PETA इंडिया के हस्तक्षेप के बाद राजस्थान में पशु बलि पर कड़ी कार्रवाई

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09 October 2025

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कोटा—हाल ही के त्योहारों के दौरान राजस्थान में पशु बलि से जुड़ी दो घटनाओं में, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स इंडिया (PETA इंडिया) की कार्रवाई के परिणामस्वरूप कोटा में प्राथमिकी दर्ज की गई और चुरू में पशुओं को बचाया गया।

PETA इंडिया को जब पता चला कि कुम्भकोट गांव में कुछ लोगों ने दशहरे के दिन एक भैंस के बछड़े का सिर काट दिया था और इसका वीडियो भी बनाया गया, ने कोटा ग्रामीण जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर तीन अभियुक्तों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 325 और 3(5) तथा राजस्थान पशु और पक्षी बलि (प्रतिबंध) अधिनियम, 1975 की धारा 6 के तहत प्राथमिकी दर्ज करवाई।

एक अन्य घटना में, जब PETA इंडिया को जानकारी मिली कि चुरू जिले के बोबसर चरणन गांव के भैरवजी माताजी मंदिर में 22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान विशेष रूप से बकरियों की बलि देने की योजना बनाई गई थी, तो PETA इंडिया ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए इसकी शिकायत दर्ज करवाई जिसके फलस्वरूप सुजानगढ़ के उपखंड मजिस्ट्रेट ने सालासर पुलिस स्टेशन को निर्देश दिया कि वे अनुष्ठानों से पहले मंदिर समिति को कड़ी चेतावनी दें, ताकि कोई भी पशु मारा या घायल न हो सके।

PETA इंडिया के लीगल एडवाइजर और क्रूरता प्रतिक्रिया निदेशक, मीत अशर ने कहा-“PETA इंडिया विशेष रूप से बीकानेर के डिविजनल कमिश्नर श्री विश्राम मीणा, IAS, चुरू के जिला मजिस्ट्रेट श्री अभिषेक सुराना, IAS तथा चुरू प्रशासन, सुजानगढ़ के उपखंड मजिस्ट्रेट श्री ओम प्रकाश वर्मा जी की सराहना करता है इस इस मामले में उन्होंने तत्काल कार्यवाई कर यह सुनिश्चित किया कि अवैध बलि न हो। हम कोटा ग्रामीण पुलिस विशेष रूप से कोटा ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक श्री सुजीत शंकर, IPS जी के भी आभारी हैं जिन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि पशुओं के साथ क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जैसे मानव बलि को अब हत्या के रूप में पहचाना और निंदा की जाती है, वैसे ही पशु बलि की पुरानी प्रथा को भी समाप्त किया जाना चाहिए।”

PETA इंडिया ने अपनी शिकायत में यह उजागर किया कि राजस्थान पशु और पक्षी बलि (प्रतिबंध) अधिनियम, 1975, स्पष्ट रूप से मंदिरों, मंदिर परिसर और अन्य सार्वजनिक धार्मिक स्थल पर पशु बलि पर रोक लगाता है। धारा 4 के तहत, कोई भी व्यक्ति ऐसे कृत्यों का संचालन, प्रदर्शन, सहायता या इसमें भाग नहीं ले सकता, जबकि धारा 5 किसी भी व्यक्ति को, जो परिसर का स्वामी या नियंत्रण में हो, इस उद्देश्य के लिए मंदिरों या अन्य पूजा स्थलों का उपयोग करने से रोकती है। इसके अतिरिक्त यदि बलि के संबंध में कोई विस्वसनीय सूचना या शिकायत मिलती है जहां अधिनियम का उल्लंघन करते हुए बलि होने की संभावना है तो धारा 8(1) कार्यकारी मजिस्ट्रेट को यह अधिकार देती है कि वह इस मामले में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर सकते हैं।

PETA इंडिया ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स (स्लॉटर हाउस) नियम, 2001 और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लाइसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ फूड बिज़नेस) नियम, 2011 के तहत, पशुओं को भोजन के लिए केवल पंजीकृत या लाइसेंसधारक बूचड़खानों में ही मारा जा सकता है। इसके अलावा, ऐसे गैर-पंजीकृत स्थानों पर जहाँ जानवरों को मारने से पहले बेहोश करने या मरने के लिए उचित उपकरण मौजूद नहीं हैं, वहाँ पशुओं की बलि देना प्रतिबंधित है।

गुजरात, केरल और पुडुचेरी में पहले से ही ऐसे कानून हैं जो किसी भी पशु की किसी भी मंदिर या उसके परिसर में धार्मिक बलि पर रोक लगाते हैं। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह किसी भी सार्वजनिक धार्मिक स्थल, पूजा, उसके परिसर, या किसी धार्मिक आयोजन या जुलूस में, जो सार्वजनिक सड़क पर हो, पर निषेधित है।

PETA इंडिया, जो इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु  हमारा भोजन बनने या किसी भी तरह से हमारा दुर्व्यवहार सहने के लिए नहीं हैं” प्रजातिवाद (speciesism), यानी मानव श्रेष्ठतावादी दृष्टिकोण का विरोध करता है। इस सोच के तहत इंसान इस संसार में स्वयं को सर्वोपरि मानकर अन्य प्रजातियों का शोषण करना अपना अधिकार समझता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया PETAIndia.com  पर जाएँ या इस समूह को XFacebook या Instagram. पर फॉलो करें।

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