PETA इंडिया और श्री दयानंद स्वामीजी के हस्तक्षेप के बाद बेलगावी प्रशासन ने इस वर्ष मंगाई देवी मंदिर में चूजों की बलि पर रोक लगाई, हज़ारों मासूम चूज़ों को बचाया गया

Posted on by Sudhakarrao Karnal

PETA इंडिया को जब यह सूचना मिली कि कर्नाटक के बेलगावी स्थित मंगाई देवी मंदिर में आषाढ़ माह के दौरान हर वर्ष हज़ारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में बिकने वाले जीवित चूज़ों को खरीदकर उन्हें मंदिर की छत पर फेंकते हैं—तो संस्था ने स्थानीय कार्यकर्ताओं निकिता कुनथे और आदित्य हावल के साथ मिलकर बेलगावी पुलिस आयुक्त से मुलाक़ात कर औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई। साथ ही, प्राणी दया संघ के श्री दयानंद स्वामीजी द्वारा बेलगावी के उपायुक्त (DC) एवं ज़िलाधिकारी (DM) को दी गई शिकायत के आधार पर, DC ने मंदिर प्रबंधन को इस वर्ष 20 से 25 जुलाई के बीच आयोजित त्योहार के दौरान किसी भी पशु बलि पर रोक लगाने का आदेश जारी किया।

बेलगावी शहर की पुलिस ने इस आदेश को लागू करने हेतु पुलिस बल तैनात किया और स्पष्ट चेतावनी वाले बैनर भी लगाए जिनमें लिखा गया है कि कर्नाटक में पशु बलि अवैध है। इस अमानवीय प्रथा के तहत पहले कई चूज़े छत पर गिरते ही मर जाते थे, जबकि जीवित बचे चूज़ों को पुनः बेच दिया जाता था, जिससे यह क्रूरता चार दिन तक चलती रहती थी।

22 जुलाई को स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा मंदिर स्थल का दौरा किया गया, जिसमें यह पुष्टि हुई कि इस वर्ष वहां चूज़ों का उपयोग नहीं किया गया और पुलिस तैनात थी। प्रशासन द्वारा पशु बलि के विरुद्ध स्पष्ट रूप से चेतावनी देने वाले पोस्टर भी लगाए गए हैं।

PETA इंडिया बेलगावी के उपायुक्त एवं ज़िलाधिकारी तथा पुलिस प्रशासन की सराहना करता है, जिन्होंने इस वर्ष हज़ारों चूज़ों के शोषण पर रोक लगाकर एक सशक्त संदेश दिया है कि धार्मिक आस्था के नाम पर पशु-क्रूरता की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। जैसे मानव बलि को अब हत्या माना जाता है, वैसे ही धर्म के नाम पर पशुओं के प्रति क्रूरता की पुरानी प्रथाओं को भी समाप्त किया जाना चाहिए।

PETA इंडिया ने अपनी शिकायत में यह स्पष्ट किया था कि कर्नाटक पशु बलि प्रतिषेध अधिनियम, 1959 की धारा 3 सार्वजनिक धार्मिक स्थलों या उनसे जुड़े किसी भी परिसर, सभा या जुलूस में पशु बलि को स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित करती है। धारा 4 किसी भी व्यक्ति को बलि आयोजित करने, उसमें भाग लेने या सहयोग करने से मना करती है और धारा 5 सार्वजनिक पूजा स्थलों में बलि के उपयोग को अवैध घोषित करती है। इन धाराओं का उल्लंघन अधिनियम की धारा 6 के तहत दंडनीय अपराध है।

PETA इंडिया ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि BNS, 2023 की धारा 3(5) के अनुसार, सामूहिक मंशा के तहत अवैध रूप से किसी पशु को मारना दंडनीय अपराध है। इसके अतिरिक्त, धारा 325 के अंतर्गत शरारतन पशु की हत्या करना पाँच वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों के तहत दंडनीय है।

गुजरात, केरल, पुडुचेरी और राजस्थान जैसे राज्यों में पहले से ही किसी भी मंदिर में या उसके परिसर में पशु बलि पर प्रतिबंध है। कर्नाटक के साथ-साथ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ने भी सार्वजनिक पूजा स्थलों, उनके परिसरों, या धार्मिक जुलूसों में पशु बलि को अवैध घोषित कर रखा है।

अगर आप कहीं भी पशु क्रूरता देखें, तो तुरंत इसकी रिपोर्ट करें

धार्मिक मान्यताओं के नाम पर पशु-शोषण को कभी स्वीकार न करें