कोलकाता: भूखी और बेसहारा, मैदान से बचाई गई युवा घोड़ी की आपात इलाज के बावजूद मौत, PETA इंडिया द्वारा FIR दर्ज
कोलकाता के मैदान इलाके में विक्टोरिया मेमोरियल के पास से एक भूखी और बेहोश हालत में मिली युवा घोड़ी को PETA इंडिया ने बचाया, जिसके बाद उसके अज्ञात मालिक के खिलाफ मैदान थाना में FIR दर्ज की गई। इलाके के छात्रों ने PETA इंडिया से संपर्क कर बताया कि एक घोड़ी की पसलियाँ साफ दिखाई दे रही थीं, उसके शरीर पर घाव थे और वह लंबे समय से दर्द के कारण खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। पशु चिकित्सकों की जाँच में घोड़ी का बॉडी कंडीशन स्कोर 1 पाया गया, जो अत्यधिक भूख, लंबे समय से की गई उपेक्षा, और भोजन, पानी, इलाज व बुनियादी देखभाल की कमी को दर्शाता है।
सिर्फ तीन साल की उम्र में ही यह घोड़ी गंभीर गठिया, गहरे खुर के ज़ख्म, संक्रमित घावों और चलने-फिरने में परेशानी से जूझ रही थी, जिससे वह हमेशा के लिए काम करने लायक नहीं रह गई थी। सभी जरूरी इलाज, पौष्टिक भोजन और होस्पिस देखभाल मिलने के बावजूद, वह लंबे समय की उपेक्षा के कारण जीवित नहीं रह सकी और उसकी मौत हो गई।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 125, 291 और 62 के साथ धारा 325 के तहत FIR दर्ज की गई। ये धाराएँ पशुओं के प्रति लापरवाह व्यवहार, जिससे मानव जीवन को खतरा हो सकता है या गंभीर नुकसान की आशंका हो, और अत्यधिक भूख व लंबे समय की उपेक्षा के ज़रिये पशु को अपंग या मारने की कोशिश से संबंधित हैं। इसी उपेक्षा के कारण घोड़ी को गंभीर घाव और तेज़ गठिया हो गया था। इस केस में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA), 1960 की कई धाराएँ भी लागू की गईं, जिनमें धारा 3, 11(1)(a), 11(1)(f) और 11(1)(h) शामिल हैं। ये धाराएँ देखभाल के कर्तव्य की अनदेखी, पशु को अनुचित रूप से बाँधकर रखना, और उसे पर्याप्त भोजन, पानी और आश्रय न देने से संबंधित हैं। इसके अलावा, साझा इरादे से अपराध करने के लिए BNS की धारा 3(5) भी लागू की गई।
PETA इंडिया लंबे समय से पर्यटकों की गाड़ियाँ खींचने वाले घोड़ों के मामलों में हस्तक्षेप करता आ रहा है, जो सड़कों पर गिर जाते हैं, बेहद खराब हालत में पाए जाते हैं या बाद में छोड़ दिए जाते हैं। विक्टोरिया मेमोरियल क्षेत्र में जहाँ पर्यटकों के लिए घुड़सवारी और घोड़ा-गाड़ी चलाई जाती है कई घोड़े खून की कमी, कुपोषण, अत्यधिक काम और कठोर सड़कों पर लगातार इस्तेमाल के कारण चलने में असमर्थ पाए गए हैं। PETA इंडिया और केप फाउंडेशन द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, 2024–2025 में कोलकाता में इसी तरह की क्रूरता और उपेक्षा के कारण 12 घोड़ों की मौत हो गई या वे गंभीर रूप से घायल पाए गए। PETA इंडिया को यह भी जानकारी मिली है कि पश्चिम बंगाल की कई कंपनियों ने कोलकाता में घोड़ों की जगह ई-कैरेज (इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ) चलाने की पेशकश की है।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मैदान और कोलकाता के अन्य इलाकों में खराब स्वास्थ्य के कारण घोड़ों के गिरने की घटनाओं को गंभीरता से लिया है। अदालत ने यह भी कहा कि शहर में बिना लाइसेंस वाली घोड़ा-गाड़ियों की संख्या अधिक है और बीमार व काम के लायक न रहे घोड़ों को उनके मालिक अक्सर छोड़ देते हैं, जिससे यातायात में खतरा पैदा होता है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह घोड़ा मालिकों के पुनर्वास और वैकल्पिक रोज़गार के लिए एक योजना तैयार करे, ताकि “मुंबई की तरह घोड़ा-गाड़ियों को खत्म करने की संभावना पर विचार किया जा सके।” मुंबई में, बॉम्बे हाई कोर्ट में PETA इंडिया के प्रयासों के बाद, पर्यटकों के लिए चलने वाली घोड़ा-गाड़ियों की जगह विरासत शैली की ई-कैरेज लाई गईं, जिसे पहले घोड़ा मालिकों ने भी प्राथमिकता दी।
