PETA इंडिया और सरकारी सलाहकार संस्था भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि मनोरंजन के लिए आयोजित भैंसों की लड़ाई, कुत्तों की लड़ाई और पशुओं के बीच किसी भी तरह की अन्य लड़ाइयाँ, जिनमें मनुष्यों और अन्य पशुओं के बीच कराई जाने वाली लड़ाइयाँ भी शामिल हैं, समाप्त होनी चाहिए।

भैंसों की लड़ाई में दो भैंसों को एक-दूसरे के सामने हिंसक और खूनी संघर्ष के लिए खड़ा किया जाता है। उन्हें मारा पीटा जाता है और उन्हें तब तक लड़ने के लिए उकसाया जाता है, जब तक कि उनमें से एक को विजेता घोषित नहीं कर दिया जाता। ऐसे आयोजनों में अक्सर जुआ भी खेला जाता है। इन तमाशों के कारण पशुओं को गंभीर शारीरिक और मानसिक नुकसान होता है, जिसमें हड्डियाँ टूटना, शरीर पर गहरे घाव होना और अत्यधिक तनाव शामिल हैं।

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