जूते और बैग के लिए गायों और भैंसों की हत्याओं के विरोध में मुंबई में PETA इंडिया की संस्थापक का “जिंदा उधड़ी खाल” में प्रदर्शन
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21 March 2025
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मुंबई – शुक्रवार को मुंबई में सड़क पर से गुजर रहे लोगों को एक चौंकाने वाला दृश्य देखने को मिलेगा, जब पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) इंडिया की संस्थापक इंग्रिड न्यूकिर्क एक कसाई द्वारा “जिंदा खाल उधेड़े” जाने वाले पशु की स्थिति को उजागर करने वाला प्रदर्शन करेंगी और संदेश देंगी कि “हम सभी जीवित प्राणी है कोई वस्तुएं नहीं”। इंग्रिड एक विशाल बैनर के सामने यह शक्तिशाली प्रदर्शन करेंगी जिस पर बूचड़खाने का दृश्य बना होगा और उस पर लिखा होगा “उनके भाग्य के बारे में सोचें”। इस प्रदर्शन के द्वारा PETA की संस्थापक यह संदेश दे रही हैं कि चमड़े के लिए इस्तेमाल होने वाली गाय, भैंसे और अन्य पशु किस पीड़ा, दर्द, डर और यातना से गुजरते हैं और सामान्य जीवन जीने के लिए संघर्ष करते हैं। वह भी हम इंसानों की तरह जीवित रहना चाहते हैं इसलिए इंसानों को उनका सम्मान करना चाहिए और उन्हें महज अपने इस्तेमाल का सामान नहीं बनाना चाहिए।
प्रदर्शन का स्थान : कैंपस शू स्टोर के सामने, (यह केवल लैंडमार्क है, इसका स्थान के चुनाव या प्रदर्शन के साथ कोई संबंध नहीं) 3R5P+WPH, एसवी रोड, लिंकिंग रोड और टर्नर रोड के चौराहे पर, बांद्रा पश्चिम, मुंबई 400050
प्रदर्शन का समय: शुक्रवार, 21 मार्च, ठीक दोपहर 12 बजे
इंग्रिड कहती हैं, “हर चमड़े का बैग और जूता किसी ऐसे प्राणी की खाल से बना है जो अपने परिवार से प्यार करता था, अपने जीवन को महत्व देता था और मरना नहीं चाहता था। PETA इंडिया सभी से अनुरोध करता है कि केवल सुंदर वीगन सामग्रियों से बनी वस्तुओं को ही चुनें।“
गाय और भैंसें बहुत भावुक और अपने बच्चों की सुरक्षा करने वाली माताएँ होती हैं जो सामाजिक रिश्तों को महत्व देती हैं और अपने झुंड के अन्य सदस्यों के लिए सहानुभूति रखती हैं। गायों की यादाश्त भी बहुत अच्छी होती है और वे भूलभुलैया को अच्छी तरह से समझ सकती हैं और उसे याद रख सकती हैं। चमड़े के लिए इस्तेमाल किए जाने पर, इन पशुओं को अक्सर इतनी बड़ी संख्या में वाहनों में ठूंस दिया जाता है कि बूचड़खानों तक की यात्रा के दौरान ही उनकी हड्डियाँ टूट जाती हैं। इस दर्दनाक यात्रा से जो बच जाते हैं उन्हें बूचड़खाने में कसाई अन्य साथी पशुओं के सामने खुले में तड़फा-तड़फा कर उनका गला काट देते हैं और सचेत अवस्था में होने के दौरान ही उनके शरीर से उनकी खाल नोच लेते हैं। चमड़े के कारखानों से निकलने वाला पानी रासायनिक पानी नदियों और नालों में मिलकर उस पानी को भी दूषित कर देता है जिससे वहाँ रहने वाले अन्य सभी जीवों को भी नुकसान पहुँचता है। चमड़े के कारखानों में काम करने वाले मनुष्यों को अक्सर कैंसर, श्वसन संक्रमण और अन्य बीमारियाँ भी होती हैं।
वीगन चमड़े और अन्य पशु-अनुकूल सामग्री से बने सुंदर जूते और कपड़े देश भर में लगभग सभी बाजारों में आसानी से मिल जाते हैं। वीगन उत्पादों को प्रमाणित करने वाला “PETA-Approved Vegan” लोगो उन उत्पादों पर लगा होता है जो पूरी तरह से वीगन हैं और यह प्रमाणित करता है कि उस प्रोडक्ट को बनाने में किसी भी पशु के चमड़े, रेशम, ऊन, फर और पंखों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह लोगो वीगन सामग्रियों से बने हैंडबैग, जूते, कपड़े, सहायक उपकरण, फर्नीचर और घर की सजावट की वस्तुओं पर लगा होता है इसलिए जब भी खरीदारी करें आप इस लोगो को ध्यान में रखें। दुनिया भर में 1000 से अधिक कंपनियाँ हैं जो भारत सहित कई अन्य देशों में अपने वीगन प्रोडक्टस पर इस लोगो को इस्तेमाल करती हैं और ग्राहकों को वीगन उत्पादों की पहचान करने में मदद करती हैं।
PETA इंडिया इस सिद्धांत में विश्वास रखता है कि “पशु हमारे वस्त्र बनने के लिए नहीं हैं”, प्रजातिवाद का विरोध करता है। प्रजातिवाद एक ऐसी धारणा है जिसके तहत इंसान स्वयं को इस संसार में सर्वोपरि मानकर, अपनी जरूरतों के अनुसार अन्य प्रजातियों का इस्तेमाल एवं शोषण करता है। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट PETAIndia.com पर जाएँ और हमें X, Facebook, Facebook हिन्दी, तथा Instagram पर फॉलो करें।
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