कोल्हापुर: PETA इंडिया की शिकायत के बाद अवैध ग्रेहाउंड रेस (कुत्तों की दौड़) प्रतियोगिता रद्द

Posted on by Surjeet Singh

दिनांक 4 जनवरी 2026 को कोल्हापूर के सहारा चौक, मार्केट यार्ड, पेठ वडगांव में होने वाली कुत्तों की एक अवैध दौड़ की जानकारी मिलते ही, पीपल फ़ॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ़ एनिमल्स इंडिया (PETA India) ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कोल्हापुर पुलिस की मदद से इस अवैध दौड़ को सफलतापूर्वक रुकवा दिया। PETA इंडिया के अनुरोध पर, वडगांव पुलिस स्टेशन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 168 के तहत अवैध ग्रेहाउंड दौड़ (कुत्तों की अवैध दौड़) के आयोजकों को नोटिस जारी किया, ताकि गैरकानूनी गतिविधियों को रोका जा सके।कुत्तों को जबरन दौड़ में शामिल करना स्वभाविक रूप से ही क्रूर है, क्योंकि इससे उन्हें अक्सर गंभीर चोटें आती हैं और उनकी मौत तक हो जाती है। हम कोल्हापुर पुलिस, विशेष रूप से श्री योगेश कुमार आईपीएस, पुलिस अधीक्षक, कोल्हापुर; श्री अमोल ठाकुर, उप-विभागीय पुलिस अधिकारी, जयसिंगपुर; और श्री प्रमोद शिंदे, थाना प्रभारी, वडगांव पुलिस स्टेशन जी की सराहना करते हैं जिहोने तत्काल कानूनी कार्यवाई करते हुए कुत्तों को उत्पीड़न से बचाया।

इस तरह की दौड़ों में कुत्तों को बेहद खतरनाक तेज़ रफ्तार से दौड़ने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे उनके शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और अक्सर उन्हें गंभीर चोटें आती हैं या उनकी मौत हो जाती है। जब उनका उपयोग नहीं किया जाता, तो उन्हें आमतौर पर केनेल में बंद रखा जाता है और अपने ही मलमूत्र में खड़ा रहने को मजबूर किया जाता है। दौड़ में जो कुत्ते हार जाते हैं, उन्हें अक्सर कठोर अत्याचारों का सामना करना पड़ता है, जैसे उन्हें त्याग दिया जाता है या मार दिया जाना। ऐसे खेलों में में, जहाँ पशुओं को दौड़ने के लिए मजबूर किया जाता है, चोटें, अत्यधिक थकान और मानसिक आघात आम हैं, क्योंकि इनमें पशुओं के कल्याण से ज़्यादा जुए को प्राथमिकता दी जाती है।

अपनी शिकायत में, PETA इंडिया ने भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड (AWBI) द्वारा 4 अगस्त 2025 को जारी एक परामर्श का उल्लेख किया, जिसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजा गया था। इस परामर्श में AWBI ने स्पष्ट किया कि ग्रेहाउंड रेस (कुत्तों की दौड़) क्रूर भी है और अवैध भी। परामर्श में ज़ोर दिया गया कि ऐसी दौड़ें पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA), 1960 के तहत प्रतिबंधित हैं, और अधिकारियों से कानून तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया। साथ ही, अपने-अपने क्षेत्रों में ग्रेहाउंड रेसिंग और इससे जुड़ी गतिविधियों की जाँच कर उन्हें रोकने के निर्देश भी दिए गए।

PETA इंडिया की शिकायत में यह भी बताया गया कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA), 1960 के तहत पशुओं को अन्य पशुओं से लड़ाने के लिए उकसाना एक आपराधिक कृत्य है। 7 मई 2014 के ऐतिहासिक फैसले -एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ़ इंडिया बनाम ए. नागराजा एवं अन्य (सिविल अपील संख्या 5387/2014) में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पशु दौड़ जैसी गतिविधियाँ भी पशु लड़ाई के दायरे में आती हैं, क्योंकि इनमें पशुओं को प्रतिस्पर्धात्मक और हानिकारक परिस्थितियों में जबरन धकेला जाता है, जो लड़ाने के लिए उकसाने के समान है।

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