जंजीरों में जकड़े हुए दर्जनों शोषित ‘हाथियों’ ने PETA इंडिया और गोशार्पनर के साथ मिलकर पशु अधिकार दिवस से पहले हाथी की सवारी समाप्त करने की अपील की
उत्तराखंड में राजाजी टाइगर रिजर्व और जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क ने सात साल के अंतराल के बाद हाथी की सवारी फिर से शुरू कर देने, और जयपुर के आमेर किले में हाथी की सवारी के विरोध में, PETA इंडिया और गोशार्पनर के दर्जनों समर्थकों ने ज्यामितीय शेप के हाथी मास्क पहने और जंजीरों में जकड़कर मंगलवार को जनता के सामने जंतर मंतर धरना स्थल पर हाथी की सवारी ना करने की अपील की। खूनी रंग से रंगे हाथों में ‘शोषण एवं यातना: हाथी सवारी को ना कहें‘ लिखे बोर्ड पकड़े, वे ‘मनोरंजन’ के लिए मजबूर किए जाने वाले हाथियों के साथ रोज़ होने वाली हिंसा का प्रतीक बनें।
छोटे हाथियों को उनके परिवारों से छीन कर अलग करना, उन्हें अपने आदेश मनवाने के लिए पीटना, यातनाएं देना, जंजीरों में बांधना और जीवनभर रोज़ाना पर्यटकों को उनकी पीठ पर सवारी करने के लिए मजबूर करना, अपार क्रूरता है। हाथी अत्यधिक बुद्धिमान और संवेदनशील प्राणी हैं, जो सवारी के लिए गुलाम बनाए जाने पर शारीरिक और मानसिक रूप से पीड़ित होते हैं।
सवारी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हाथियों को उनकी माताओं से अलग कर दिया जाता है और तब तक पीटा जाता है जब तक कि वे बात न मानने लगें। फिर उन्हें तेज़, हुक वाले अंकुश हथियारों से नियंत्रित किया जाता है, लंबे समय तक जंजीरों में बांधा जाता है, और अक्सर कठोर कंक्रीट के फर्श पर खड़ा रहने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे जीवनभर के पैरों और मांसपेशियों की समस्याएं जैसे गठिया उत्पन्न होती हैं। कई हाथी बिना इलाज के घाव, संक्रमण और गहरे मानसिक आघात झेलते हैं। घूमने, खाने, सामाजिक संबंध बनाने या अपने खुद के निर्णय लेने की क्षमता से वंचित रहकर, कई हाथियों में गंभीर तनावपूर्ण व्यवहार विकसित हो जाता है, जिसमें शरीर को लगातार आगे-पीछे हिलाना या सिर को गोल गोल घुमाना जैसे लक्षण शामिल हैं।
जयपुर में आमेर के किले पर सवारी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले हाथियों की स्थिति पर किए गए कई निरीक्षणों में देखा गया है कि उनके पालन एवं रखरखाव में पशु-रक्षा कानूनों का उल्लंघन करते हुए उन पर अत्यंत क्रूरता की जा रही है। निरीक्षकों ने पाया कि आंशिक रूप से अंधे हाथियों से जबरन पर्यटकों की सवारी कराई जा रही है, तेज कांटेदार हथियार और जंजीरों का इस्तेमाल किया जाता है, उनके कान और दांत भी कटे हुए पाए गए, लंबे समय तक जंजीरों में कैद किए जाने और सवारी हेतु इस्तेमाल न होने पर गंभीर कैद में रखने जैसी परिस्थितियां भी देखी गई हैं।
निराश एवं हताश हाथी अक्सर आवेश में आकार हमला कर देते हैं। गौरी (‘सवारी नंबर 86’) नामक एक हथिनी ने अक्टूबर 2022 में आमेर में एक पुरुष दुकानदार को गंभीर रूप से घायल किया था, उसने फिर 13 फरवरी 2024 को आमेर किले के मुख्य प्रांगण में एक रूसी महिला पर्यटक पर हमला किया। PETA इंडिया के प्रयासों से आमेर के किले में गौरी की सवारी रोक दी गई है, और अब अधिकारियों से अपील है कि उसे एक अभयारण्य में पुनर्वासित किया जाए, जहां वह गुलामी के जीवन के मानसिक आघात से उबर सके। 2018 की एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) की रिपोर्ट के अनुसार, गौरी राजस्थान में बिना किसी स्वामित्व प्रमाण पत्र (लाइसेन्स) के अवैध रूप से रखी गई है।
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