संरक्षित प्रजाति के कई वन्यजीवों के शिकार वाले वायरल वीडियो पर PETA इंडिया की शिकायत के बाद खूंटी में वन अपराध रिपोर्ट दर्ज
इंस्टाग्राम अकाउंट– __baccha___07 – पर प्रकाशित परेशान करने वाले कई वीडियो की जानकारी मिलने के बाद, जिनमें एक व्यक्ति को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम (WPA), 1972 की अनुसूची I और II के तहत संरक्षित कई जंगली पशुओं का शिकार करते, उन्हें मारते और उनका मांस खाते हुए दिखाया गया है, PETA इंडिया ने खूंटी पुलिस के साथ मिलकर आरोपी की पहचान कर उसे पकड़ने में सहायता की और झारखंड वन विभाग के खूंटी वन प्रभाग के साथ मिलकर उसके खिलाफ एक वन अपराध रिपोर्ट (FOR) दर्ज करवाई।
इन भयावह वीडियो में आरोपी को जंगली पशुओं को पकड़ते, उन्हें मारते और उनकी खाल उतारते हुए, तथा सोशल मीडिया पर लाइक्स पाने के लिए उनका मांस पकाकर खाते हुए देखा गया है। शिकार किए गए कई पशु वनयजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची I के तहत संरक्षित प्रजातियाँ थीं, जिनमें रसेल वाइपर और भारतीय अजगर शामिल हैं, साथ ही अनुसूची II के तहत संरक्षित प्रजातियाँ, जिनमें कॉमन क्रेट और येलो-फुटेड ग्रीन पिजन शामिल हैं।
PETA इंडिया द्वारा प्रस्तुत शिकायत के बाद, खूंटी वन प्रभाग ने आरोपी लुतार पुर्ती के खिलाफ WPA की धारा 9 और 51 के तहत FOR दर्ज की। अनुसूची I के तहत संरक्षित प्रजातियों से जुड़े अपराधों के लिए कम से कम तीन वर्ष की सजा होती है, जो सात वर्ष तक बढ़ सकती है, और कम से कम ₹25,000 का जुर्माना लगाया जा सकता है; जबकि अनुसूची II के तहत संरक्षित प्रजातियों से जुड़े अपराधों के लिए तीन वर्ष तक की सजा, या ₹1 लाख तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
जेल की सजा के अलावा, PETA इंडिया सिफारिश करता है कि पशु अत्याचार करने वालों का मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन कराया जाए और उन्हें परामर्श दिया जाए, क्योंकि पशुओं के साथ दुर्व्यवहार गहरे मनोवैज्ञानिक विकार का संकेत है। शोध से पता चलता है कि जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता करते हैं, वे अक्सर बार-बार अपराध करने वाले होते हैं और आगे चलकर अन्य पशुओं, यहां तक कि मनुष्यों को भी नुकसान पहुँचाते हैं। फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है, “जो लोग पशुओं के प्रति क्रूरता में संलग्न होते हैं, उनके अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है, जिनमें हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीले पदार्थों का दुरुपयोग शामिल है।”
