ग्वालियर में पीड़ित घोड़े का रेस्क्यू
क्लार्क्स इन सूट्स, ग्वालियर के पास एक अस्वस्थ घोड़े को, जिसमें स्पष्ट रूप से ऑस्टियोआर्थराइटिस (जोड़ों के दर्द की गंभीर बीमारी) के लक्षण दिखाई दे रहे थे, शादी की बग्गी खींचने के लिए मजबूर किए जाने के वीडियो मिलने के बाद, PETA इंडिया ने घोड़े को बचाने के लिए माधवगंज पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। घोड़े की चिकित्सकीय जांच में यह सामने आया कि वह एक स्थायी और अत्यंत दर्दनाक बीमारी से पीड़ित है। पुलिस की कार्रवाई के बाद, मालिक ने स्वेच्छा से घोड़े को PETA इंडिया को सौंप दिया, जिसके बाद उसे सुरक्षित रूप से एक प्रतिष्ठित सैंक्चुअरी में स्थायी पुनर्वास और देखभाल के लिए भेज दिया गया।
घोड़े की गंभीर चिकित्सकीय स्थिति से भलीभाँति अवगत होने के बावजूद मालिक उसे काम करने के लिए मजबूर करता रहा। यह भी सामने आया कि मालिक ने घोड़े पर ‘फायरिंग’ की प्रक्रिया लागू की थी यह एक पुरानी और क्रूर प्रथा है, जिसमें लंगड़ापन या आर्थराइटिस के इलाज के गलत विश्वास के तहत घोड़े के जोड़ों को गरम लोहे या रसायनों से जलाया जाता है। आधुनिक पशु चिकित्सा विज्ञान ने सिद्ध किया है कि फायरिंग का कोई चिकित्सकीय लाभ नहीं होता; बल्कि यह अत्यधिक दर्द, जलन, संक्रमण और स्थायी क्षति का कारण बनती है। यह प्रक्रिया घोड़े के दोनों पिछले पैरों के जोड़ों पर की गई थी, जिससे उसका दर्द और पीड़ा और बढ़ गई।
PETA इंडिया ग्वालियर पुलिस की आभारी है, विशेष रूप से श्री अरविंद सक्सेना, IPS, पुलिस महानिरीक्षक, ग्वालियर रेंज, जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि घोड़े को पीड़ा और शोषण से भरे जीवन से मुक्त कराया जा सके।
कठोर सड़कों पर घोड़ों से काम करवाने से अक्सर उनमें ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी दर्दनाक और अपरिवर्तनीय स्थितियाँ पैदा हो जाती हैं। PETA इंडिया शादियों के लिए घोड़ों की बजाय लग्ज़री कारों या अन्य गैर-पशु वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करता है।
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