ईद से पहले बदायूं में ऊंट को अवैध कुर्बानी से बचाया गया, PETA इंडिया और पीपल फॉर एनिमल्स पब्लिक पॉलिसी फाउंडेशन की संयुक्त पहल से हुआ रेस्क्यू

Posted on by Surjeet Singh

ईद से पहले एक ऊंट को कथित तौर पर कुर्बानी के लिए बेचे जाने की सूचना मिलने पर पीपल फॉर एनिमल्स पब्लिक पॉलिसी फाउंडेशन (PFA PPF) की सुरभि त्रिपाठी ने तुरंत पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया, बदायूं पुलिस और जिला प्रशासन को जानकारी दी। इसके बाद PETA इंडिया, सुश्री त्रिपाठी, बदायूं पुलिस और जिला प्रशासन ने तेजी से संयुक्त कार्रवाई की। जिला मजिस्ट्रेट श्री अवनीश राय, IAS के निर्देश पर कुर्बानी होने से पहले ही ऊंट को सुरक्षित बचा लिया गया। बाद में उसे एक विश्वसनीय पशु आश्रय स्थल भेज दिया गया, जहां अब उसे जीवनभर देखभाल, पुनर्वास और सुरक्षित माहौल मिलेगा। हम बदायूं जिला प्रशासन और पुलिस, खासतौर पर जिला मजिस्ट्रेट श्री अवनीश राय, IAS की सराहना करते हैं, जिन्होंने यह कार्यवाई करके साफ संदेश दिया है कि पशुओं के प्रति क्रूरता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (फूड प्रोडक्ट्स स्टैंडर्ड्स एंड फूड एडिटिव्स) रेगुलेशंस, 2011 के मुताबिक मांस के लिए केवल भेड़, सूअर, गौवंश, बकरी, पोल्ट्री, मछली और खरगोशों को ही मारे जाने की अनुमति है। ऊंट इस सूची में शामिल नहीं हैं। इसके अलावा, प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (स्लॉटर हाउस) रूल्स, 2001 और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लाइसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ फूड बिजनेस) रेगुलेशंस, 2011 के तहत भोजन के लिए पशुओं का वध केवल पंजीकृत या लाइसेंस प्राप्त बूचड़खानों में ही किया जा सकता है। इन बूचड़खानों में पशुओं को मारने से पहले उन्हें बेहोश करने के लिए प्रजाति-विशिष्ट स्टनिंग व्यवस्था होना अनिवार्य है।

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