PETA इंडिया और SAFI हैदराबाद की शिकायतों और श्रीमती मनीका गांधी के हस्तक्षेप के बाद जगतियाल व वारंगल में बकरे की बलि के मामले में FIR दर्ज

Posted on by Sudhakarrao Karnal

छिन्ना मेटपल्ली गाँव, कोरुतला मंडल, जगतियाल जिले तथा बोडराई के निकट, खिला वारंगल मंडल, वारंगल जिले में बकरे की बलि के दौरान हुए अवैध और क्रूर कृत्यों के वीडियो वायरल होने पर — PETA इंडिया ने पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमती मनीका गांधी के सक्रिय हस्तक्षेप और स्ट्रे एनीमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SAFI) हैदराबाद के सहयोग से कोरुतला पुलिस थाना (जगतियाल) और AJ मिल्स कॉलोनी पुलिस थाना (वारंगल) में दो FIR दर्ज करवाईं।

इंस्टाग्राम पर वायरल हुए इन वीडियो में बकरे के साथ सार्वजनिक स्थान पर होने वाली घोर क्रूरता स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। वीडियो में बकरे को गर्दन काटकर या गर्दन को 360° घुमाकर मार डाला जा रहा है।

PETA इंडिया ने SAFI हैदराबाद की क्रूरता निवारण सहायक सुश्री कोतला श्री विद्या द्वारा दर्ज शिकायतों के आधार पर, तथा श्रीमती मनीका गांधी के समर्थन से, तेलंगाना पुलिस के साथ समन्वय कर ये FIR दर्ज करवाईं।

कोरुतला पुलिस थाना ने मुख्य आरोपी नीलम राकेश के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 325, तेलंगाना पशु एवं पक्षी बलि निषेध अधिनियम (TABSP), 1950 की धारा 6, तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA), 1960 की धाराएं 11(1)(a) और 11(1)(i) के तहत मामला दर्ज किया। AJ मिल्स कॉलोनी पुलिस थाना ने एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ उपरोक्त कानूनों के समान प्रावधानों के तहत FIR दर्ज की है।

धारा 325, BNS 2023 के अनुसार, किसी भी पशु को घायल करना या मारना गंभीर अपराध है, जिसके लिए पाँच वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। TABSP अधिनियम की धारा 6 के तहत, किसी भी व्यक्ति को अपने नियंत्रण वाले स्थान पर जान-बूझकर पशु बलि करने देना, उसे संपादित करना या उसमें भाग लेना दंडनीय है। PCA अधिनियम की धारा 11, किसी भी पशु पर अनावश्यक पीड़ा पहुँचाना क्रूरता मानती है और इसे अपराध घोषित करती है।

PETA इंडिया श्रीमती मनीका गांधी के तत्पर हस्तक्षेप और अटल समर्थन के लिए हार्दिक आभार प्रकट करता है और तेलंगाना पुलिस को FIR दर्ज कराकर यह स्पष्ट संदेश देने के लिए बधाई देता है कि पशु क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बकरे की बलि न केवल जानवरों के लिए क्रूर है, बल्कि समाज के लिए भी खतरा है। यह हिंसा के प्रति संवेदनशीलता खत्म करता है और ऐसे प्राचीन विश्वासों को बनाए रखता है जो सामाजिक प्रगति में बाधक हैं। जैसे मानव बलि को अब हत्या माना जाता है, उसी तरह भारत के अंतरिक्ष मिशन के दौर में पशु बलि की यह पुरानी प्रथा समाप्त होनी चाहिए। यह हमारे सामाजिक विकास के लिए अनिवार्य है।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि पशुओं का वध केवल लाइसेंस प्राप्त कसाईखानों में ही किया जा सकता है और नगर पालिकाओं को इस नियम का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। पशु क्रूरता निवारण (कसाईखाना) नियम, 2001 तथा खाद्य सुरक्षा और मानक (खाद्य व्यवसायों का लाइसेंस एवं पंजीकरण) नियम, 2011, केवल लाइसेंस प्राप्त कसाईखानों में ही पशुओं के वध की अनुमति देते हैं, जहाँ प्रजाति-विशेष के अनुसार उन्हें पहले बेहोश किया जाता है।

गुजरात, केरल, पुदुचेरी और राजस्थान में पहले से ही किसी भी मंदिर या उसके परिसर में धार्मिक पशु बलि निषेध करने वाले कड़े कानून मौजूद हैं। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में सार्वजनिक धार्मिक उपासना स्थल, परिसर, सभा या धार्मिक शोभा यात्रा के दौरान किसी भी स्थान पर पशु बलि प्रतिबंधित है।

यदि आप पशु क्रूरता देखें तो क्या करें