PETA इंडिया की शिकायत के बाद बिलासपुर वन प्रभाग ने पिंजरे में कैद चार तोतों को कराया आज़ाद
एक नागरिक ने सूचना दी कि बिलासपुर के मेन मार्केट के पास एक घर में चार रोज़-रिंग्ड पैराकीट (तोतों) को अवैध रूप से बेहद छोटे पिंजरे में दयनीय परिस्थितियों में कैद करके रखा गया है। इस शिकायत के बाद PETA इंडिया ने बिलासपुर वन प्रभाग के साथ मिलकर इन पक्षियों को बचाने के लिए कार्रवाई की। मौके पर पहुँचे वन अधिकारियों ने घर की जांच की, जहाँ उन्हें चार पैराकीट मिले, जिन्हें तुरंत अपने कब्जे में ले लिया गया।
बचाव के बाद पक्षियों का पशु चिकित्सक द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। चिकित्सक द्वारा उन्हें स्वस्थ घोषित किए जाने के बाद उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया। रोज़-रिंग्ड पैराकीट वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-II के तहत संरक्षित प्रजाति है। इस प्रजाति के पक्षियों को खरीदना, बेचना या अपने पास रखना कानूनन अपराध है, जिसके लिए 1 लाख रुपये तक का जुर्माना, 3 वर्ष तक की कैद या दोनों हो सकते हैं।
अवैध पक्षी व्यापार में अनगिनत पक्षियों को उनके परिवारों से अलग कर दिया जाता है और उनसे उनका प्राकृतिक जीवन छीन लिया जाता है, ताकि उन्हें पालतू पक्षियों के रूप में बेचा जा सके या तथाकथित भविष्यवाणी करने के लिए इस्तेमाल किया जा सके। पक्षियों के छोटे बच्चों (चूजों) को अक्सर उनके घोंसलों से उठा लिया जाता है, जबकि कई पक्षी जाल में फँस जाते हैं। बच निकलने की कोशिश में वे गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या उनकी मृत्यु हो जाती है। पकड़े गए पक्षियों को छोटे-छोटे डिब्बों में ठूंसकर ले जाया जाता है और अनुमान है कि लगभग 60 प्रतिशत पक्षी रास्ते में ही पंख या पैर टूटने, प्यास या अत्यधिक डर के कारण मर जाते हैं। जो पक्षी जीवित बचते हैं, उन्हें कैद में कुपोषण, अकेलेपन, तनाव और अवसाद से भरा जीवन बिताना पड़ता है।
PETA इंडिया, जिसका संदेश है कि “पशु हमारे मनोरंजन या किसी भी अन्य प्रकार के शोषण के लिए नहीं हैं,” यह याद दिलाता है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत भारत के देशी पक्षियों को पकड़ना, पिंजरे में रखना या उनका व्यापार करना प्रतिबंधित है। इस कानून का उल्लंघन करने पर जुर्माना, कारावास या दोनों हो सकते हैं। इसके अलावा, पक्षियों को पिंजरे में कैद रखना पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 का भी उल्लंघन है। यह कानून किसी भी पशु को ऐसे पिंजरे या स्थान में बंद रखने की अनुमति नहीं देता, जहाँ उसे पर्याप्त रूप से हिलने-डुलने का अवसर न मिले। उड़ने वाले पक्षियों के लिए इसका अर्थ है कि उन्हें उड़ने की पर्याप्त स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
