फरीदाबाद के अस्पताल से अवैध रूप से बंदी बनाए गए लंगूर को रेस्क्यू कराया गया — PETA इंडिया की शिकायत पर POR दर्ज
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15 May 2025
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फरीदाबाद — सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक वीडियो सामने आने के बाद, जिसमें सर्वोदय अस्पताल, फरीदाबाद में एक भारतीय ग्रे लंगूर को अवैध रूप से बंदी बनाकर रखे जाने की झलक दिखी, PETA इंडिया ने इस मामले को गंभीरता से लिया। उल्लेखनीय है कि यह प्रजाति वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची II के तहत संरक्षित है। PETA इंडिया ने हरियाणा वन विभाग के गुरुग्राम वन मंडल के साथ समन्वय कर त्वरित कार्रवाई की, जिसके तहत इस मामले में प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट (POR) दर्ज की गई।
यह मामला वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9 और 39 के तहत दर्ज किया गया, जिसमें एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की गई है। सामने आए वीडियो और प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक भारतीय ग्रे लंगूर को हरियाणा के फरीदाबाद स्थित सर्वोदय अस्पताल (सेक्टर 19, गोपी कॉलोनी) की छत पर टिन की शेड के नीचे रस्सी से बांधकर अवैध रूप से कैद में रखा गया था। बताया गया कि उसे पूरे दिन, यहां तक कि तेज़ गर्मी के समय में भी उसी स्थिति में रखा जाता था, जिससे उसे अत्यधिक पीड़ा और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा था। लंगूर को जिस तरह तपती छत पर अकेले कैद कर रखा गया था, वह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि यह पशु के प्रति गहरी संवेदनहीनता को दर्शाता है। सौभाग्यवश, लंगूर को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उसे उसके प्राकृतिक आवास में आज़ाद किया गया, जिससे उसे राहत और स्वतंत्रता मिल सकी।
वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अनुसार यह एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए तीन साल तक की जेल या ₹1,00,000 तक जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। हालांकि, इस मामले में वन विभाग ने अधिनियम की धारा 54 के तहत मिली कानूनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए आरोपी पर ₹5,500 का जुर्माना लगाकर मामला निपटा दिया।
PETA इंडिया के क्रुएल्टी रिस्पॉन्स कोऑर्डिनेटर वीरेंद्र सिंह ने कहा, “हम गुरुग्राम के मंडलीय वन्यजीव अधिकारी श्री राम कुमार जांगड़ा और वन क्षेत्र अधिकारी श्री कृष्ण कुमार का धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने इस कैद लंगूर को गंभीर स्थिति से निकालने के लिए PETA इंडिया के साथ मिलकर सराहनीय कार्य किया। PETA इंडिया सभी नागरिकों से अपील करता है कि अगर उन्हें किसी भी पशु के साथ हो रही क्रूरता की जानकारी मिले, तो वे तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पशु संरक्षण समूह, पुलिस अथवा यदि मामला वन्यजीव से जुड़ा हो तो संबंधित वन विभाग को दें।”
भारतीय ग्रे या हनुमान लंगूर जंगलों में अपने परिवारों के साथ रहते हैं, जहां वे आज़ादी से उछल कूद करते हैं, पेड़ों पर झूलते हैं और लगभग 100 सदस्यों तक के घनिष्ठ समूहों में जीवन बिताते हैं। वे एक-दूसरे के साथ खेलते हैं, मौज मस्ती करते हैं, और सामाजिक रिश्तों को निभाते हैं। जब कोई खतरा महसूस होता है, तो परिवार के सदस्य बिना देर किए एक-दूसरे की रक्षा में आगे आते हैं।
PETA इंडिया जो इस धारणा में विश्वास रखता है कि “पशु मनुष्यों द्वारा दुर्व्यवहार सहने के लिए नहीं है”, प्रजातिवाद का विरोध करता है क्योंकि यह एक ऐसी विचारधारा है जिसमें मनुष्य इस संसार में स्वयं को सर्वोपरि मानकर अपनी अलग अलग जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों का शोषण करना अपना अधिकार समझता है।
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