अनीता डोंगरे फाउंडेशन और PETA इंडिया ने केरल के पुन्नक्कापरम्बिल श्री भद्रकाली विष्णुमाया मंदिर को असली हाथी के आकार का मेकेनिकल हाथी भेंट किया
प्रसिद्ध डिजाइनर अनीता डोंगरे द्वारा स्थापित अनीता डोंगरे फाउंडेशन, जो चमड़ा और ऊन-मुक्त, पशु-अनुकूल फैशन को बढ़ावा देता है, ने PETA इंडिया के साथ मिलकर त्रिशूर जिले के पुन्नक्कापरम्बिल श्री भद्रकाली विष्णुमाया मंदिर को असली हाथी के आकार का मेकेनिकल हाथी “पुन्नक्कापरम्बिल महादेवन” भेंट किया है।
मलयालम नववर्ष विषु की पूर्व संध्या पर, संथिगिरि आश्रम, त्रिशूर के स्वामी मधुरनाथन जनतपस्वी ने श्री पी.के. परमेश्वरन, सचिव, पुन्नक्कापरम्बिल श्री भद्रकाली विष्णुमाया मंदिर; श्री पी.डी. दिनेश, सचिव, पुन्नक्कापरम्बिल कार्त्यानी मेमोरियल ट्रस्ट; मंदिर के अधिकारियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पुन्नक्कापरम्बिल महादेवन का अनावरण किया। इस अद्भुत संरचना का उपयोग मंदिर के सभी क्रियाकलापों एवं अनुष्ठानों को सुरक्षित और बिना क्रूरता के तरीके से करने के लिए किया जाएगा, जिससे असली हाथी अपने परिवारों के साथ जंगल में रह सकें।
यह पहल PETA इंडिया द्वारा मंदिर के उस करुणामय निर्णय के सम्मान में संभव हुई, जिसमें उन्होंने कभी भी जीवित हाथियों को न रखने या किराए पर न लेने का संकल्प लिया है। यह नया मेकेनिकल हाथी, पुन्नक्कापरम्बिल महादेवन, केरल में PETA इंडिया द्वारा उपलब्ध कराए गए 14वां मेकेनिकल हाथी है। इस जोड़ के साथ, PETA इंडिया अब पूरे देश में 25 मेकेनिकल हाथी दान कर चुका है। इस मेकेनिकल हाथी का स्वागत उद्घाटन समारोह और ढोलवादकों के एक समूह द्वारा संगीत प्रस्तुति के साथ किया गया।
“पुन्नक्कापरम्बिल श्री भद्रकाली विष्णुमाया मंदिर के साथ काम करना बेहद संतोषजनक है, जो अपनी परंपराओं का सम्मान करते हुए सभी संवेदनशील जीवों के प्रति करुणा को केंद्र में रखता है। हाथी, जो हाउस ऑफ अनीता डोंगरे का प्रतीक भी है, इस सोच को दर्शाता है, यह शांत, बुद्धिमान, सामाजिक होता है और परिवार व समुदाय को महत्व देता है। हमारा कार्य हमेशा प्रकृति के साथ सामंजस्य में सृजन करना और PETA इंडिया जैसे संगठनों के साथ मिलकर प्राकृतिक दुनिया के प्रति अधिक जागरूक और करुणामय संबंध को बढ़ावा देना रहा है।”- अनीता डोंगरे
“यह पहल हमारे ब्रांड की मूल भावना को दर्शाती है। हमें खुशी है कि पुन्नक्कापरम्बिल महादेवन पवित्र अनुष्ठानों को जारी रखने में मदद करेगा, साथ ही असली हाथियों को उनके परिवारों के साथ जंगल में सुरक्षित रहने का अवसर देगा और मंदिर के श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा।” – मुकेश सलवानी, निदेशक, अनीता डोंगरे फाउंडेशन
“हमने यह कदम अपनी परंपराओं के प्रति गहरे सम्मान और करुणा व सुरक्षा के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता के साथ उठाया है। यह मेकेनिकल हाथी हमें बिना किसी जीवित प्राणी को तनाव, कैद या खतरे में डाले हमारे अनुष्ठानों की भव्यता और प्रतीकात्मकता को बनाए रखने की अनुमति देता है। यह हमारे श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है, क्योंकि उत्सव बिना जीवित हाथियों से जुड़ी अनिश्चितता के आयोजित किए जा सकते हैं। इस बदलाव को अपनाकर हम यह दिखाना चाहते हैं कि भक्ति समय के साथ बदल सकती है और सच्ची आस्था सभी जीवों के प्रति दया और जिम्मेदारी में दिखाई देती है।”
-श्री पी.के. परमेश्वरन, सचिव, न्नक्कापरम्बिल श्री भद्रकाली विष्णुमाया मंदिर
हाथी बुद्धिमान, सक्रिय और सामाजिक जंगली पशु होते हैं। कैद में, उन्हें जुलूसों में उपयोग के लिए मार-पीट, हथियारों के प्रयोग और बल के जरिए प्रशिक्षित किया जाता है। मंदिरों और अन्य स्थानों पर कैद में रखे गए अधिकांश हाथी लंबे समय तक कंक्रीट पर जंजीरों से बंधे रहने के कारण गंभीर पैरों की समस्याओं और घावों से पीड़ित होते हैं। उन्हें पर्याप्त भोजन, पानी, पशु-चिकित्सा देखभाल और प्राकृतिक जीवन जैसी किसी भी सुविधा से वंचित रखा जाता है। इन अत्यंत खराब परिस्थितियों में, कई हाथी अत्यधिक तनावग्रस्त हो जाते हैं और आक्रामक व्यवहार करते हैं, जिससे कभी-कभी महावतों या अन्य मनुष्यों या पशुओं की जान भी चली जाती है। हेरिटेज एनिमल टास्क फोर्स द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, केरल में 15 वर्षों की अवधि में कैद में रखे गए हाथियों ने 526 लोगों की जान ली। थेचिक्कोट्टुकावु रामचंद्रन, जो लगभग 40 वर्षों से कैद में है और केरल के उत्सवों में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले हाथियों में से एक है, ने कथित रूप से 13 व्यक्तियों, छह महावत, चार महिलाएं और तीन हाथियों की जान ली है।
मेकेनिकल हाथी 3 मीटर ऊँचे और 500 किलोग्राम वजन के होते हैं। इन्हें रबर, फाइबर, धातु, जाली, फोम और स्टील से बनाया जाता है और ये पाँच मोटरों से चलते हैं। एक मेकेनिकल हाथी देखने, महसूस करने और उपयोग में असली हाथी जैसा होता है। यह अपना सिर हिला सकता है, कान और आँखें हिला सकता है, पूंछ हिला सकता है, सूंड उठा सकता है और पानी भी छिड़क सकता है। इस पर चढ़ा जा सकता है और इसकी पीठ पर सीट लगाई जा सकती है। इसे केवल बिजली से जोड़कर आसानी से चलाया जा सकता है। हाथी को जिस बेस पर खड़ा किया जाता है वह उसमे पहिये लगे रहते हैं जिसे सड़कों पर चला कर एक जगह से दूसरी जगह एवं अनुष्ठानों और जुलूसों के लिए आसानी से इधर-उधर ले जाया जा सकता है।
क्या आप भी प्रेरित महसूस कर रहे हैं। आप भी पीड़ा सह रहे हाथियों की मदद कर सकते हैं






