मदुरई: कुत्ते पर ईंटों से जानलेवा हमला – आरोपियों की गिरफ्तारी में मददगार जानकारी देने वालों को PETA इंडिया देगा ₹50,000 तक का इनाम
वेलायुथम पिल्लई स्ट्रीट, गोरिपालयम, मदुरई में एक समुदायिक कुत्ते पर भारी ईंटों से क्रूर हमला किए जाने का एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आने के बाद, PETA इंडिया ने मदुरई सिटी पुलिस के साथ समन्वय करते हुए तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करवाई है। फिलहाल आरोपियों की पहचान नहीं हो सकी है और पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालकर हमलावर (जिसने ईंटें फेंकी) और उस व्यक्ति (जिसने उसे भागने में मदद की) की तलाश कर रही है।
जानकारी देने में मदद के लिए, PETA इंडिया ऐसे किसी भी व्यक्ति को ₹50,000 तक का इनाम देने की घोषणा करता है जिसकी सूचना के आधार पर दोषियों की गिरफ्तारी और सज़ा सुनिश्चित हो सके।
यह प्राथमिकी थिरु वी पी मुरुगन द्वारा की गई शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 324(4) और 325 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1)(a) के अंतर्गत दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की गई है।
वीडियो में दिखाई देने वाले घायल कुत्ते को थिरु मुरुगन द्वारा बचाया गया है और उन्होंने उसके लिए पशु-चिकित्सा उपचार की व्यवस्था की है।
इस अपराध से संबंधित कोई भी जानकारी रखने वाला व्यक्ति [email protected] पर PETA इंडिया से संपर्क कर सकता है। अनुरोध करने पर सूचनादाताओं की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
BNS, 2023 की धारा 325 किसी भी पशु को विकलांग या मार डालने को गंभीर अपराध (Cognisable Offence) की श्रेणी में रखती है और इसके लिए पाँच वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। वहीं, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 किसी भी पशु को अनावश्यक पीड़ा या दुःख पहुँचाने को दंडनीय अपराध घोषित करती है।
PETA इंडिया का कहना है कि जो लोग पशुओं के साथ क्रूरता करते हैं, वे आगे चलकर मनुष्यों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। सभी की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है कि ऐसी किसी भी तरह की पशु क्रूरता को लोग तुरंत पुलिस को रिपोर्ट करें।
PETA इंडिया मदुरई सिटी पुलिस की सराहना करता है जिन्होंने इस मामले में तत्काल FIR दर्ज कर पशु क्रूरता को अस्वीकार्य बताते हुए एक सशक्त संदेश दिया है।
PETA इंडिया यह भी सिफारिश करता है कि ऐसे अपराधियों का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कर उन्हें काउंसलिंग दी जाए, क्योंकि पशुओं के साथ क्रूरता करना एक गहरे मानसिक असंतुलन का संकेत है। शोध से स्पष्ट हुआ है कि जो लोग पशु-क्रूरता में शामिल होते हैं, वे अक्सर पुनरावृत्ति अपराधी होते हैं और आगे चलकर अन्य पशुओं और मनुष्यों को भी चोट पहुंचाते हैं। Forensic Research & Criminology International Journal में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, “जो लोग पशु क्रूरता में लिप्त होते हैं, उनके हत्या, बलात्कार, डकैती, हमला, उत्पीड़न, धमकी और नशीली दवाओं के सेवन जैसे अन्य अपराध करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है।”
