PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद, मुंबई के कांदिवली पूर्व क्षेत्र में मादा कुत्ते के बलात्कार मामले में एफआईआर दर्ज

Posted on by Surjeet Singh

कांदिवली पूर्व में सामुदायिक पशु देखभालकर्ता अंकिता काले से एक मादा कुत्ते के यौन उत्पीड़न की सूचना मिलने पर पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) द्वारा समता नगर पुलिस स्टेशन के साथ समन्वय स्थापित कर प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई गई। अंकिता काले के बयान के आधार पर, आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम(PCA) 1960 की धारा 11(1)(a) और (1) के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

आरोपी को 1 फ़रवरी की रात लगभग 11:45 बजे एक नाली के अंदर एक मादा कुत्ते के साथ पाया गया। जब अंकिता काले और अन्य स्थानीय निवासियों को कुछ संदिग्ध लगा, तो उन्होंने तुरंत फायर ब्रिगेड और पुलिस को बुलाया। फायर ब्रिगेड ने आरोपी और कुत्ते दोनों को नाली से बाहर निकाला। आरोपी के चेहरे पर खून था, लेकिन उसके शरीर पर कोई स्पष्ट चोट नहीं दिख रही थी। इसी दौरान अंकिता काले ने देखा कि मादा कुत्ता बेहद डरी हुई और कांप रही थी। उसकी हालत देखकर उन्होंने कुत्ते की पूंछ उठाई और पाया कि उसकी योनि से खून और वीर्य जैसा तरल पदार्थ निकल रहा था। इसके बाद कुत्ते को परेल स्थित बॉम्बे वेटरिनरी कॉलेज ले जाया गया, जहाँ उसका वेटरोलीगल परीक्षण किया गया। वर्तमान में मादा कुत्ता एक निजी पशु चिकित्सालय में भर्ती है और विशेषज्ञ देखरेख में है, क्योंकि वह अत्यधिक आघातग्रस्त है, लगातार कांप रही है, खाना नहीं खा रही और ना ही इधर-उधर घूम रही है।

2021 में, फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइजेशन्स (FIAPO) द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह सामने आया था कि विगत दशक में लगभग 5 लाख पशु, जिनमें गायें और कुत्ते भी शामिल हैं, अपराधों के शिकार बनें और कई को यौन हिंसा का सामना करना पड़ा। इससे पहले, वॉइस ऑफ़ स्ट्रे डॉग्स की एक रिपोर्ट ने यह आँकलन किया था कि पशुओं के साथ यौन शोषण की घटनाएँ अक्सर दर्ज नहीं होतीं, लेकिन इनकी दर मानव बलात्कार मामलों के समान ही होने की संभावना है।

पशुओं पर अत्याचार, एक गहरी मानसिक विकृति का संकेत देता है। मनोविज्ञान और अपराधशास्त्र के शोध बताते हैं कि पशुओं पर क्रूरता करने वाले लोग अक्सर यहीं नहीं रुकते बल्कि कई आगे चलकर मनुष्यों को नुकसान पहुँचाते हैं। यूएस फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने पाया है कि पशुओं के साथ क्रूरता, सीरियल बलात्कारियों और हत्यारों के रिकॉर्ड में नियमित रूप से पाया जाने वाला लक्षण है।

PETA इंडिया का कहना है कि कई हिंसक अपराधियों का, पशुओं के प्रति क्रूरता करने का इतिहास रहा है। जर्नल ऑफ इमोशनल एब्यूज़ में  प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जिन 71% महिलाओं के पास पालतू पशु थे और जिन्होंने सुरक्षित आश्रय गृह में शरण ली, उन्होंने पुष्टि की कि उनके साथी ने उन पशुओं को धमकाया, घायल किया या मार डाला था। वहीं फॉरेंसिक रिसर्च एंड क्रिमिनोलॉजी इंटरनेशनल जर्नल  में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया, “जो लोग पशुओं पर क्रूरता करते हैं, उनमें हत्या, बलात्कार, लूट, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीली दवाओं/मादक पदार्थों के दुरुपयोग जैसे अपराध करने की संभावना [तीन] गुना अधिक होती हैं।” इस अध्ययन ने यह भी संकेत दिया कि पशुओं के प्रति क्रूरता के पीछे गुस्सा, मनोरंजन, नियंत्रण, भय, उपहास, प्रतिशोध, अनुकरण और यौन सुख जैसे प्रमुख कारण होते हैं।

PETA इंडिया लगातार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी से आग्रह कर रहा है कि भारत न्याय संहिता (BNS) में संशोधन कर पशुओं के यौन शोषण को विशेष रूप से दंडनीय अपराध बनाया जाए। भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 377 के तहत पशुओं के साथ यौन हिंसा को अपराध माना गया था, किन्तु वर्तमान BNS में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है जो पशुओं को समान सुरक्षा प्रदान करे। IPC की धारा 377 के अनुसार पशु के साथ बलात्कार एक गैर-जमानती अपराध था और इसके लिए (आजीवन कारावास), या अधिकतम दस वर्ष तक का कारावास, तथा जुर्माने का प्रावधान था।

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