बागलकोट में मेढों की अवैध लड़ाई को लेकर PETA इंडिया की शिकायत के बाद पशु बलि रोकी गई और FIR दर्ज की गई।
बागलकोट ज़िले के कोन्नूरु गाँव स्थित श्री करीसिद्धेश्वर मंदिर में कोन्नूर जात्रे के वार्षिक अनुष्ठान के तहत प्रस्तावित मेढ़ा लड़ाई और पशु बलि की जानकारी मिलने पर PETA इंडिया ने तुरंत हस्तक्षेप किया। PETA इंडिया की शिकायत के बाद, बागलकोट पुलिस ने कार्यक्रमों के आयोजकों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 168 के तहत नोटिस जारी करके और शहर तथा मंदिर परिसर में उनकी अवैधता के बारे में पोस्टर लगाकर रोकथाम के कदम उठाए। पुलिस ने इन प्रस्तावित कार्यक्रमों को लेकर मंदिर के साथ बैठक भी की। संबंधित कानूनों का विवरण देने वाले पंपलेट भी जनता में वितरित किए गए।
पशुओं की बलि को सफलतापूर्वक रोका गया। हालांकि, इन सभी रोकथाम उपायों के बावजूद, मेढ़ा लड़ाई होने की सूचना मिली। इस पर PETA इंडिया की FIR दर्ज करने की मांग वाली दूसरी शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, जमखंडी ग्रामीण पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 291 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA), 1960 की धारा 11(1)(n) के तहत FIR दर्ज की।
अपनी शिकायत में PETA इंडिया ने स्पष्ट किया कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA), 1960 की धारा 11(1)(n) के तहत किसी स्थान पर पशु लड़ाई का आयोजन करना, उसकी व्यवस्था करना, उसका उपयोग करना या उसके प्रबंधन में शामिल होना एक संज्ञेय अपराध है। इसी अधिनियम की धारा 11(1)(m)(ii) किसी पशु को दूसरे पशु से लड़ाने के लिए उकसाने को अपराध घोषित करती है।
शिकायत में कर्नाटक पशु बलि निषेध अधिनियम, 1959 का भी उल्लेख किया गया, जिसकी धारा 3 किसी भी सार्वजनिक धार्मिक उपासना स्थल में या उसके परिसर में, या इससे जुड़े किसी भी धार्मिक आयोजन या जुलूस के दौरान पशु बलि पर सख्त प्रतिबंध लगाती है। धारा 4 किसी भी व्यक्ति को ऐसी बलि में officiate करने, सहायता करने या भाग लेने से रोकती है। धारा 5 किसी भी सार्वजनिक धार्मिक उपासना स्थल का उपयोग इस उद्देश्य से करने पर प्रतिबंध लगाती है। धारा 6, धाराओं 3, 4 और 5 के उल्लंघन को दंडनीय अपराध बनाती है।
इसके अलावा, PETA इंडिया ने यह भी बताया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 3(5) के तहत, कई व्यक्तियों द्वारा सामूहिक उद्देश्यों से पशुओं को लड़ाने या अवैध रूप से मारने की उकसाहट एक दंडनीय अपराध है। साथ ही, BNS की धारा 325 के अनुसार, पशुओं को शरारतपूर्वक मारना या उन्हें घायल करना—जो ऐसी लड़ाइयों में आम है—पांच साल तक के कारावास, जुर्माना, या दोनों से दंडनीय है। ऐसे कार्यक्रम पशुओं और जनता दोनों के लिए खतरा पैदा करते हैं और BNS की धाराओं 3(5), 125, 291 और 325 के तहत अपराध हैं।
गुजरात, केरल, पुडुचेरी और राजस्थान में किसी भी मंदिर या उसके परिसर में किसी भी पशु की धार्मिक बलि पर पहले से ही प्रतिबंध लगाने वाले कानून मौजूद हैं। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह प्रतिबंध किसी भी सार्वजनिक धार्मिक उपासना स्थल, उसके परिसर, या धार्मिक उपासना से जुड़े किसी भी सार्वजनिक जुलूस या आयोजन पर लागू होता है।
जब आप पशुओं पर क्रूरता देखें तो यह करें
