दिल्ली-एनसीआर के सामुदायिक कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर PETA इंडिया का बयान
कहते हैं कि हर कुत्ते का दिन आता है और आज का दिन है चाय की दुकान के बाहर बैठे ‘शेरू’ का, मंदिर की सीढ़ियों पर बैठी ‘रानी’ का, और सोसाइटी के मैदान में खेल रहे ‘मोती’ का। जिन सामुदायिक कुत्तों की हम सेवा करते हैं, उनकी ओर से हम माननीय सुप्रीम कोर्ट की तीन-सदस्यीय पीठ के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 (Animal Birth Control Rules 2023) को लागू करने और उसे प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने का निर्णय लिया।
हम जनता से भी आग्रह करते हैं कि वे भी अपना योगदान दें और ब्रीडर्स या पालतू पशुओं की बिक्री करने वाली दुकानों से कुत्ता खरीदने की बजाय सड़कों पर बेघर जीवन यापन कर रहे या पशु आश्रय घर से किसी जरूरतमंद कुत्ते को गोद लें। अपने पालतू कुत्तों की नसबंदी कराएं और नसबंदी कार्यक्रमों का समर्थन करें। सामुदायिक कुत्तों को खाना देने वाले फीडर्स कुत्तों के साथ दोस्ताना संबंध बनाते हैं जिससे कुत्तों का इलाज, नसबंदी और टीकाकरण करना आसान हो जाता है। PETA इंडिया नगर निकायों से आग्रह करता है कि हर गली मोहलें में पर्याप्त फीडिंग ज़ोन सुनिश्चित करें। साथ ही, हम जनता से अनुरोध करते हैं कि वे कुत्तों के पीने के लिए साफ पानी के बर्तन भरकर घर के बाहर रखें और फीडिंग ड्राइव्स में हिस्सा लें।
PETA इंडिया यह भी अपील करता है कि लोग सतर्क रहें और अगर किसी भी कुत्ते को गलत तरीके से “आक्रामक” बोलकर अनुचित तरीके से उठाया जाए तो ऐसे मामलों की तुरंत नगर निगम में शिकायत दर्ज कराएं।
अदालत के आज के फैसले से यह सिद्ध होता है कि अधिकांश लोग सामुदायिक कुत्तों को अपना प्यारा पड़ोसी और दोस्त मानते हैं। अब, नसबंदी और टीकाकरण पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करके, ना सिर्फ दिल्ली बल्कि पूरा भारत उस लक्ष्य की ओर बढ़ सकता हैं कि कोई भी कुत्ता सड़कों पर भूख, दुर्घटनाओं या क्रूरता का शिकार ना बनें।
अपने घरेलू एवं आसपास के सामुदायिक कुत्तों की नसबंदी का संकल्प लें