राजन्ना सिरसिल्ला: PETA इंडिया और SAFI हैदराबाद के हस्तक्षेप के बाद बकरे की बलि पर FIR दर्ज
2 अक्टूबर को तंगल्लापल्ली मंडल के चिन्ना लिंगा पुर में कुछ व्यक्तियों द्वारा एक बकरे की बलि दिए जाने की जानकारी मिलने पर, PETA इंडिया ने स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SAFI) के साथ मिलकर 18 अक्टूबर को तंगल्लापल्ली पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करवाई।
यह क्रूर घटना वीडियो में कैद हुई, जिसमें कुछ पुरुष एक डरे सहमे बकरे को घेरकर खड़े दिखाई देते हैं। इसके बाद वीडियो में बकरी को पूरी तरह सचेत अवस्था में कुल्हाड़ी से सिर काटते हुए दिखाया गया है और पूरी हत्या सार्वजनिक रूप से होती दिखाई देती है।
PETA इंडिया ने SAFI, हैदराबाद के क्रूरता निवारण प्रबंधक श्री अदुलापुरम गौतम द्वारा दायर शिकायत के आधार पर तंगल्लापल्ली पुलिस स्टेशन के साथ समन्वय कर FIR दर्ज करवाई। वीडियो में दिख रहे व्यक्ति के खिलाफ भारत न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 325 तथा प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (PCA) एक्ट, 1960 की धारा 11(1)(a) और 11(1)(l) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
BNS, 2023 की धारा 325 किसी भी पशु को विकलांग बनाने या उसकी हत्या करने को एक संज्ञेय अपराध के रूप में वर्गीकृत करती है और इसके लिए पाँच वर्ष तक की कारावास, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान करती है। तेलंगाना एनिमल्स एंड बर्ड्स सैक्रिफ़ाइसेज़ प्रोहिबिशन (TABSP) एक्ट, 1950 की धारा 6 के अनुसार किसी भी व्यक्ति के लिए यह दंडनीय है कि वह जानबूझकर अपने कब्जे या नियंत्रण में किसी स्थान पर बलि होने दे, या किसी भी सभा में पशु बलि का संचालन करे, करवाए, या उसमें भाग ले। PCA एक्ट, 1960 की धारा 11 “क्रूरता” को परिभाषित करती है और किसी पशु पर अनावश्यक दर्द या पीड़ा पहुँचाना दंडनीय अपराध बनाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि पशुओं का वध केवल लाइसेंसशुदा स्लॉटरहाउसों में ही किया जा सकता है और नगरपालिकाओं को इस आदेश का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (स्लॉटर हाउस) रूल्स, 2001 और फूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लाइसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ फ़ूड बिज़नेस) रेग्युलेशंस, 2011 के अनुसार पशुओं को भोजन के लिए केवल उन्हीं लाइसेंसशुदा स्लॉटरहाउसों में मारा जा सकता है जहाँ प्रजाति-विशिष्ट स्टनिंग उपकरण उपलब्ध हों।
गुजरात, केरल, पुदुचेरी और राजस्थान में पहले से ही विशेष कानून हैं जो किसी भी मंदिर या उसके परिसर में पशु बलि पर प्रतिबंध लगाते हैं। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में सार्वजनिक धार्मिक पूजा, उपासना या उसके किसी भी परिसर, या उससे जुड़ी किसी भी सार्वजनिक शोभायात्रा या सभा में पशु बलि निषिद्ध है।
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