अभिनेत्री भूमि सतीश पेडनेकर और PETA इंडिया ने केरल के श्री सुब्रमणिया क्षेत्र योगम को असली हाथी के आकार का मैकेनिकल हाथी भेंट किया
प्रसिद्ध अभिनेत्री भूमि सतीश पेडनेकर और PETA इंडिया ने केरल के त्रिशूर ज़िले में स्थित सुब्रमणिया क्षेत्र योगम को असली हाथी के आकार का ‘चेरुकुन्नू कार्तिकेयन’ नामक एक मैकेनिकल हाथी भेंट किया है। आज केएमडी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री शिवास्वामी ने मंदिर के अध्यक्ष श्री सेतुमाधवन टी. सी., क्षेत्रम तंत्री श्री विजयन करुमात्रा, क्षेत्रम मेलशांति श्री शिवप्रसाद, मंदिर के सचिव श्री बोबिश वी. वी. तथा मंदिर के भक्तों एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति में चेरुकुन्नु कार्तिकेयन का अनावरण किया। अनावरण कार्यक्रम भारतीय जनता पार्टी के त्रिशूर ज़िला अध्यक्ष श्री ए. आर. श्रीकुमार के सहयोग से संपन्न हुआ और इस अवसर पर उन्होंने उद्घाटन भाषण से संबोधित भी किया। इस मैकेनिकल हाथी का उपयोग मंदिर में अनुष्ठानों को सुरक्षित और क्रूरता-मुक्त तरीके से संपन्न करने के लिए किया जाएगा, जिससे असली हाथियों को उनके परिवारों के साथ उनके जंगलों में रहने में मदद मिलेगी और पशुओं को पीड़ा से बचाया जा सकेगा।
PETA इंडिया द्वारा दिया गया यह हाथी मंदिर के उस करुणामय निर्णय का सम्मान है जिसके तहत मंदिर ने कभी भी जीवित हाथियों को रखने या किराये पर लेने का निर्णय नहीं लिया। यह मैकेनिकल हाथी ‘चेरुकुन्नू कार्तिकेयन’ PETA इंडिया द्वारा भारत के मंदिरों को भेंट किया गया अठारहवां यांत्रिक हाथी है। मैकेनिकल हाथी का स्वागत उद्घाटन समारोह और मेलम प्रस्तुति के साथ किया गया।
“मैं हमेशा से मानती आई हूं कि हर जीवित प्राणी या ईश्वर की बनाई हर रचना, स्वतंत्रता, प्रेम और देखभाल का अधिकार रखती है। सुब्रमणिया क्षेत्र योगम में मैकेनिकल हाथी चेरुकुन्नू कार्तिकेय का आगमन यह दर्शाता है कि कैसे परंपरा और तकनीक करुणा के साथ एकजुट हो सकती हैं, जिससे असली हाथियों को उनके प्राकृतिक घरों में स्वतंत्र रूप से रहने का अवसर मिलता है, ठीक वैसे ही जैसे वह उस आजादी के हकदार हैं” -अभिनेत्री भूमि सतीश पेडनेकर

PETA इंडिया द्वारा दान किए गए मैकेनिकल हाथी चेरुकुन्नु कार्तिकेयन और कोम्बारा कन्नन, साथ ही यांत्रिक हाथी पुथुवेलिल पद्मनाभन।
“मैकेनिकल हाथी उत्कृष्ट पहल है क्योंकि इससे असली पशुओं की रक्षा होती है, यह लोगों के लिए सुरक्षित हैं और लागत की दृष्टि से भी प्रभावी हैं। आज यहां उपस्थित होकर अभिनेत्री भूमि सतीश पेडनेकर और PETA इंडिया की इस पहल से जुड़कर मुझे बहुत खुशी हो रही है।” – श्री शिवास्वामी, केएमडी ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर
“मैकेनिकल हाथी चेरुकुन्नू कार्तिकेय को हमारे मंदिर में एक पवित्र योगदान के रूप में प्राप्त कर हम आभारी हैं। यह सार्थक उपहार हमें अपने अनुष्ठानों का सम्मान करते हुए पशुओं के प्रति करुणा सुनिश्चित करने में सक्षम बनाएगा। इस नवाचार को अपनाकर हम अपने अनुष्ठानों को भक्तों और पशुओं दोनों के लिए सुरक्षित तरीके से संपन्न कर सकेंगे।” – मंदिर के अध्यक्ष श्री सेतुमाधवन टी. सी.
हाथी बुद्धिमान, सक्रिय और सामाजिक जंगली पशु हैं। कैद में उन्हें जुलूसों में इस्तेमाल करने के लिए मारपीट, हथियारों और बल प्रयोग के ज़रिये प्रशिक्षित किया जाता है। मंदिरों और अन्य स्थानों पर कैद रखे गए अधिकांश हाथी घंटों तक कंक्रीट पर जंजीरों से बांधे जाने के कारण गंभीर पैरों की समस्याओं और टांगों के घावों से पीड़ित रहते हैं। अधिकतर को पर्याप्त भोजन, पानी, पशु-चिकित्सकीय देखभाल और प्राकृतिक जीवन की किसी भी झलक से वंचित रखा जाता है। इन अमानवीय परिस्थितियों में कई हाथी अत्यधिक तनाव और कुंठा का शिकार हो जाते हैं और हिंसक हो उठते हैं, जिससे कभी-कभी महावतों या अन्य मनुष्यों या पशुओं की जान चली जाती है। हेरिटेज एनिमल टास्क फोर्स द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, 15 वर्षों की अवधि में केरल में कैद हाथियों ने 526 लोगों की जान ली। थेचिक्कोट्टुकावु रामचंद्रन, जो लगभग 40 वर्षों से कैद में है और केरल के उत्सवों में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले हाथियों में से एक है, कथित तौर पर 13 व्यक्तियों की मौत का कारण बन चुका है जिसमें छह महावत, चार महिलाएं और तीन हाथी शामिल हैं।
मैकेनिकल हाथी 3 मीटर ऊंचे होते हैं और उनका वज़न लगभग 500 किलोग्राम होता है। इन्हें रबर, फाइबर, धातु, जाली, फोम और स्टील से बनाया जाता है और ये पांच मोटरों पर चलते हैं। मैकेनिकल हाथी देखने, महसूस करने और उपयोग करने में असली हाथी जैसे ही होते हैं। ये अपना सिर हिला सकते हैं, कान और आंखें हिला सकते हैं, पूंछ लहरा सकते हैं, सूंड उठा सकते हैं और यहां तक कि पानी का छिड़काव भी कर सकते हैं। इन्हें चढ़ा जा सकता है और पीठ पर बैठने के लिए सीट भी लगाई जा सकती है। इन्हें केवल बिजली से प्लग-इन कर आसानी से संचालित किया जा सकता है। इन्हें सड़कों पर ले जाया जा सकता है और ये पहियों वाले आधार पर लगाए जाते हैं, जिससे अनुष्ठानों और जुलूसों के लिए इन्हें आसानी से इधर-उधर ले जाया और धकेला जा सकता है।
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