आगरा: PETA इंडिया की शिकायत के बाद वन विभाग ने प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे भारतीय प्रजाति के तीन नवजात बंदरों को बचाया
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10 October 2025
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आगरा – आगरा में भारतीय प्रजाति (रीसस मकाक) के तीन नवजात बंदरों को अवैध रूप से बंधक बनाकर बड़ी निर्दयता से बांधकर, और सड़क पर प्रदर्शन व भीख मांगने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था, जो कि कई पशु संरक्षण कानूनों का उल्लंघन है। इस पर एक स्थानीय निवासी की शिकायत के बाद, पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स, इंडिया (PETA इंडिया) ने श्री राहुल जैन (एक जागरूक स्थानीय नागरिक) और आगरा वन विभाग के सहयोग से तत्काल कार्रवाई करते हुए इन बंदरों को बचाया। बंदरों को रस्सी से बांधकर लगातार प्रदर्शन के लिए मजबूर किया जा रहा था, जिससे वे तनावग्रस्त और पीड़ित दिखाई दे रहे थे। स्वास्थ्य परीक्षण में स्वस्थ पाए जाने के बाद, उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया।
भारत में बंदरों को प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल करना गैरकानूनी है। वर्ष 1998 में, केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर बंदरों सहित कई अन्य वन्य प्रजातियों को प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह अधिसूचना पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 22 के तहत जारी की गई थी।
भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) ने अपने पत्र संख्या F. No. WL-8/91/2024-WL, दिनांक 9 सितंबर 2024 के माध्यम से स्पष्ट किया है कि भारतीय प्रजाति के बंदर (रीसस मकाक) को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम (WPA), 1972 की अनुसूची IV के परिशिष्ट II के अंतर्गत संरक्षित प्रजाति घोषित किया गया है। और WPA, 1972 की धारा 49M के अनुसार, अनुसूची IV में सूचीबद्ध किसी भी जीवित प्रजाति को अपने पास रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि वह उस पशु से संबंधित विवरण मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (Chief Wildlife Warden – CWLW) को रिपोर्ट करे।
धारा 49M के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) ने 28 फरवरी 2024 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से “जीवित पशु प्रजाति (रिपोर्टिंग और पंजीकरण) नियम, 2024” को अधिसूचित किया।
इन नियमों के अनुसार, जो भी व्यक्ति वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची IV में सूचीबद्ध किसी भी जीवित प्रजाति को अपने पास रखता है, उसे उस पशु का पूरा विवरण इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से PARIVESH 2.0 पोर्टल के जरिए संबंधित राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (CWLW) को रिपोर्ट करना और पंजीकरण के लिए आवेदन करना अनिवार्य है। यह कार्य राजपत्र अधिसूचना जारी होने की तारीख से छह माह के भीतर अथवा ऐसे पशु के स्वामित्व में आने की तारीख से तीस दिन के भीतर किया जाना आवश्यक है।
इस प्रकार, PARIVESH पोर्टल पर पंजीकरण के बिना रीसस बंदरों को बंदी बनाकर रखना एक दंडनीय अपराध है, जिसके लिए तीन साल तक की कैद, एक लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
PETA इंडिया की क्रूरता प्रतिक्रिया समन्वयक, सिंचना सुब्रमण्यम कहती हैं,- “PETA इंडिया, आगरा वन प्रभाग का, विशेष रूप से श्री दीपक कुमार, IFS, प्रभागीय वन अधिकारी, आगरा का, अवैध रूप से बंदी बनाए गए बंदरों को बचाने और उनके पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कार्रवाई हेतु धन्यवाद करता है। हम सभी संवेदनशील नागरिकों से अपील करते हैं कि वे सतर्क रहें और वन्यजीवों या अन्य पशुओं के साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता की घटना को तुरंत वन विभाग या पुलिस को रिपोर्ट करें।”
हिंदू धर्म में पूजनीय होने के साथ-साथ, रीसस मकाक बंदर स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि वे मुख्य रूप से फलाहारी होते हैं और फलों के बीज फैलाने में मदद करते हैं। इनके अभाव में जंगलों को नुकसान पहुँच सकता है।
पशुओं के साथ हो रही क्रूरता या आपात स्थिति की सूचना देने के लिए, कृपया PETA इंडिया को (0) 98201 22602 पर कॉल करें।
PETA इंडिया जो इस सिद्धांत के तहत काम करता है कि “पशु हमारा मनोरंजन करने के लिए नहीं हैं” प्रजातिवाद (स्पीशीसिज्म) का विरोध करता है जो कि मनुष्य की इस संसार में स्वयं को सर्वोच्च मानकर अन्य प्रजातियों का शोषण करने वाली सोच है। अधिक जानकारी के लिए कृपया PETAIndia.com पर जाएं या समूह को X, Facebook या Instagram. पर फॉलो करें।
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