PETA इंडिया की शिकायत पर कार्रवाई : सांगली में कुत्तों की अवैध दौड़ (ग्रेहाउंड रेस) के खिलाफ FIR दर्ज

Posted on by Surjeet Singh

पिछले सप्ताह सांगली में कावथे महांकाल के दौरान आयोजित की गई कुत्तों की अवैध दौड़ (ग्रेहाउंड रेस) की जानकारी मिलते ही PETA इंडिया ने तुरंत सांगली पुलिस को सूचित किया। इस पूर्व सूचना और पुलिस द्वारा आयोजकों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 168 के तहत दौड़ को रोकने के लिए नोटिस जारी करने के बावजूद, यह अवैध दौड़ आयोजित कर दी गई। इसके बाद PETA इंडिया ने शिकायत दर्ज कराई और मामले को आगे बढ़ाया, जिससे पुलिस द्वारा जारी रोक आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में आयोजक के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई।

प्राथमिकी (FIR) भारतीय पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA) 1960 की धाराओं 11(1)(a), 11(1)(d) और धारा 3 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 223 के अंतर्गत दर्ज की गई।

ग्रेहाउंड दौड़ में कुत्तों को इतनी खतरनाक गति से दौड़ने के लिए मजबूर किया जाता है कि उनके शरीर पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे अक्सर उन्हें चोटें लगती हैं या उनकी मृत्यु हो जाती है। इन्हें आमतौर पर केनेल में बंद रखा जाता है और जब इस्तेमाल नहीं किया जाता तो अपने मल-मूत्र में खड़ा रहना पड़ता है। हारने वाले कुत्तों के साथ कठोर व्यवहार किया जा सकता है, जैसे कि उन्हें छोड़ देना या मार देना। ऐसी प्रतियोगिताओं में चोटें, थकान और मानसिक तनाव सामान्य होते हैं, क्योंकि इसमें पशुओं की भलाई से ज्यादा जुए को प्राथमिकता दी जाती है।

ग्रेहाउंड कुत्तों को इस तरह के दौड़ों में अक्सर तब तक दौड़ाया जाता है जब तक कि वो बुरी तरह से चोटिल ना हो जाएं या फिर मर न जाए। कुत्तों को दौड़ने के लिए मजबूर करना स्वभावतः क्रूर है। हम श्री प्रविन कांबले जी, सहायक पुलिस निरीक्षक, सांगली पुलिस की सराहना करते हैं, जिन्होंने प्राथमिकी दर्ज कर यह संदेश दिया कि पशुओं के प्रति क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अपनी शिकायत में PETA इंडिया ने कहा कि परफॉर्मिंग एनिमल्स (रजिस्ट्रेशन) नियम, 2001 के तहत, किसी भी पशु का प्रशिक्षण, प्रदर्शन या शो के लिए कानूनी रूप से उपयोग केवल भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) की पूर्व अनुमति के बाद ही किया जा सकता है। इसके अलावा, ऐसी दौड़ें PCA अधिनियम, 1960 और BNS, 2023 का उल्लंघन करती हैं, जो पशुओं पर अनावश्यक पीड़ा पहुँचाने को प्रतिबंधित करती हैं।

PCA अधिनियम, 1960 विशेष रूप से अन्य पशुओं के साथ लड़ाई के लिए पशुओं को उकसाने को अपराध मानता है। 7 मई 2014 के निर्णय, एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया बनाम ए. नगराजा और अन्य (सिविल अपील नं. 5387/2014) में, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पशु दौड़ जैसी गतिविधियाँ पशु लड़ाई की परिभाषा में आती हैं क्योंकि इसमें पशुओं को प्रतिस्पर्धी और हानिकारक परिस्थितियों में डालना शामिल होता है, जो लड़ाई के लिए उकसाने के समान है। 7 दिसंबर 2020 के पत्र में, जो पंजाब के मुख्य सचिव को लिखा गया था, AWBI ने राय दी कि मूलतः सभी पशु दौड़ें, विशेष रूप से कुत्तों की दौड़ें, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA) 1960 के तहत प्रतिबंधित हैं और ऐसे आयोजनों को अवैध घोषित किया। पत्र में चेतावनी दी गई कि पशु दौड़ें आयोजित करना अदालत की अवमानना के समान है और ऐसी गतिविधियों के लिए दी गई किसी भी अनुमति या निर्देश को वापस लेने का आग्रह किया गया ताकि कानून का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

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