नागपुर में ‘बिल्ली’ और ‘कुत्ता स्कूली अध्यापक के तरह कक्षा लगाकर ‘पशु अधिकारों के प्रति जागरूकता सप्ताह’ के अवसर पर नसबंदी का पाठ पढ़ाएंगे
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17 June 2026
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नागपुर – पशु अधिकारों के प्रति जागरूकता सप्ताह (16–22 जून) के अवसर पर PETA इंडिया के दो समर्थक बिल्ली और कुत्ते की पोशाक पहनकर नागपुर की सड़कों पर एक अनोखी कक्षा लगाएंगे। ये ‘पपी प्रोफेसर’ और ‘किट्टी ट्यूटर’ ब्लैकबोर्ड पर राहगीरों को ‘ABC’ यानी Animal Birth Control – (पशु जन्म नियंत्रण) का पाठ पढ़ाएंगे। इस रचनात्मक अभियान के ज़रिए ‘पपी प्रोफेसर’ और ‘किट्टी ट्यूटर’ लोगों को यह याद दिलाएंगे कि घरेलू पशुओं की नसबंदी न केवल उनके जीवन को लंबा और स्वस्थ बनाती है, बल्कि यह सड़कों पर बेघर पशुओं की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका भी है।
कब: बुधवार, 18 जून, ठीक दोपहर 12 बजे
कहां: संविधान चौक, 533J+39Q, RBI स्क्वायर, सिविल लाइंस, नागपुर, महाराष्ट्र – 440001
PETA इंडिया के कैंपेनस कोर्डिनेटर अथर्व देशमुख ने कहा, “हर साल लाखों कुत्ते और बिल्लियाँ सड़कों परदुख सहते हैं या आश्रय घरों में उपेक्षित जीवन बिताते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि उनके लिए पर्याप्त अच्छे घर उपलब्ध नहीं हैं। PETA इंडिया सभी से अपील करता है कि वे घरेलू पशुओं की नसबंदी कराएं, सामुदायिक नसबंदी अभियानों का समर्थन करें और जब भी किसी पशु को अपनाने का विचार करें, तो हमेशा उन्हें किसी आश्रय घर से ही गोद लें ताकि पहले से ही बेसहारा पशुओं से भरी इस दुनिया में और अधिक पशुओं को जन्म लेने और कष्ट झेलने से रोका जा सकें।”
भारत की सड़कों पर 6 करोड़ से अधिक बेसहारा कुत्ते और बिल्लियाँ जीवन यापन कर रहे हैं, जिनमें से अनगिनत भूख से संघर्ष करते हैं, दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं, जानबूझकर पीड़ित किए जाते हैं या अन्य तरीकों से क्रूरता का सामना करते हैं। इसके अलावा, 88 लाख से अधिक पशु उचित घरों की कमी के कारण शेल्टरों में रहने को मजबूर हैं। इस संकट का समाधान जितना सरल है, उतना ही प्रभावी भी – ABC, यानी Animal Birth Control. नसबंदी न केवल अनचाही आबादी को रोकती है, बल्कि यह पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होती है। नसबंदी किए गए पशुओं में प्रजनन तंत्र से संबंधित कैंसर होने की संभावना कम हो जाती है, और नर पशुओं के मामले में उनके भटकने या लड़ने की प्रवृत्ति भी घट जाती है।
पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023, जो कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के अंतर्गत अधिसूचित हैं, के अनुसार सामुदायिक कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण संबंधित स्थानीय निकायों – जैसे नगर निगमों, नगरपालिकाओं या पंचायतों – द्वारा कराया जाना अनिवार्य है। PETA इंडिया पशु अभिभावकों से अपील करता है कि वे अपने पालतू पशुओं की नसबंदी अवश्य कराएं, ताकि पहले से जन्म ले चुके नन्हें पशुओं को एक अच्छा और सुरक्षित घर मिलने का अवसर मिल सके।
PETA इंडिया जो इस धारणा में विश्वास रखता है कि “पशु मनुष्यों द्वारा दुर्व्यवहार सहने के लिए नहीं है”, प्रजातिवाद का विरोध करता है क्योंकि यह एक ऐसी विचारधारा है जिसमें मनुष्य इस संसार में स्वयं को सर्वोपरि मानकर अपनी अलग अलग जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों का शोषण करना अपना अधिकार समझता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारी वेबसाईट PETAIndia.com पर जाएँ और X, Facebook, व Instagram पर हमें फॉलो करें।
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