उडुपी: PETA इंडिया के प्रयासों से नर्क जैसी स्थितियों में अवैध रूप से बंदी बनाकर रखे गए से लगभग 100 पशुओं को बचाया गया
उडुपी के सालिग्राम में स्थित ‘एनिमल रेस्क्यू सेंटर’ नामक एक अवैध स्थान, जिसका नाम ही भ्रामक है, में अत्यंत दयनीय स्थिति में पशुओं को लगातार बंदी बनाकर रखे जाने की जानकारी मिलने के बाद, श्री सुदींद्र ऐथल द्वारा संचालित इस केंद्र पर जनवरी और फरवरी में की गई छापेमार के बाद यह चौथा संयुक्त अभियान था। PETA इंडिया ने उडुपी सोसाइटी फॉर द प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स (SPCA), एनिमल हसबेंड्री डिपार्टमेंट (AHD), सालिग्राम पट्टण पंचायत, वन विभाग और उडुपी पुलिस का सहयोग करते हुए फिर से छापेमारी अभियान में भाग लिया, जिसके दौरान लगभग 100 पशुओं को बचाया गया। इस वर्ष अब तक इस केंद्र से कुल 300 से अधिक पशुओं को बचाया जा चुका है। यह कार्रवाई उडुपी के उप आयुक्त और जिला मजिस्ट्रेट (DC एवं DM) की अध्यक्षता में हुई SPCA की बैठक और सालिग्राम पट्टण पंचायत द्वारा जारी आदेश के बाद की गई।
बचाव किए गए पशुओं में कुत्ते, कुत्तों के बच्चे, बिल्लियाँ, एक लवबर्ड और एक हैम्स्टर शामिल थे। सभी पशुओं को पहले की तरह ही मलमूत्र से भरे तंग लोहे के पिंजरों में कैद करके रखा गया था। इस वर्ष जनवरी और फरवरी में जो हालात पाए गए थे, इस बार भी हालात वैसे के वैसे ही मिले, पिंजरे जंग लगे हुए थे, उनके किनारे धारदार थे, और पिंजरों के अंदर नीचे कुछ बिछाया नहीं गया था, न खाना था, न पानी के बर्तन। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि पिंजरों के अंदर महीनों से मलमूत्र साफ़ नहीं किया गया था, जिससे पशुओं के लिए जीवन जीना असहनीय बन गया था। इन परिस्थितियों में वे कई बीमारियों और संक्रमणों से पीड़ित हो गए थे, जैसे कैनाइन डिस्टेंपर, पार्वोवायरस, खुजली (स्कैबीज़), रक्ताल्पता (एनीमिया), कीड़ों से भरे घाव, लकवा, और श्वसन संबंधी विकार। अधिकांश पशु अत्यधिक निर्जलित और कमजोर थे, उन्हें वायरल संक्रमण, आँखों से स्राव, घाव, और जुओं का संक्रमण था, और उनकी सेहत बहुत ही खराब स्थिति में थी। कई चेतावनियों और नोटिसों के बावजूद, श्री ऐथल फिर भी पशुओं कि इन गंदी और भयावह परिस्थितियों में रखते आए हैं।
सफल छापेमारी के बाद, बचाए गए पशुओं को अब विभिन्न सुविधाओं में पुनर्वासित किया गया है, जहाँ उन्हें आवश्यक चिकित्सा देखभाल प्रदान की जाएगी। पशुओं का पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद, उन्हें गोद लेने के प्रयास किए जाएंगे।
श्री ऐथल, जो इस केंद्र का संचालन करते हैं, का पशुओं को बार-बार गंदी परिस्थितियों में रखते आए हैं, जिसके लिए उन्हें कई चेतावनियाँ और आधिकारिक नोटिस दिए गए थे। उनके द्वारा पशुओं की भलाई की अनदेखी ने अनेक पशुओं की जिंदगी को नर्क जैसा बना दिया है।
PETA India applauds all the authorities for taking action against this facility, which was operating illegally and subjecting animals to severe cruelty, especially the Deputy Commissioner (DC) and District Magistrate, Smt Swaroopa T.K., IAS; the Superintendent of Police, Shri Hariram Shankar, IPS; and the Chief Officer, Saligrama Pattana Panchayat, Shri Ajay Bhandarkar. PETA India strongly urge the public to avoid supporting breeders and pet stores, most of which are illegal, and to report hoarders who often purport to be rescuers but collect animals out of compulsion and then leave them to rot.
PETA इंडिया उन सभी अधिकारियों विशेष रूप से उप आयुक्त (DC) और जिला मजिस्ट्रेट, श्रीमती स्वरूपा टी.के., IAS; पुलिस अधीक्षक, श्री हरिराम शंकर, IPS; और मुख्य अधिकारी, सालिग्राम पट्टण पंचायत, श्री अजय भंडारकर एवं प्राधिकरणों की सराहना करता है जिन्होंने इस केंद्र के खिलाफ कार्रवाई की, जो अवैध रूप से संचालित हो रहा था और पशुओं के साथ अत्यधिक क्रूरता कर रहा था।
PETA इंडिया जनता से विनम्र अनुरोध करता है कि वे कभी भी अवैध breeders और pet stores से पशुओं को ना खरीदें, और उन लोगों की रिपोर्ट करें जो अक्सर खुद को रेस्क्यूअर दिखाते हैं लेकिन वास्तव में वो पहले पशुओं को अपने पास रखते हैं और फिर उन्हें छोड़ देते हैं, जिससे वे डर डर कि ठोकरे खाकर मरते हैं या एक बुरी जिंदगी जीने के लिए मजबूर होते हैं।


PETA इंडिया संबंधित प्राधिकरणों से कड़ा आग्रह करता है कि वे इस केंद्र में मौजूद खाली पिंजरों को तोड़कर स्थायी रूप से नष्ट करने के लिए निर्णायक कदम उठाएँ। यह कदम अत्यधिक क्रूरता को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि इन पिंजरों में फिर से असहाय पशुओं को कैद न किया जा सके और फिर किसी पशु की उपेक्षा और उनके साथ दुर्व्यवहार न हो।
दि प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स (डॉग प्रजनन और मार्केटिंग) नियम, 2017 और प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स (पेट शॉप) नियम, 2018 के नियम 3 और दि प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स (PCA) एक्ट, 1960 के नियमों के तहत यह आवश्यक है कि ‘पालतू’ पशुओं के बोर्डिंग, प्रजनन या बिक्री में लगे केंद्रों को राज्य पशु कल्याण बोर्ड के साथ पंजीकृत होना अनिवार्य है।



